सारा कुछ खोने के दिन, अंत समय रोने के दिन

वीसीएन टाइम्स
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वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…

ठीक एक महीना पहले 14 जून को तमिलनाडु के उर्जा मंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कगजम यानि डीएमके नेता वी संथिल बालाजी के घर ईडी का छापा पड़ा। ये कोई चैंकने वाली बात नहीं है

दरअसल चैंकने वाली बात ये है कि छापा पड़ने के बाद मंत्रीजी फूट-फूट कर रोने लगे। वहीं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अकड़ दिखाकर कहा कि ‘ईडी अधिकारी जांच के नाम पर ड्रामा कर रहे हैं’।उनके मंत्री के यहां छापा पड़ा था ऐसा तो उन्हें कहना ही था।
ऐसा तो नहीं कह सकते न कि अच्छा हुआ बेईमानों को धरना ही होगा। अपने लिये भी रिस्की हो सकता था।

आरोपी को अकड़ घणी

जिसके यहां छापा पड़ता है वो कभी मूंछ को नीचे नहीं होने देता और बरबस ताव खाता है। वह कुछ घणी यानि अधिक ही अकड़ दिखाता है। ये जताने की कोशिश करता है कि ‘देख लूंगा’, मैं तो कट्टर ईमानदार हूं’, ‘सरकार परेशान कर रही है’, ‘मुझे बेईमान साबित करके दिखाओ’ आदि…आदि….

लेकिन सबको पता होता है कि अंदर से फटी पड़ी होती है छाती…।घबराहट और बेबसी… मोदीजी को गालियां देने की इच्छा… चीख-चीख कर रोने की इच्छा…। अगले के बाॅडी लेंग्वेज से ये साफ पता चलता है।

तो सेंथिल बालाजी छापे के बाद जार-जार रो पड़े। अंदर से टूट गये। ये जाहिर भी हो गया। वैसे मोदीजी का जो रवैया है उससे लगता है कि कईयों की ता… ता…. थैया होने वाली है कईयों के रोने के दिन आने वाले हैं।

मोदी की दहाड़
कईयों पर टूटेगा पहाड़
27 जून को मोदीजी ने अपने भाषण में कहा कि सारे विपक्षी दल मिलकर 20 लाख करोड़ के भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं। उन्होंने साफ कहा कि आजकल गैरेंटी शब्द बहुत चल रहा है तो मै भी गैरेंटी देता हूं सारे घोटालेबाजों पर कार्यवाही की गैरेंटी, चोर-लुटेरों पर कार्यवाही की गैरेेंटी।

गरीब और देश को लूटने वालों का हिसाब होकर ही रहेगा,इस बात की गैरेंटी। यानि साफ तौर पर मोदीजी उन्हें जेल भेजने की घोषणा कर रहे हैं।
वैसे भी यदि देखा जाए तो मोदीजी ने हमेशा से देश से भ्रष्टाचार निवारण की हुंकार भरी है।
ईधर ज्योतिषीय भविष्यवाणी
गुजरात के एक ज्योतिष की भविष्यवाणी से बेईमानों के अंदर कंपकंपी जरूर छूटेगी। इनके अनुसार शनिदेव की एक्टिविटी से भ्रष्टाचारियों का तंबू गोल होने वाला है। ये ज्योतिषी चार साल पहले से ये कहते आ रहे हैं कि देश में अच्छे बड़े-बड़े लोग सीखचों के अंदर नजर आएंगे।
कहते हैं न कि ‘उद्धव कर्मन की गति न्यारी’। कर्मों की गति वाकई न्यारी है। कभी किसी को कुदरत बख्शती नहीं। जो जैसा कर्म करेगा वैसा भरेगा। इसका कोई अपवाद नहीं। देश के मंत्री हों या प्रदेश के दमदार नेता सारे पावरफुल लोग सत्ता के नशे में झूमते-झूमते कारागार के दर तक कब पहुंच जाएं, पता भी नहीं चलेगा।
कुदरत का फार्मूला एक ही है कि ‘कर्मों का फल, आज नहीं तो कल… ’।
तो ये मान के चलिये कि बेईमानों का अंत बहुत बुरा होगा। जिस संपत्ति के लिये जीवन दांव पर लगा दिया, साख दांव पर लगा दी, स्वतंत्रता दांव पर लगा दी, वह भी छिनती दिख रही है।
बल्कि अंत समय भी उस तीर्थयात्रा को जाना होगा जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इसे ही तो कहते हैं ‘माया मिली न राम’।
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