छत्तीसगढ़

गैस के लिए मचा हाहाकार. गैस सिलेंडर के लिए भटक रहे लोग ब्लेक पर खरीद रहे है .

गैस के लिए मचा हाहाकार. गैस सिलेंडर के लिए भटक रहे लोग ब्लेक पर खरीद रहे है .

शहर में  एलपीजी गैस सिलेंडर को लेकर लोगों की परेशानी  लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। ,गैस सिलेंडर को लेकर हाहाकार जैसी स्थिति बनती दिख रही है.। लोगों को घंटों लाइन में लगने के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है.। हालांकि, सरकार लगातार कह रही है कि गैस की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और किसी तरह की कमी नहीं है।,लेकिन सच्चाई कुछ और है । सिलेंडर नहीं मिलने के कारण लोगो ने घरो में लकड़ी और सिगड़ी जलना शुरू कर दिया ।

जिन लोगों के पास अलग-अलग दो-तीन नाम से घरेलू कनेक्शन है. वे लोग किसी तरह से घरों में अपना काम चला रहे हैं। लेकिन जिनके पास एक ही कनेक्शन है उनके लिए मुसीबत बढ़ गई है।. दरअसल पहले बुकिंग होते ही दूसरे तीसरे दिन सिलेंडर घर पहुंच जाता था लेकिन अब 25 दिन के बाद सिलेंडर मिल रहा है, ऐसे में लोगों की मुश्किलें बढ़ गई है।हालत ये है की  लोग 2500 से 3000 में यानी की 2000 ब्लैक में सिलेंडर खरीद रहे हैं।. तिल्दा नेवरा  में एक ही गैस एजेंसी है.।

एजेंसी संचालक ने बताया कि उनके द्वारा 20 हजार कनेक्शन बाते गए है ।लेकिन अभी तक गैस की कोई कमी नहीं है. बराबर लोगों के पास अभी तक गैस सिलेंडर पहुंच रहा है.। लेकिन जिनके पास एक ही कनेक्शन है उनको परेशानियों का सामना करना  पड़ रहा है. एजेंसी के दिलीप परगनिया ने बताया कि शासन के निर्देश पर लगभग 1000 कनेक्शन निलंबित किए गए हैं.। ये  ऐसे गैस कनेक्शन है . जिनके द्वारा पिछले एक डेढ़ साल से रिफलिंग नहीं कराया गया था.। लेकिन अब उन लोगों की लाइन लग रही है.। सबसे ज्यादा परेशानी होटल और ढाबे वालों के साथ वाहन चालक और नौकरी करने वालो को हो रही है ।

अवैध रिफलिंग का  गोरख धंधा.
तिल्दा में कुछ ऐसे दुकानदार हैं जिन्होंने कई लोगों के नाम पर गैस कनेक्शन ले रखे हैं उनके लिए अब यह गैस सिलेंडर सोने की कीमत जैसा साबित हो रहा है.। इन दुकानदारों के द्वारा जिन नाम से गैस कनेक्शन ले रखा है बाकायदा उनके नाम से हर महीने सिलेंडर भरवाया  जाता था.  दुकानदार घरेलू सिलेंडर से 2 किलो और 5 किलो वाले टंकियां में 150 रुपए और ₹400 में भरकर बेचा करते थे. ऐसा नहीं कि यह दुकानदार चोरी छुपे गैस सिलेंडर का काम करते थे। पहले भी खुलेआम अवैध रिफिलिंग कर गैस बेचते थे और आज भी वे लोग गैस तीन गुना दामअधिक  पर बेच रहे हैं.। अधिकारीयो से मिलीभगत  होने के कारण इन पर कोई भी कार्यवाही नहीं होती है. एक फुड स्पेक्टर तो धमकी देकर कहता है हमारी शिकायत जहा करनी है कर लो.हम तब ता छापा नही मार्गे जब शिकायत करता सामने चलकर नही बताएगा की कहा पर सिलेंडर रखे हुए है ।..बताया जाता है एक भालू नाम से विख्यात सफेद पोश अवैधकनेक्शन बेचने वालो से वसूली कर फुड विभाग के अधिकारियो तक पहुचता है ,ऐसे में शिकायत होने के बाद भी कोई कार्रवाई नही होती ,बल्कि उन्हें जानकारी मिल जाती है की किसने उनकी शिकायत अधिकारियो से की है ,,लोगो खाना है की आज भी यदि इन दुकानदारों के यहां छापा मार कार्रवाई की जाए तो 100 से 150 सिलेंडर इनके गोदाम में भरे हुए मिलेंगे.।

शहर में गैस सिलेंडर की इतनी मारामारी है कि लोग 2 किलो वाले गैस सिलेंडर खरीदने मुह मांगी कीमत देने को तैयार है  दो किलो और 5 किलो  वाले गैस भरने वाले इधर-उधर भटक रहे हैं. कई लोगों ने गैस सिलेंडर की जगह लड़कियां जलानी शुरू कर दी है .तो कई लोग अब कोयले का इस्तेमाल करने लगे हैं. लकड़ी का रेट भी दो गुना हो गया है 1 किलो जालौर लकड़ी की कीमत 9 हो गई है।. जबकि पहले लकड़ी 5 से ₹6 किलो मिलती थी.

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