रायपुर। पूर्ववर्ती सरकार में अबकारी विभाग अपने कारनामों के लिए कुख्यात था। नई सरकार बनते ही भ्रष्टाचार के मामले में अनेक बड़े अफसर और दिग्गज कांग्रेसी सलाखों के पीछे पहुंच गए। इस सबको देखकर लगा कि सुशासन आ गया है और आबकारी विभाग में कुंडली मारे बैठे सभी भ्रष्टाचारी हवालात में नजर आएंगे। किंतु यह सब अर्धसत्य साबित हुआ। बिलासपुर में अबकारी विभाग पदस्थ एक बाबू दिग्गज अफसरों पर भारी नजर आ रहे हैं। एसीबी के छापे में काली कमाई की करोड़ों की संपति मिली पर उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। कहा जाता है कि “लक्ष्मी की कृपा” से बिलासपुर के आबकारी विभाग को यही भ्रष्ट बाबू चला रहा है, उस पर मंत्रालय में पदस्थ एक कमिश्नर का वरदहस्त है।
मामला न्यायधानी का है, जहाँ आबकारी विभाग में पदस्थ लिपिक दिनेश कुमार दुबे के खिलाफ छह वर्ष पूर्व आय से अधिक संपत्ति का मामला एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज किया गया था। आबकारी सहायक आयुक्त कार्यालय में पदस्थ दुबे के पास से करीब 5 करोड़ रु. की संपत्ति मिली थी। दुबे मूलरूप से मस्तूरी के पास ग्राम पाराघाट का निवासी है। वर्ष 2009 में उसने नौकरी ज्वाइन की थी। इसके खिलाफ एसीबी को शिकायत मिली थी कि उसके पास आय से अधिक की संपत्ति है। वर्ष 2018 में एसीबी में शिकायत के बाद दुबे के खिलाफ जांच हुई, जिसमें करोड़ों की बेनामी संपत्ति मिली। जांच में 4 आलीशान मकान मिले। जांच में कुदुदंड में 12सौ स्क्वेयर फीट का दो मंजिला व 1हजार स्क्वेयर फीट का सड़क किनारे मकान, गंगानगर व भारतीय नगर में 2-2 हजार स्क्वेयर फीट के मकान, पत्नी के नाम पर चकरभाठा में 2 एकड़ जमीन, भारतीय स्टेट बैंक में चार ज्वाइंट एकाउंट, हर एक में 9 लाख रुपए पो गए थे। उसकी कुल संपत्ति करीब 5 करोड़ रुपए आंकी गई। इसके अलावा पैतृक गांव में दो एकड़ जमीन है। इतना ही नहीं, दुबे की बेटी ने भारी-भरकम पैसा देकर में एमबीबीएस की पढ़ाई की है।
एसीबी की जांच में भ्रष्टाचार का खुलासा होने के बाद भी आरोपित दुबे निलंबित नहीं हुआ, जबकि नियमतः बेनामी संपत्ति के मामले में तत्काल इस बाबू पर कार्रवाई करते हुए बर्खास्त किया जाना था। मगर जाने क्या कारण है कि आबकारी विभाग के उच्चाधिकारियों की इस बाबू के खिलाफ कार्रवाई करने में हाथ पाँव फूल रहे हैं। बीते 7 वर्षो से यह बाबू बिलासपुर में ही पदस्थ है। उसके खिलाफ अनेक आरोप लगे पर उसे कोई हिला भी नहीं सका। प्रदेश में सत्ता बदल गई और ‘विष्णु के सुशासन’ वाली सरकार आ गई और आबकारी विभाग प्रदेश के मुखिया विष्णुदेव साय के पास ही है, मगर सुशासन की सरकार के नाम पर बट्टा लगाने वाला यह बाबू अभी भी जमा हुआ है। सुशासन वाली सरकार ऐसे मामलों में भी कठोर कार्रवाई अगर नहीं करती है तो भ्रष्टाचार और बढ़ेगा और सरकार के प्रति लोगों में अविश्वास बढ़ेगा।

