Thursday, February 19, 2026
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बिलासपुर के ATR में बाघिन AKT-13 की मौत:गले पर नुकीली चीजों से वार के निशान,

बिलासपुर-छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व एरिया (ATR) की बाघिन AKT-13 की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है बाघिन के शव में कांटेदार नुकीली चीजों से वार के निशान मिले हैं। जिससे बाघिन की शिकार करने की आशंका है। वहीं टाइग्रेस की मौत पर ATR के अफसरों की लापरवाही सामने आई है। गुरुवार को सुबह 8 बजे सूचना मिलने के बाद भी अफसर शुक्रवार दोपहर बाद मौके पर पहुंचे। प्रदेश में बाघों की संख्या घटकर 19 हो गई है।

घटना बुधवार की है। बाघिन की लाश लमनी से छिरहट्टा जाने वाले मार्ग पर पड़ी थी। वन विभाग के अफसरों को इसकी जानकारी नहीं थी। दूसरे दिन गुरुवार को सर्चिंग के दौरान स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स की टीम जब वहां से गुजर रही थी, तब उन्हें मृत बाघिन नजर आई। अब प्रबंधन का दावा है कि बाघ से संघर्ष के दौरान बाघिन की जान गई है। हालांकि, सही वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद सामने आएगी।

जैसे ही इस घटना की जानकारी वन अफसरों को मिली। सबसे पहले उन्होंने अपना मोबाइल बंद कर दिया। इसके बाद आनन-फानन में अधिकारियों से लेकर वनकर्मी मौके पर पहुंचे। इसके साथ ही जांच पड़ताल की। जिस क्षेत्र में घटना हुई है वह टी 200 बाघ का है। स्थानीय वनकर्मी भी इस मामले में जानकारी देने से बचते रहे।

गुरुवार की सुबह 8 बजे अचानकमार टाइगर रिजर्व के अफसरों के पास बाघिन की मौत की सूचना पहुंची। लेकिन, अफसरों ने मैदानी अमले को बाघ के शव के पास रहने को कहा। कानन पेंडारी के डॉ. पीके चंदन बारनवापारा क्षेत्र में ​थे। यहां दूसरा डॉक्टर नहीं ​​था जो बाघ का पोस्टमॉर्टम कर सके।

बताया जा रहा है बुधवार को पूरा दिन ऐसे ही गुजर गया। शाम को कुछ अफसर वहां पहुंचे। गुरुवार को सुबह से एसटीपीएफ के सदस्य आसपास जंगल में सूत्र तलाशते रहे। एटीआर के अफसरों और डॉक्टरों की टीम दोपहर बाद मौके पर पहुंची और पोस्टमॉर्टम कराया। फिलहाल बाघिन की मौत की वजह कोई नहीं बता रहा है। लेकिन जो लोग मौके पर थे उनके मुताबिक बाघिन के शव के आसपास कुछ ऐसे निशान मिले हैं जिससे शिकार की आशंका है।

 अचानकमार टाइगर रिजर्व की बाघिन AKT-13 की उम्र लगभग 6 साल थी। इसकी मौजूदगी शुरू से ही लमनी क्षेत्र में थी। इससे बाहर वह कभी नहीं गई। बुधवार को लमनी रेंज के ग्राम चिरहट्‌टा के जंगल में उसकी मौत हो गई। ATR प्रबंधन का दावा है कि बाघ के साथ संघर्ष में बाघिन की मौत हुई है।

यह लड़ाई मेटिंग और टेरिटरी (अपने क्षेत्र की सुरक्षा) का परिणाम है। हालांकि यह केवल एक अनुमान है। सही वजह तो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में स्पष्ट होगी। अफसरों की मौजूदगी में मृत बाघिन का चिकित्सकों ने पोस्टमॉर्टम किया। इसके बाद उसका अंतिम संस्कार किया गया।

 पता चला है कि जिस जगह में बाघिन मृत मिली उस क्षेत्र में दो बाघ और दो बाघिन घूम रहे हैं इनमें से एक बाघ और एक बाघिन एटीआर के हैं। जबकि एक बाघ और एक बाघिन कान्हा टाइगर रिजर्व के हैं जो​ कि इन दिनों इसी क्षेत्र में विचरण कर रहे हैं।

इन्हीं बाघ में से किसी एक के साथ बाघिन के संघर्ष होने का अनुमान अफसर लगा रहे हैं। बाघिन के शव के पास दूसरे बाघ के पंजों के निशान मिलना भी बताया जा रहा है। पोस्टमॉर्टम में बाघिन के गर्दन पर दांत गड़े होने के निशान और श्वांस नली फटने की बात बताई जा रही है। श्वांस नली फटने से बाघिन की मौत होना बताया जा रहा है।

 नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की रिपोर्ट की माने तो छत्तीसगढ़ में 2014 की गणना में 46 बाघ थे। 2018 में यह संख्या घटकर 19 रह गई। पिछले साल आई रिपोर्ट के अनुसार राज्य के तीन टाइगर रिजर्व उदंती-सीतानदी, अचानकमार और इंद्रावती में केवल सात बाघ हैं।

पिछले 10 सालों में राज्य के अलग-अलग इलाकों में लगातार बाघों के शिकार की खबरें आती रही हैं। वन विभाग के स्थानीय अमले ने कई अवसरों पर शिकारियों को पकड़ा भी है। लेकिन, बाघों की आबादी बढ़ाने की दिशा में वन विभाग ने कोई कोशिश नहीं की।

 ATR के डिप्टी डायरेक्टर यूआर गणेशन के मुताबिक बाघ से संघर्ष के दौरान बाघिन की मौत की आशंका है। इस घटना की जानकारी एटीआर की एसटीपीएफ के सदस्य से मिली है। इस मामले की जांच कर उसकी मौत के कारणों का पता लगाया जा रहा है। पीएम रिपोर्ट आने के बाद बाघिन की मौत के स्पष्ट कारणों का पता चल सकेगा।

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