तिल्दा नेवरा -किसी भी शहर की पहचान उसकी साफ-सफाई और व्यवस्थित व्यवस्था से होती है, लेकिन तिल्दा-नेवरा की तस्वीर इन दिनों इसके ठीक उलट नजर आ रही है। ऐसे तो यह शहर विकास व साफ सफाई के मामले में हमेशा पिछड़ा रहा हैं। ,लेकिन पिछले एक वर्ष से शहर अनाथ सा हो गया है शहरवासी धूल, मिट्टी, बदबू और गंदगी के बीच नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। नगर पालिका रोजाना सफाई कराने के दावे जरूर करती है, लेकिन हकीकत यह है कि ये दावे केवल फाइलों और कागजों तक सीमित दिखाई दे रहे हैं।
शहर के लगभग सभी 22 वार्डों की हालत बदहाल है। कहीं नालियां कचरे से पटी पड़ी हैं तो कहीं सड़कोंऔर गलियों में गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। मंदिर, गुरुद्वारा और शिवालय जैसे धार्मिक स्थलों के आसपास भी कचरा फैला हुआ दिखाई देता है। लाखों रुपए की लागत से बनी सड़कों पर गंदगी के ढेर इस तरह पड़े हैं मानो सड़कें आवागमन के लिए नहीं बल्कि कचरा रखने के लिए बनाई गई हों।

फोटो- वार्ड 16 पूर्व सीएमओ के घर के पास गंदगी से भरी पड़ी नाली.
फोटो और अपील तक सीमित सफाई अभियान
बीते कुछ दिनों से नगर पालिका द्वारा “शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाएं” अभियान चलाया जा रहा है। हर शनिवार नगर पालिका अध्यक्ष और कुछ पार्षद हाथों में झाड़ू लेकर फोटो और वीडियो में सफाई करते नजर आते हैं। कभी तालाब किनारे तो कभी पुल-पुलिया के पास सफाई अभियान का प्रदर्शन किया जाता है, लेकिन शहर की मुख्य सड़कों और वार्डों में फैली गंदगी पर किसी की नजर नहीं पड़ती। वार्ड क्रमांक-5 स्थित शिव मंदिर के पास सड़क किनारे लंबे समय से कचरे का ढेर जमा है। मोहल्लेवासी कई बार नगर पालिका में शिकायत कर चुके हैं। यहां तक कि वार्ड पार्षद ने भी पालिका प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया, लेकिन आज तक कचरा उठाने कोई नहीं पहुंचा।
सीएमओ ने साइकिल से किया निरीक्षण
नगर पालिका में नवपदस्थ सीएमओ अमिताभ शर्मा को जब लगातार मिल रही शिकायतों की जानकारी हुई तो,तो वे नगर पालिका से छुट्टी के बाद मंगलवार शाम अपनी रेंजर साइकल से वार्डो की स्थिति को देखने निकल पड़े,और बुधवार सुबह फिर से साइकिल से शहर के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने खुद मोबाइल से नालियों और सड़कों की तस्वीरें एवं वीडियो रिकॉर्ड किए। निरीक्षण के बाद सीएमओ अमिताभ शर्मा ने स्वीकार किया कि कई स्थानों पर सफाई नहीं हुई है। जिसके कारण कई नालियां पूरी तरह जाम हैं और सड़कों के बीचों-बीच कचरे के ढेर लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि बारिश से पहले विशेष अभियान चलाकर सभी नालियों की सफाई कराई जाएगी।उन्होंने कहा सफाई में कोताही बरतने वालो के नाम नोटिस जरी किया जाएगा ..

वार्ड 3 और 5 के बीच गायत्री मंदिर रोड के बीचो-बीच रखा नाली का गंदा मलमा और कचरा
पार्षदों ने भी मानी बदहाली
वार्ड क्रमांक-16 की कांग्रेस पार्षद किरण बाला ने बतया कि ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता जब मोहल्ले के लोग सफाई की शिकायत लेकर उनके पास न आते हों। नियमित सफाई नहीं होने से नालियां गंदगी से भर जाती हैं, जिससे वहां से लोगों का निकलना तक मुश्किल हो जाता है। पार्षद रानी जैन और ज्योति नागवानी ने सफाई कर्मियों की कमी का हवाला देते हुए कहा कि बावजूद इसके कर्मचारी रोज सफाई करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि घरों का कचरा नालियों में फेंकने के बजाय डस्टबिन में डालें।
वार्ड 3, 4 और 15 की हालत सबसे खराब
शहर के वार्ड क्रमांक-3 और 4 की स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है। यहां सफाई व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे नजर आती है। रेलवे पुल समाप्त होने के बाद गायत्री मंदिर जाने वाले मार्ग पर नालियों का गंदा पानी सड़कों पर जमा रहता है। बंद प्रेटोल पंप रोड से गायत्री मंदिर रोड के बीच कई स्थानों पर पांच-पांच फीट ऊंचे मलबे के ढेर लगे हुए हैं, लेकिन पालिका प्रशासन की नजर अब तक उन पर नहीं पड़ी। वार्ड क्रमांक-15 का एक मोहल्ला तो गंदगी की पहचान बन चुका है। यहां तालाब के भीतर तक कब्जा हो चुका है, लेकिन नगर पालिका की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। हालत यह है कि लोग अब खुले में ही कचरा फेंकने लगे हैं।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल
शहर में फैली गंदगी को लेकर कई पार्षद भीतर ही भीतर नाराज बताए जा रहे हैं, लेकिन पार्टी से जुड़े होने के कारण खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे। आम लोगों का कहना है कि साफ-सफाई के अभाव में शहर की सुंदरता लगातार खत्म होती जा रही है। अब शहरवासियों की निगाहें नवपदस्थ सीएमओ अमिताभ शर्मा पर टिकी हैं कि वे तिल्दा-नेवरा को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं। हालांकि यह भी सच है कि शहर को साफ-सुथरा बनाने में आम नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है। वरना सफाई केवल कागजों में होती रहेगी और लोग गंदगी के बीच जीने को मजबूर रहेंगे।

