तिल्दा नेवरा ..यह समाचार समाज की एक कड़वी सच्चाई को प्रस्तुत करता है.कहते हैं पद मिलने के बाद व्यक्ति मदमस्त हो जाता है। इसका जीता जागता उदाहरण तिल्दा सिंधी कैंप में देखने को मिला। एक तरफ मातम था और एक किशोर की चिता जल रही थी. दूसरी तरफ सिंधी समाज के मुखिया छमनलाल के नेतृत्व में सिंधी पंचायत भवन में होली मिलन उत्सव का चल रहा था .इस उत्सव में समाज का समाजसेवी बताने वालो के साथ सफेद पोश लोग मदमस्त होकर ठिठोलिया करते हुए गुलाल अंबिर से एक दुसरे के चेहरो रंगीन करने में मस्त थे।समाज के कथित ठेकेदारों के इस आयोजन को लेकर थू .थू कर है.लोगो का कहना है की लानत है ऐसे समाज के मुखिया और उसकी टीम पर जो मातम में परिवार को सांत्वना देने की बजाय खुशिया मनाने में अपनी शान समझ रहे थे..
दरअसल होली के मध्य रात्रि एक 21 साल के युवक मानव प्रेमचंदानी की करंट लगने से मौत हो गई। इस घटना के बाद होली की खुशियां मातम में बदल गई। शाम को 4 बजे उनकी अंतिम यात्रा उनके निवास से निकाली गई और 5 बजे उनका अंतिम संस्कार किया गया। लेकिन इस मातम के बीच समाज के मुखिया की संवेदहीनता सामने आ गई। समाज के मुखिया पद में इतने मदमस्त हो गए की उसने पंचायत भवन में होली मिलन समारोह का आयोजन कर अपनी ओछी पतली रेखा को उजागर कर दिया। इससे भी शर्मनाक बात यह है कि मातम के बीच मनाए जाने वाले होली उत्सव में तथाकथित समाजसेवी आपने आप को बुद्धजीवी बताने वाले लोग भी शामिल हुए.
एक पूर्व पधाधिकारी ने कहा की 2 महीने पहले मुखिया बनने के लिए जो व्यक्ति घर-घर जाकर युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक का पैर पडकर वोट मांग कर विश्वास दिला रहा था कि वह हर दुख सुख में उनके साथी बनेगा.. लेकिन चुनाव जीतने के बाद वह सब कुछ भूल गया .जिस किशोर की मौत हुई वह मुखिया के पोते से भी कम उम्र का था,बावजूद मुखिया उत्सव को रोक नहीं पाए . इससे बड़ी शर्मनाक बात यह थी कि समाज के तथाकथित सेवादारी बनकर ढोंग रचने वाले लोक मृतक परिवार के घर गए थे और जल्दी अंतिम संस्कार के लिए दबाव बनाते रहे.. ताकि उनके नेतृत्व में होने वाले होली मिलन समारोह में भीड़ की उपस्थिति कम ना हो। हालांकि ज्यादातर लोग इस होली कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए, लेकिन जिन लोगो को पंचायत में पदो से नवाजा गया है वे वे शर्म ,मान मर्यादा को भूलकर वहां पहले से ही पहुंच गए थे वहीं कुछ ऐसे लोग भी थे जिनको पद नहीं दिए गए हैं वे लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए ताकि उनको आगे चलकर किसी पद से नवाजा जा सके..लोगो का कहना है की सचमुच एक बेहद भावुक दृश्य,था ,एक तरफ युवक की चीता जल रही थी, तोदूसरी तरफ समाज के ठेकेदार होली मिलन समारोह में नाच-गा रहे थे।विरोधाभासी द्रश्य समाज में संवेदनहीनता और नियति की क्रूरता को दर्शाता है।

