तीसरे दिन उमड़ा जनसैलाब, गुजराती गरबा के साथ छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति और आधुनिक फ्यूजन का दिखा अनूठा संगम
तिल्दा-नेवरा -शारदीय नवरात्र की भक्ति, संगीत और उल्लास के बीच तिल्दा के दुर्गा बाड़ा में आयोजित गरबा महोत्सव अब पूरे रंग में रंग चुका है। सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव के तीसरे दिन हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। जैसे-जैसे रात गहराती गई, वैसे-वैसे गरबा खेलने वालों का उत्साह बढ़ता गया। पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों के एक साथ घूमते कदम, डांडिया की खनक और जोशीले गीतों की धुन ने पूरे मैदान को उत्सव के रंग में सराबोर कर दिया।
आयोजन के पहले दिन से ही उमड़ रही भीड़ को देखते हुए आयोजकों ने गरबा खेलने के लिए बनाए गए घेरे का आकार बढ़ा दिया है। इस महोत्सव की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तिल्दा-नेवरा के अलावा भाटापारा, रायपुर और धमतरी से भी प्रतिभागी यहां पहुंचकर मां दुर्गा की आराधना के साथ गरबा का आनंद ले रहे हैं।
सीटी बजते ही अलर्ट, फिर हजारों कदमों की एक साथ थिरकन
रात करीब 10 बजे तक गरबा खेलने वाले प्रतिभागियों का मैदान में पहुंचना जारी रहता है। आयोजन स्थल पर दो सर्किल बनाए गए हैं, जिनमें प्रतिभागी अनुशासन के साथ अपनी जगह लेते हैं। आयोजकों की सीटी बजते ही सभी प्रतिभागी अलर्ट हो जाते हैं और फिर शुरू होता है गरबा का जोशपूर्ण दौर।
करीब दो लाख वाट के साउंड सिस्टम और डीजे की दमदार धुनों के बीच जब ‘अंबे मां पधारो, ज्योत जगाओ रे’ और ‘ढोलिडा’ जैसे गीत गूंजते हैं, तो पूरा मैदान भक्तिभाव और उत्साह से भर उठता है। आरती संपन्न होने के बाद गरबा का पहला राउंड शुरू होता है। लगभग आधे घंटे तक चलने वाले इस दौर में एक के बाद एक पारंपरिक गरबा गीत बजते हैं और प्रतिभागी अपनी लय, ताल तथा आकर्षक स्टेप्स से दर्शकों का ध्यान खींचते हैं।
गुजराती रंग, राजस्थानी अंदाज और छत्तीसगढ़ी संस्कृति का संगम
दुर्गा बाड़ा का गरबा महोत्सव केवल नृत्य का आयोजन नहीं, बल्कि अलग-अलग संस्कृतियों और परिधानों का खूबसूरत संगम भी बन गया है। सज-धजकर मैदान में पहुंचीं युवतियां गुजराती कच्छ और सूरत की पारंपरिक वेशभूषा से लेकर आकर्षक लहंगों में नजर आईं। चश्मा, पायल, कंदोरा, मांग टीका, चूड़ियां, ब्रेसलेट और डिजाइनर छतरियों जैसी आकर्षक एक्सेसरीज ने उनके पहनावे को खास बना दिया।
वहीं, युवाओं ने अंगरखा, धोती, टोपी और पारंपरिक गुजराती परिधानों में अपनी अलग पहचान बनाई। कई युवतियों ने विशेष डिजाइन और अतिरिक्त कलियों वाले लहंगे तैयार करवाए, जो गरबा के दौरान घूमते समय बेहद आकर्षक दिखाई दिए। रंग-बिरंगे परिधानों से सजा मैदान ऐसा नजारा पेश कर रहा था, मानो गुजरात और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक छटा एक ही जगह उतर आई हो।
पारंपरिक गरबा पर आधुनिक गीतों का तड़का
इस बार गरबा महोत्सव में पारंपरिक गुजराती गीतों के साथ आधुनिक संगीत का फ्यूजन भी खूब पसंद किया जा रहा है। ‘वृंदावन रास रचे’ और ‘माथे बिंदिया, हाथों में चूड़ी’ जैसे गीतों की धुन पर प्रतिभागियों ने आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। वहीं, लोकप्रिय फिल्मी गीतों और रीमिक्स की धुनों ने युवाओं के उत्साह को और बढ़ा दिया।
गरबा की पारंपरिक गोलाकार नृत्य शैली में कहीं राजस्थानी लोकनृत्य की झलक दिखाई दी, तो कहीं पंजाबी, मराठी और छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति का रंग नजर आया। संगीत की बदलती धुनों के साथ प्रतिभागी अपने स्टेप्स में तालमेल बिठाते दिखे। मैदान में मौजूद दर्शक भी इन प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे और कई बार उत्साह बढ़ाने के लिए ‘वन्स मोर’ की आवाज गूंज उठी।
नन्हे प्रतिभागियों ने भी जीता दिल
गरबा महोत्सव में बच्चों की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। नन्हीं प्रतिभागियों पीहू कोटवानी, डिवीजा खूबचंदानी और डीवी बालचंदानी ने छत्तीसगढ़ी रीमिक्स की धुन पर गरबा कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। उनकी प्रस्तुति पर लोगों ने उत्साह बढ़ाया और दोबारा नृत्य देखने की मांग की।
आयोजन मंडल के आयुष कोटवानी, अनुष्का गिलानी, रानी कोटवानी, सेजल पंजवानी और कोयल नहिचलानी सहित अन्य सदस्य गरबा सर्किल में प्रतिभागियों के प्रदर्शन पर नजर रखते हैं। बेहतर तालमेल, आकर्षक स्टेप्स और शानदार प्रस्तुति देने वाले प्रतिभागियों को मंच पर बुलाकर पुरस्कृत भी किया जाता है। इससे प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ रहा है और हर राउंड में बेहतर प्रदर्शन करने की प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है।
सप्तमी पर मंदिरों और दुर्गा पंडालों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
गरबा महोत्सव के साथ शहर में नवरात्र की धार्मिक गतिविधियां भी पूरे चरम पर हैं। सप्तमी के अवसर पर मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। शाम होते-होते दुर्गा पंडालों में भी भक्तों की भीड़ बढ़ गई। मां के दर्शन, पूजा-अर्चना और आरती के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
महामाया मंदिर और मावली मंदिर सहित शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना में लीन नजर आए। दुर्गा बाड़ा के अलावा केसरवानी मोहल्ला, जैन बाड़ा नेवरा और अन्य स्थानों पर भी गरबा के आयोजन किए जा रहे हैं। इन आयोजनों के कारण शहर में शाम से देर रात तक उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।
नवरात्र के इस पावन अवसर पर तिल्दा-नेवरा में भक्ति और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। कहीं मंदिरों में मां की आराधना हो रही है, तो कहीं गरबा के गोल घेरे में हजारों कदम एक साथ थिरक रहे हैं। कुल मिलाकर, पूरा शहर मां दुर्गा की भक्ति, संगीत और उत्सव के रंग में रंगा नजर आ रहा है


