तिल्दा नेवरा -ब्रह्माकुमारीज़ केंद्र में सोमवार को हर्ष और उत्साह के वातावरण में दीपावली उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। “ज्ञान ज्योति से सुसज्जित दीपावली” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाई–बहनों ने भाग लिया और अपने जीवन में आत्मिक दीप प्रज्ज्वलित करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ बी.के. प्रियांका बहन और बी.के. कांती भाई द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया । मंच पर रखे दीपों को जलाते हुए उन्होंने सभी को यह संदेश दिया कि सच्ची दीपावली तभी है जब हम अपने अंदर बसे आत्मा रूपी दीपक को ज्ञान और गुणों की लौ से प्रकाशित करें। इसके पश्चात् सभी उपस्थित जनों ने मंच के समीप दीप जलाए और भीतर की शुद्धता, शांति व शक्ति का अनुभव किया। पूरा हॉल दीपों की रोशनी और दिव्य वातावरण से आलोकित हो उठा।

बी.के. प्रियांका बहन ने उपस्थित जनों को दीपावली की शुभकामनाएँ देते हुए पाँचों दिवसों के आध्यात्मिक महत्व को सहज और सुंदर ढंग से समझाया। उन्होंने कहा —धनतेरस का अर्थ केवल बाहरी धन प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञान धन को जीवन में धारण करना और बाँटना है। यह दिन हमें आत्मिक समृद्धि की ओर प्रेरित करता है।
नरक चतुर्दशी या रूप चौदस का अर्थ है इस विकारी दुनिया से दूर रहकर परमात्मा के समीप होना और अपने आत्मिक रूप को परमात्मा समान उज्ज्वल बनाना।दीपावली का सच्चा अर्थ है आत्मा रूपी दीपक को जगाना — एक दीपक से दूसरे दीपक को प्रकाश देना, ताकि ज्ञान का प्रकाश पूरे विश्व में फैल सके।गोवर्धन पूजा का संदेश है गोवर्धन पर्वत समान महान कार्य करना — सबके सहयोग से इस दुनिया को परिवर्तित कर सत्युग रूपी रामराज्य की स्थापना करना।

भाई दूज का अर्थ है आत्मा आत्मा भाई–भाई की स्मृति का tilak लगाना — सदा आत्मिक स्मृति में रहना और सबको एक परमात्मा की संतान, अपने भाई के रूप में देखना।बी.के. प्रियांका ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में ब्रह्माकुमारीज़ की पूर्व मुखिया दादी प्रकाशमणि जी के जीवन का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कैसे दादी जी ने अपने जीवन में हर परिस्थिति में “न्यारी और प्यारी” बनकर स्वयं को और लाखों आत्माओं को दिव्यता के प्रकाश से प्रकाशित किया।
दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात् सभी ने शांति का अनुभव करते हुए परस्पर दीपावली की शुभकामनाएँ दीं। इसके बाद सभी को दीपावली प्रसाद वितरित किया गया और सभी ने अपने अनुभव साझा किए कि हर वर्ष ब्रह्माकुमारीज़ केंद्र में दीपावली का आरंभ करना उनके जीवन को एक नई आध्यात्मिक दिशा देता है।
पूरे सभागार को दीपमालाओं, रंगीन लाइट्स और सितारा सजावट से सुंदर रूप से सजाया गया था। वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा और एकता की भावना झलक रही थी।
इस प्रकार ब्रह्माकुमारीज़ तिल्दा सेवा केंद्र में मनाया गया दीपावली उत्सव केवल बाहरी रोशनी का नहीं, बल्कि आंतरिक आत्मिक दीप प्रज्वलन का पर्व बन गया, जिसने सभी के मन में सच्चे सुख, शांति और ईश्वरीय प्रेम का प्रकाश भर दिया।

