सिलयारी
रायपुर से लगे धरसीया विधानसभा क्षेत्र के राशन दुकान में मिलावट करने वाला मामला सामने आया है..। यहां सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मुफ्त में गरीबों को दिए जाने वाले चावल में रेत और मिट्टी मिलाने का मामला सामने आया है…। गरीबों के निवाले में रेती और कंकड मिलाकर वजन बढ़ाकर पैसा कमाने का यह खेल दुकानदार द्वारा पिछले कई महीनो से किया जा रहा है…। अधिकारियों से भी शिकायत की जा चुकी है लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है।

छत्तीसगढ़ में सरकार के द्वारा पूरे प्रदेश में सुशासन त्यौहार मनाया जा रहा है, इसी के बीच धरसीवा विधानसभा क्षेत्र के सिलयारी के पास के ग्राम महुआ गांव में संचालित सरकारी राशन दुकान में गरीबों के निवाले मैं रेत और मिट्टी मिलाए जाने का मामला सामने आने के बाद सरकार के सुशासन त्यौहार की पोल खोल कर रख दी है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले सात आठ महीनो से दुकानदार के द्वारा गरीबों को दिए जाने वाले मुफ्त चावल का वजन बढ़ाकर पैसा कमाने रेत और मिट्टी मिलाने का खेल खेला जा रहा है। गरीबों के निवाले में की जा रही इस गड़बड़ी की शिकायत गांव वाले फूड इंस्पेक्टर से लेकर जनप्रतिनिधियों से कर चुके हैं… लेकिन दुकानदार पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई गई है। बताया जाता है कि इस सरकारी दुकान को अग्रसेन प्रा.सहकारी उप भंडार के नाम निजी हाथों में सौपा गया है, गांव वालों को कहना है कि जब से यह दुकान निजी हाथों में गया है तब से इस तरह की शिकायतें सामने आ रही है।
यह मामला तब सामने आया जब 2 दिन पहले जिला पंचायत सदस्य सरोज चंद्रवंशी दौरे पर महुआ गांव पहुंची तो गांव वालों ने उनसे दुकानदार के खिलाफ शिकायत कर दी, उसके बाद जिला पंचायत सदस्य ईश्वरी भारती सरपंच टीकेश्वरी वर्मा और ग्रामीणों के साथ दुकान पहुंच गई, जब उसने चावल की क्वालिटी को देखा तो वह भी दंग रह गई। वितरण केंद्र में रखे चावल में रेत और मिट्टी मिली हुई थी। ग्रामीणों ने बताया कि चावल का वजन बढ़ाने के लिए रेत और मिट्टी मिलाने का कार्य दुकानदार के द्वारा किया जाता है। कुछ लोगों ने बताया कि एक बोरे में चार से पांच किलो रेती और मिट्टी मिलाई जाती है।
जिला पंचायत सदस्य सरोज चंद्रवंशी ने बताया कि वितरण किए जा रहे चावल में गोटी कंकड़ और मिट्टी है, वही गांव की सरपंच टिकेश्वरी वर्मा ने कहा कि चावल पकाने में अजीब सी सुगंध आती है, शिकायत करने पर सेल्समैन कहता है जिसको समझ में नहीं आता है वह चावल मत ले।
बता दे पीडीएस यानी की राशन की दुकानों में गरीबों को चावल मुफ्त में दिया जाता है। दुकानों मैं सरकार द्वारा राशन कार्डों के आधार पर निर्धारित मात्रा में चावल बांटने के लिए दिया जाता है ,,लेकिन सरकारी दुकानों को निजी हाथो में लेकर दुकानदार पैसा कमाने के लिए इस तरह का कार्य करते हैं ..और प्रत्येक बोरे 4 से 5 किलो मिट्टी और रेत की मिलावट कर, उतना चावल बोरे से निकाल लेते हैं. बोर से नकले गए चावल की कीमत बाजार में 150 रुपए की है चावल को बाजार में बेच दिया जाता हैं।
महुआ गांव की राशन दुकान में कुथरेल के लोगों को भी चावल का वितरण किया जाता है। दोनों गांव के लिए लगभग 1 हजार बोरा चावल आता है ऐसे में दुकानदार डेढ़ लाख रुपए से भी अधिक रूपोयो का चावल की हेरा फेरी कर लेता है, इसके अलावा तौल में भी डडी मारी जाती है,,,। ग्रामीणों ने इस दुकान को तत्काल निजी हाथों से वापस लेने की मांग शासन से की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ठेकेदार को नहीं हटाया गया तो गांव के लोग आंदोलन करेंगे।
इस मामले के सामने आने के बाद सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। दुकानदार के द्वारा कई महीनो से इस प्रकार की गड़बड़ी की जा रही है जिसकी शिकायत ग्रामीण फूड इंस्पेक्टर से लेकर अन्य अधिकारियों से कर चुके हैं लेकिन दुकानदार की पहुंच के चलते इस पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि निजी दुकानदार हर महीने फूड इंस्पेक्टर और नेताओं को खुश करने के लिए बंधी बंधी रकम देते हैं। शिकायत होने के बाद अगर जांच होती भी है तो जांच में सब कुछ सही पाया जाता है।ब्यूरो रिपोर्ट VCV टाइम्स Raipur Tilda

