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यह कानून बनना चाहिए कि हर व्यक्ति सिर्फ अपने धर्म में ही शादी कर सके-देवकीनंदन

भोपाल। दशहरा मैदान पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने प्रवचन दिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि मोबाइल की तरह लोग भी अपना दिमाग अपडेट रखें। भारत में यह कानून बनना चाहिए कि हर व्यक्ति सिर्फ अपने धर्म में ही शादी कर सके। देश में लव जिहाद बच्चियों के धर्मांतरण के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विद्या के मंदिरों में फिल्मी गानों पर बच्चियों का नृत्य बंद होना चाहिए।
देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने कहा कि जिन लोगों ने रामनवमी पर भगवान की शोभा यात्रा पर पत्थर बरसाए, दुनिया के 57 देश ऐसे लोगों की पैरवी कर रहे हैं। पत्थर फेंकने वालों के पक्ष में बोला जा रहा है कि वे लोग भारत में असुरक्षित हैं। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि जाति-पंथ से ऊपर उठकर देश संस्कृति और संसाधनों की रक्षा करें। उन्होंने कहा कि लव जिहाद सिर्फ धर्मांतरण के लिए किया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों को यह कानून बनाना चाहिए।

देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने कहा कि संतान भले ही अपने माता-पिता व गुरुदेव के प्रति प्रेम हो या न हो। लेकिन माता-पिता और गुरु के मन में संतान के प्रति हमेशा कल्याण की भावना बनी रहती हैं। तीसरे प्रकार के व्यक्ति के बारे में आपने कहा कि ये किसी से प्रेम नहीं करते तो इनके चार लक्षण होते हैं। आत्माराम -जो बस अपनी आत्मा में ही रमन करता हैं। पूर्ण काम -संसार के सब भोग पड़े हैं, लेकिन तृप्त हैं। किसी तरह की कोई इच्छा नहीं हैं। कृतघ्न -जो किसी के उपकार को नहीं मानता है। गुरुद्रोही -जो उपकार करने वाले को अपना शत्रु समझता हैं। श्री कृष्ण कहते हैं कि गोपियों, इनमे से मैं कोई भी नहीं हूं। मैं तो तुम्हारे जन्म-जन्म का ऋणी हूं। सबके कर्जे को मैं उतार सकता हूं। तुम्हारे प्रेम के कर्जे को नहीं। तुम प्रेम की ध्वजा हो।

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