Wednesday, January 14, 2026
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तिल्दा नेवरा में भाजपा-कांग्रेस में खुलकर हुआ भीतरघात.वोट दिलाने के नाम पर समाज के ठेकेदारों ने भरी जेबे

तिल्दा नेवरा

तिल्दा नेवरा नगर पालिका में मंगलवार को हुए चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय स्तर के बड़े नेता पार्टी के दमदार प्रत्याशियों को जीतने की बजाय हराने में लगे  रहे। कांग्रेस की अपेक्षा भाजपा में विभीषण शकुनी और मंथरा जैसे किरदार निभाने वाले लोगअधिक दिखाई दिए। हालांकि आस्तीन के सांप कांग्रेस में भी सक्रिय थे,लेकिन उनका वजूद मतदाताओ के बीच नहीं दिखा जितना वे सक्रिय थे..इसलिए कांग्रेस प्रत्याशियों का उतना नुकसान नहीं कर पाए ।एक विशेष समुदाय से जुड़े ये आस्तीन के सांपो को समाज के लोग जान चुके है कि इनका मकसद समाज का प्रमुख बनना ही मात्र रहता है ताकि उनकी पूछ परख बनी रहे।उसकी आड़ में उनकी दुकानदारी चलती रहे..

लेकिन भाजपा में  रहकर पार्टी से गद्दारी करने वाले विभीषण इस बार भी सक्रिय दिखे, इन विभीषणो ने भाजपा  के  प्रत्याशियों के विरुद्ध खुलकर काम किया है,इससे भाजपा को बड़ा नुकसान हो सकता है।ऐसे लोगों का टारगेट पार्टी के ऐसे प्रत्याशी रहे जो व्यक्ति विशेष नही बल्कि पार्टी के प्रति समर्पित है,वार्ड नंबर 3.4,6.10, 15,16,18 के साथ ऐसे कई वार्ड है जहां भाजपा के तथा कथित नेता पार्टी के प्रत्याशियों को हराने में की जान से जूटे रहे, इनमें से कुछ ऐसे भी वार्ड हैं जहां उनके द्वारा निर्दलीय प्रत्याशियों को भी खड़ा किया गया है। भाजपा प्रत्याशियों को निपटने के लिए शहर ब्लॉक से लेकर रायपुर जिले एवं प्रदेश के भी पदाधिकारी शामिल है। चुनाव संपन्न हो चुके हैं प्रत्याशियों की किस्मत इवीएम में कैद हो चुकी है, परिणाम आने के बाद पता चलेगा कि पार्टी के गद्दारों ने अपने हित के लिए पार्टीऔर  प्रत्याशियों का कितना अहित नुकसान किया है..

यह यह बताना लाजमी होगा कि तिल्दा नेवरा मैं पिछलेपालिका चुनाव में शहर के  22 वार्ड में से 13 पार्षद बीजेपी से जीत कर आए थे. 6 कांग्रेस और तीन निर्दलीय पार्षद चुने गए थे. लेकिन जब अध्यक्ष के  चुनने की बारी आई तो पूर्ण बहुमत के बाद भी भाजपा की अध्यक्ष उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा, उस समय भी भाजपा के इन्हीं नेताओं ने विभीषण की भूमिका निभाई थी। संगठन में शिकायत की गई लेकिन इन पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा हुआ यह कि जिन लोगों ने शिकायत की वही पार्टी से बाहर हो गए। लेकिन इस बार के चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों को हराने वाले गद्दारों को प्रत्याशियों ने पहचान लिया है,

वोट दिलाने के नाम पर समाज के ठेकेदारों ने भरी जेबे …
शहर में जब भी चुनाव आते हैं तो एक समाज के कुछ ठेकेदार सक्रिय हो जाते हैं और प्रत्याशी को जीताने और हारने का ठेका लेकर अपनी जेब भरते हैं. इस बार भी उन लोगों के द्वारा कुछ ऐसा ही किया गया है. कहीं वे  कांग्रेसी बनकर कांग्रेस प्रत्याशी को जिताने की बात कह कर पैसे वसूलते दिखे तो, कहीं भाजपा बनकर पार्टी प्रत्याशी को जीताने ठेका लेकर  दोनों हाथों से पैसे बटोरते रहे। इनमें से एक ने तो अपने घर के सामने एक पार्टी प्रत्याशी से हैंडपंप भी लगवा लिया। चुनाव के बाद  समाज के ऐसे ठेकेदारों से जवाब मागने  का फैसला कर लिया है।

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