अंबिकापुर -छत्तीसगढ़ के सरगुजा में सरकारी दफ्तर में जमीन की फाइल को लेकर ऐसा बवाल मचा कि मामला सीधे विधायक बनाम प्रशासन तक पहुंच गया।नायब तहसीलदार ने बीजेपी विधायक और उनके समर्थकों पर मारपीट का गंभीर आरोप लगाया है।तो वहीं विधायक पक्ष का कहना है कि उनकी बहन के साथ अभद्रता हुई… जिसके बाद विवाद भड़क गया।दोनों पक्षों की शिकायत पर FIR दर्ज हो चुकी है और अब पूरा मामला राजनीतिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है।

ये पूरा मामला सरगुजा जिले के सीतापुर थाना क्षेत्र स्थित राजापुर उप तहसील कार्यालय का है।जहां सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो की चचेरी बहन सीमा धनकी जमीन से जुड़े शाख शोध पत्र बनवाने पहुंची थीं।
आरोप है कि कई दिनों से उन्हें दफ्तर के चक्कर लगवाए जा रहे थे।बुधवार को जब उन्होंने नायब तहसीलदार तुषार मानिक से फाइल पर साइन करने की बात कही… तो विवाद शुरू हो गया।सीमा धनकी का आरोप है कि नायब तहसीलदार भड़क गए… फाइल फेंक दी और उन्हें दफ्तर से बाहर जाने को कह दिया।इसके बाद विधायक समर्थक उप तहसील पहुंच गए और माहौल गर्मा गया।
नायब तहसीलदार तुषार मानिक का आरोप है कि विधायक रामकुमार टोप्पो ने उन्हें वापस राजापुर बुलाया…जहां समर्थकों ने धक्का-मुक्की की, कपड़े फाड़ दिए और मारपीट की।उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक ने भी उन्हें किनारे ले जाकर पीटा।स्थिति इतनी बिगड़ी कि SDM फागेश सिन्हा को बीच-बचाव करना पड़ा और वे अधिकारी को अपनी गाड़ी में बैठाकर वहां से निकाल ले गए।
घटना के बाद दोनों पक्ष थाने पहुंचे। हालाकि थाने जाने के पहले नायब तहसीलदार तुषार मानिक और एसडीएम फागेश सिन्हा कलेक्टर से मिलने पहंचे बाद में राजस्व अधिकारी मारपीट की रिपोर्ट दर्ज कराने अंबिकापुर कोतवाली थाने पहुंचे थे।
नायब तहसीलदार की शिकायत पर विधायक रामकुमार टोप्पो समेत 10 लोगों पर शासकीय कार्य में बाधा और मारपीट की धाराओं में FIR दर्ज की गई है।
वहीं विधायक की बहन की शिकायत पर नायब तहसीलदार तुषार मानिक के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है।“सरकारी अफसर से मारपीट या जनता से अभद्रता… सच कौन बोल रहा है, ये अब पुलिस जांच में साफ होगा।”
सरगुजा कलेक्टर अजीत बसंत ने नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ ही एसडीएम फागेश सिन्हा से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। कलेक्टर अजीत बसंत ने बताया कि नायब तहसीलदार ने उन्हें बताया है कि विधायक और उनके समर्थकों ने मारपीट की है।
सरकारी दफ्तर में शुरू हुआ फाइल का विवाद अब सत्ता और सिस्टम की सीधी टक्कर बन चुका है।एक तरफ जनप्रतिनिधि हैं… दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारी।लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही…क्या जनता के काम का समाधान अब दफ्तर में नहीं… बल्कि दबाव और टकराव से होगा?

