इंदर कोटवानी …..
दिल्ली में कैबिनेट फेरबदल की आहट… और इसका सीधा असर छत्तीसगढ़ की सियासत पर!
क्या तोखन लाल साहू की केंद्रीय मंत्रिमंडल से छुट्टी हो रही है …?
क्या बीजेपी अब उन्हें छत्तीसगढ़ की कमान सौंपने जा रही है?
और अगर साहू गए… तो दिल्ली में छत्तीसगढ़ का अगला मंत्री कौन होगा?
विजय बघेल… संतोष पांडे… या फिर लक्ष्मी वर्मा? सियासी गलियारों में हलचल तेज है!
केंद्र की सत्ता में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट है…मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा ने राजनीतिक गलियारों का पारा चढ़ा दिया है।चर्चा है कि करीब एक दर्जन मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है… कुछ के मंत्रालय बदले जा सकते हैं… और जिन मंत्रियों के पास दो-दो या तीन-तीन मंत्रालय हैं, उनका बोझ भी कम किया जा सकता है।
लेकिन इस फेरबदल में छत्तीसगढ़ का मामला सबसे दिलचस्प नजर आ रहा है।
छत्तीसगढ़ से मोदी सरकार में फिलहाल एकमात्र केंद्रीय मंत्री हैं तोखन लाल साहू है । पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा… जीत दर्ज की… और सीधे केंद्र में मंत्री बन गए।
अब चर्चा है कि तोखन लाल साहू को केंद्र से हटाकर बीजेपी छत्तीसगढ़ की कमान सौंप सकती है। यानी केंद्रीय मंत्री से सीधे प्रदेश अध्यक्ष!..
अगर ऐसा हुआ तो बीजेपी के भीतर यह बड़ा संगठनात्मक बदलाव माना जाएगा।
क्योंकि बीजेपी में ऐसा प्रयोग पहले भी हो चुका है।जब डॉ. रमन सिंह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री थे, तब उन्हें केंद्र से हटाकर छत्तीसगढ़ संगठन की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद वे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने। वहीं विष्णुदेव साय भी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और आज प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।
तो क्या अब इतिहास एक बार फिर दोहराया जाएगा?
तोखन लाल साहू प्रदेश अध्यक्ष बनेंगे… तो केंद्र में छत्तीसगढ़ का अगला मंत्री कौन होगा?
यहीं से शुरू होती है असली सियासी कहानी।
सबसे मजबूत नामों में दुर्ग सांसद विजय बघेल का नाम सामने आ रहा है। विजय बघेल पहले विधायक रहे… लगातार दो बार लोकसभा चुनाव जीते… और पार्टी के बड़े चेहरों में उनकी गिनती होती है।..इसके साथ ही राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे का नाम भी चर्चा में है।.और एक नाम ऐसा है, जिसने इस पूरी रेस को और दिलचस्प बना दिया है—वो है
राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा।
बीजेपी की राजनीति में वैसे भी अंतिम समय तक कुछ भी तय नहीं माना जाता। नाम किसी का चलता है… और बाजी कोई दूसरा मार ले जाता है।
लेकिन जिस तरह से तोखन साहू के प्रदेश संगठन में जाने और उनकी जगह छत्तीसगढ़ से नए चेहरे को केंद्र में लाने की चर्चा एक साथ तेज हुई है…
उससे इतना तो साफ है कि दिल्ली और रायपुर के बीच सियासी समीकरणों पर काम जरूर चल रहा है।
अब सवाल सिर्फ इतना है—
तोखन साहू की कुर्सी जाएगी? या जिम्मेदारी बदलेगी?
और अगर बदली… तो छत्तीसगढ़ से दिल्ली की कुर्सी किसे मिलेगी?
विजय बघेल… संतोष पांडे… या लक्ष्मी वर्मा?
फैसला बीजेपी का होगा…लेकिन नजरें पूरे छत्तीसगढ़ की हैं!

