Friday, February 27, 2026
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हमले से बचने के लिए कल दुर्ग में मॉक-ड्रिल:दुश्मन देश का हवाई हमला हुआ तो कैसे खुद को बचाना है, होगी प्रैक्टिस

दुर्ग -केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद युद्ध के दौरान होने वाले हमले से बचने के लिए कल (7 मई) छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मॉक ड्रिल होगी। मॉक ड्रिल में सायरन बजते ही आधे घंटे के लिए 8 शहर अंधेरे में डूब(ब्लैकआउट) जाएंगा। यह सायरन हवाई हमले से सतर्क करने के लिए बजाए जाते हैं।केंद्र सरकार ने देश के 244 जिलों में  मॉक ड्रिल करने के लिए कहा है।मॉक ड्रिल का टाइम अभी तय नहीं है, लेकिन मंगलवार को दुर्ग जिला प्रशासन प्रेक्टिस को लेकर जल्द जानकारी साझा करेगा।

पाकिस्‍तान से तनाव के बीच केंद्र सरकार ने देश के 244 जिलों में 7 मई को मॉक ड्रिल करने के लिए कहा है। इसमें छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के नागरिकों को हमले के दौरान खुद को बचाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह इसलिए किया जा रहा है, जिससे युद्ध की स्थिति में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।..देश में पिछली बार ऐसी मॉक ड्रिल 1971 में हुई थी। तब भारत और पाकिस्‍तान के बीच युद्ध हुआ था….। यह मॉक ड्रिल युद्ध के दौरान हुई थी।….

दरअसल, 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बड़ा आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। सरकार किसी भी संभावित खतरे से पहले तैयारी करना चाहती है। एयररेड वॉर्निंग सिस्टम के दौरान अलर्टनेस चेक की जाएगी 2. इंडियन एयरफोर्स के साथ हॉटलाइन और रेडियो कम्युनिकेशन जोड़ना 3. कंट्रोल रूम और असिस्टेंट कंट्रोल रूम की वर्किंग सही हो, यह तय करना 4. हमले की स्थिति में आम लोग, छात्र अपनी रक्षा कैसे करें 5. ब्लैकआउट की स्थिति में क्या करना है 6. महत्वपूर्ण संस्थानों, प्लांट्स को कैसे बचाना-छिपाना है 7. सिविल डिफेंस सिस्टम एक्टिवेट करना, इमरजेंसी में आम नागरिकों की मदद करने वाली टीमों- फायरफाइटर्स, रेस्क्यू ऑपरेशन का मैनेजमेंट 8. हमले की स्थिति में निकासी का प्लान और उसके एक्जिक्यूशन के लिए कितना तैयार हैं..सायरन बजाए जाएंगे और चेतावनी दी जाएगी…।इंडियन एयर फोर्स से रेडियो और हॉटलाइन से संपर्क किया जाएगा।….कंट्रोल रूम और शैडो कंट्रोल रूम एक्टिव होंगे…..।आम लोगों और छात्रों को सुरक्षा की ट्रेनिंग दी जाएगी।

मॉक ड्रिल फायर ब्रिगेड, वार्डन, रेस्क्यू टीम जैसी सेवाएं सक्रिय होंगी।…ब्लैकआउट और जरूरी ठिकानों को छिपाने की प्रक्रिया की जांच की जाएगी।..लोगों को निकालने की योजना पर अभ्यास किया जाएगा।…बंकरों की सफाई और उपयोग की तैयारी भी की जाएगी।..मॉक ड्रिल यानी एक तरह की “प्रैक्टिस” जिसमें हम यह देखते हैं कि अगर कोई इमरजेंसी (जैसे एयर स्ट्राइक या बम हमला) हो जाए, तो आम लोग और प्रशासन कैसे और कितनी जल्दी रिएक्ट करता है। ब्लैकआउट एक्सरसाइज का मतलब है कि एक तय समय के लिए पूरे इलाके की लाइटें बंद कर देना।

वाईस]सिविल डिफेंस वॉर मॉक ड्रिल का मकसद यह दिखाना होता है कि अगर दुश्मन देश हमला करे, तो इलाके को अंधेरे में कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे दुश्मन को निशाना साधने में मुश्किल होती है।मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि देश किसी भी आपात स्थिति या दुश्मन के हमले के लिए कितना तैयार है। इसके जरिए ये बातें जांची जाती हैं।….एयर रेड सायरन (हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन) कितने सही तरीके से काम कर रहे हैं।…इंडियन एयर फोर्स से हॉटलाइन और रेडियो कम्युनिकेशन लिंक काम कर रहे हैं या नहीं।,,,कंट्रोल रूम और उनके विकल्प (शैडो कंट्रोल रूम) सही से एक्टिव हैं या नहीं।…

मॉक ड्रिल में आम लोगों, छात्रों आदि को सिखाया जाएगा कि अगर दुश्मन हमला करे तो कैसे अपनी सुरक्षा करें।….ब्लैकआउट की व्यवस्था (अचानक सभी लाइटें बंद करने की तैयारी) की जांच।जरूरी सरकारी प्लांट्स या ठिकानों को जल्दी से छिपाने की तैयारी।….सिविल डिफेंस जैसे वार्डन, फायर ब्रिगेड, रेस्क्यू टीम और अन्य सेवाएं कितनी जल्दी और असरदार ढंग से काम करती हैं।लोगों को सुरक्षित स्थानों पर निकालने की योजना की जांच और अभ्यास।…बंकर, खाइयों आदि की सफाई और उपयोग की तैयारी.के बारे में बताया जाएगा . दुर्ग में 6 जगह सायरन

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