छत्तीसगढ़ के सबसे विवादित IPS अफसर को उनकी नौकरी वापस मिल गई है। GP सिंह अब जल्द फिर से वर्दी में दिखेंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से IPS GP सिंह को पुनः सेवा में बहाल किए जाने के आदेश जारी किए गए हैं।
साल 2021 में कांग्रेस सरकार की ओर से GP सिंह पर किए गए केस हाईकोर्ट ने खत्म कर दिए हैं। इस अफसर पर आय से अधिक संपत्ति, राजद्रोह और ब्लैकमेलिंग मामले में FIR दर्ज की गई थी। कुछ महीने ये जेल में रहे। सस्पेंड हुए। फोर्सफुली रिटायर किए गए, लेकिन इन्होंने अपनी जॉब वापस हासिल की है।


केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 12 दिसंबर को एक आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि IPS अधिकारी जीपी सिंह को फिर से सेवा में बहाल कर दिया है। यह आदेश केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के निर्णय के आधार पर दिया गया है।
गृह मंत्रालय ने 20 जुलाई 2023 को जारी निलंबन आदेश को रद्द करते हुए उन्हें उसी दिनांक से फिर से उनके पद पर बहाल कर दिया है।
इन आधारों पर कोर्ट ने सर्विस दी
GP सिंह पर चल रहे मुकदमों को आधार बनाकर उन्हें उनकी नौकरी से अलग किया गया। इसके बाद सिंह की ओर से IPS-IAS अफसरों के एक तरह के न्यायिक आयोग केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) में पूरे मामले को चैलेंज किया गया।
1994 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के अधिकारी गुरजिंदर पाल सिंह (GP सिंह) को 20 जुलाई 2023 को गृह मंत्रालय के आदेश पर सेवानिवृत्त कर दिया गया था, जिस पर उन्होंने CAT में चुनौती दी थी। ये रिटायरमेंट प्रदेश में तब की कांग्रेस सरकार की रिपोर्ट के आधार पर हुआ था।
- CAT ने 10 अप्रैल 2024 को गृह मंत्रालय के आदेश को रद्द करते हुए जीपी सिंह को सेवा में बहाल करने का आदेश दिया और उनके सभी लाभों को पुनः लागू करने की दिशा में निर्देश दिए। मगर तब गृह मंत्रालय ने इस आदेश को नहीं माना और दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन उच्च न्यायालय ने 23 अगस्त को मंत्रालय की याचिका खारिज कर दी।
- गृह मंत्रालय ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट में 10 दिसंबर को जस्टिस ऋषिकेश राय और जस्टिस एसबीएन भाटी की डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई।
- केंद्र की ओर से कहा किया जो कि जीपी सिंह के खिलाफ तीन अपराधिक प्रकरण दर्ज हुए थे। बचाव पक्ष ने सिंह की ओर से बताया कि तीनों आपराधिक प्रकरणों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के डिवीजन बेंच ने रद्द कर दिया है।
- केंद्र की ओर से कहा गया कि बिलासपुर में पदस्थ रहे आईपीएस राहुल शर्मा ने सुसाइड कर लिया था, तब जीपी सिंह ही उसके सीनियर थे। इस मामले में जीपी सिंह पर शर्मा पर दबाव बनाने का आरोप था। जीपी के अधिवक्ताओं ने बताया कि राहुल शर्मा आत्महत्या के मामले में सीबीआई जांच हुई थी। सीबीआई ने इस मामले में कोई तथ्य न पाते हुए सीबीआई कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट पेश किया था। जिसके बाद भी तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जानबूझकर फिर से जांच टीम बना दी थी। जांच कमेटी को दिल्ली कैट ने नियम विरुद्ध बताया है।
- केंद्र की तरफ से तीसरे तथ्य के रूप में कहा गया कि जीपी सिंह की सर्विस एसीआर में केवल 6 नंबर दिए गए हैं। जीपी के अधिवक्ता ने बताया कि एसीआर को दिल्ली कैट में चुनौती दी गई थी। जिस पर कैट के आदेश से सुधार कर 6 नंबर से आठ नंबर कर दिया गया है। इसे सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सर्विस फिर से बहाल करने के निर्देश दिए और गृह मंत्रालय ने अब आदेश जारी किया है।
जब GP सिंह के घर छापा पड़ा था
GP सिंह खुद ACB के चीफ थे। जब उनके घर पर साल 2021 में छापा पड़ा तो वो ADG रैंक पर थे। जांच से जुड़े अफसरों ने बताया था कि उनके घर से कुछ डायरियां और डायरियों के फटे पन्ने मिले हैं। इस डायरी में जादू-टोने से जुड़ी बातें लिखी हुई हैं।
एक डायरी में कोड वर्ड में कुछ अफसरों के बारे में अजीब बातें लिखी हैं। डायरी में लिखा है- वह थाईलैंड से 20 पैर वाला कछुआ मंगवा चुके हैं। उसकी बलि देने के बाद कुछ भी कर सकेगा। इनमें से एक अफसर का नाम “छोटा टकला” लिखा गया ।

