
रायगढ़-छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक भावुक कर देने वाला नजारा सामने आया, जहाँ एक बंदरिया अपने मृत बच्चे को कई घंटों तक सीने से चिपकाकर इधर-उधर घूमती रही। वह कभी दीवार पर बैठती .तो कभी कुछ देर इधर उधर भटकती .इस भावुक दृश्य को देखकर वहां से गुजरने वालेलोग भी भावुक हो गए। इसी बीच किसी व्यक्ति ने इस भावुक मार्मिक दृश्य को अपने कैमरे में कैद कर लिया। बाद में वीडियो बनाकर उसे वायरल कर दिया है . घटना बुधवार (25 मार्च) शाम की है। वीडियो में दिख रहा फॉरेस्ट ऑफिस के पास स्थित सरकारी पोल्ट्री फार्म की दीवार है। एक बंदरिया कभी दीवार पर बैठ जाती, तो कभी बच्चे को गोद में लेकर चलने लगती। बंदर के बच्चे की मौत कैसे हुई, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। आशंका जताई जा रही है कि करंट लगने से उसकी जान गई होगी।

ऐसे यह बिल्कुल सच है कि माँ का प्यार निस्वार्थ होता है, चाहे वह इंसान हो या जानवर। जानवर के लिए भी बच्चा उसकी दुनिया होता है, और यह ममता इंसानों जैसी ही गहरी होती है। यह घटना सिद्ध करती है कि जानवरों में भी प्रेम, स्नेह और बिछड़ने का दुख (शोक) जैसी जटिल भावनाएं होती हैं। बंदरिया का अपने मृत बच्चे को छाती से चिपकाए घूमना उसके गहरे भावनात्मक जुड़ाव और ममता को दर्शाता है, जहाँ उसे यह स्वीकार करने में समय लगता है कि उसका बच्चा अब नहीं रहा। यह व्यवहार दिखाता है कि जानवर भी बच्चों के खोने का गहरा दुख महसूस करते हैं।
जिस दीवार पर बंदरिया अपने मृत बच्चे को गोद में ली थी। उसी दीवार पर बड़ी संख्या में अन्य लंगूरों का झुंड भी मौजूद था, जो उसके साथ बैथे हुए थे ।इस दौरान सभी लंगूर शांत होकर एक-दूसरे को निहार रहे थे। लोगों का मानना है कि वे अपने तरीके से मृत बच्चे का शोक मना रहे थे।
फॉरेस्ट विभाग के रिटायर्ड एसडीओ एसके गुप्ता ने बताया कि ड्यूटी के दौरान उन्होंने कई बार ऐसा देखा है कि किसी बंदर की मौत के बाद अन्य बंदर उसकी बॉडी को हटाने या ले जाने नहीं देते। वे लंबे समय तक उसके आसपास बैठे रहते हैं, उसे छूते हैं और मानो अपने साथी के प्रति जुड़ाव और भावनाएं व्यक्त करते नजर आते हैं।संतान की मौत के बाद बंदरिया हफ्तों तक उनके शव को ढोते हैं।हाल ही में उत्तर प्रदेश में एक मादा बंदर का अपने मृत बच्चे के साथ घंटों बैठे रहने का वीडियो सामने आया था, जो इस अटूट प्रेम का उदाहरण है। यह व्यवहार हमें याद दिलाता है कि मां का प्यार और स्पर्श किसी भी जीव के लिए सबसे महत्वपूर्ण भावनात्मक सहारा है।



