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सुरक्षित बचपन की पहल: बैकुंठ स्कूल के 600 विद्यार्थियों को बताए गए बाल अधिकार और पॉक्सो कानून

जागरूकता रैली और चित्रकला के जरिए बच्चों को दिया सुरक्षा का संदेश, शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के लिए किया प्रेरित

तिल्दा नेवरा-बैकुंठ बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और बाल अपराधों से सुरक्षा के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर की पहल पर बैकुंठ स्थित द आदित्य बिरला पब्लिक स्कूल में विशेष विधिक साक्षरता कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के अखिल भारतीय ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 600 विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, पॉक्सो एक्ट, बाल शोषण, बाल विवाह और साइबर सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।

कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें किसी भी प्रकार के शोषण या अनुचित व्यवहार के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित करना था।

बच्चों की सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी
इस मौके पर माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी एवं अध्यक्ष, तालुका विधिक सेवा प्राधिकरण, तिल्दा-नेवरा  भावेश कुमार वट्टी के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को कानून की उपयोगिता और बच्चों के संरक्षण के महत्व से अवगत कराया गया। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और संरक्षण को समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि विधिक जागरूकता बाल अपराधों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विद्यार्थियों को किसी भी अनुचित घटना की जानकारी अपने अभिभावकों, शिक्षकों या जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर की अधिकार मित्र  नव्या साहू ने विद्यार्थियों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 यानी पॉक्सो एक्ट की जानकारी दी। उन्होंने अच्छे और बुरे स्पर्श की पहचान, बाल शोषण से बचाव और असहज परिस्थितियों में मदद मांगने के महत्व को सरल तरीके से समझाया।
उन्होंने बाल विवाह के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विद्यार्थियों को समझाया गया कि किसी भी प्रकार की धमकी, शोषण या संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में चुप रहने के बजाय विश्वसनीय वयस्क अथवा संबंधित अधिकारियों से सहायता लेनी चाहिए।

साइबर अपराध से बचाव के भी बताए तरीके
डिजिटल दौर में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को साइबर अपराध, साइबर बुलिंग और इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें अनजान लोगों के साथ व्यक्तिगत जानकारी, पासवर्ड और निजी तस्वीरें साझा नहीं करने की सलाह दी गई।
कार्यक्रम में जरूरत के समय सहायता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी गई। इनमें निःशुल्क विधिक सहायता के लिए 15100, आपातकालीन पुलिस सहायता के लिए 112, बाल सहायता के लिए 1098 तथा साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 शामिल हैं।

रैली और चित्रकला से दिया जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम को रोचक और प्रभावी बनाने के लिए विद्यार्थियों के बीच जागरूकता रैली एवं चित्रकला गतिविधि आयोजित की गई। बच्चों ने ‘मेरा बचपन, मेरा अधिकार’, ‘बोलो, बताओ, बचाओ’, ‘ना बाल विवाह, ना बाल शोषण’ और ‘कानून जानो, बचपन बचाओ’ जैसे संदेशों के माध्यम से सुरक्षित बचपन का महत्व बताया।
इन गतिविधियों ने विद्यार्थियों को अपने अधिकारों को समझने, सतर्क रहने और किसी भी प्रकार के शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया।

हर बच्चे को सुरक्षित बचपन दिलाना हम सबकी जिम्मेदारी
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि प्रत्येक बच्चे को सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा और भयमुक्त वातावरण में जीवन जीने का अधिकार है। बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की ही नहीं, बल्कि विद्यालय, समाज और प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।‘हर बच्चे का सुरक्षित बचपन—हम सबकी जिम्मेदारी’ के संकल्प के साथ आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में कानूनी जागरूकता बढ़ाने और बाल अधिकारों के प्रति संवेदनशील समाज के निर्माण का संदेश दिया।

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