तिल्दा नेवरा- पति की दीर्घायु की कामना का व्रत पर्व हरितालिका तीज शुक्रवार को शहर सहित पूरे इलाके में आस्था श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया गया. इस अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला व निराहार रहकर हरितालिका तीज का व्रत रखा और शुभ मुहूर्त की बेला में भगवान शिव की पूजा अर्चना की. साथ ही भगवान भोले भंडारी से अखंड सौभाग्य व सुखमय वैवाहिक जीवन का वरदान मांगा.हर साल यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाते हैं.

इस साल की हरतालिका तीज के दिन रवि योग,शुक्ल योग और ब्रह्म योग है. हरतालिका तीज एक हर्षोल्लास पूर्ण और जीवंत भारतीय त्यौहार है,जिसे देश के विभिन्न भागों में विवाहित महिलाएं बड़े उत्साह के साथ देशभर में आलग अलग रूप में मनाती हैं.
छत्तीसगढ़ में इस पर्व का बड़ा ही महत्व है,हरतालिका तीज का उत्सव एक असाधारण अवसर के रूप में माना जाता है,इस पर्व को बेटिया मायके में मनाती है.व्रत के पहले करू भात खाने की परंपरा है.गुरवार को करू भात खाकर तीजहारियो ने निर्जला व्रत रखा.यह व्रत शुक्रवार सूर्योदय से शुरू किया और शनिवार सूर्योदय तक जल और अन्न के बिना रहकर सुबह पारण करके व्रत को पूरा किया .
गणेश चतुर्थी के एक दिन पूर्व हरितालिका तीज का व्रत मनाया जाता है.. हरितालिका तीज महिलाओं का ऐसा व्रत है जिसे लड़कियों से लेकर उम्रदराज तक महिलाएं करती है ,इस दिन महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य के लिए और कुंवारी लड़कियां मनवांछित वर के लिए व्रत करती है.और रात्रि चारों पहर भगवान शिव पार्वती की पूजा करती है, महिलाए शिव पार्वती की रेत की प्रतिमाएं बनाकर पूजा करती है, इस दौरान महिलाएं 16 श्रृंगार करती हैं हरि तालिका पर निर्जला व्रत रखने की परंपरा है वृत्ति महिलाएं जल तक ग्रहण नहीं करती है महिलाएं पूरी रात जाग कर भगवान शिव की आराधना करती हैं
तीज मनाने बाबुल के घर आई बेटियां काफी उत्साहित दिखी .मेहंदी से सजे हाथ.और कांच की सतरंगी चूड़ियां पहने वे दुल्हन की तरह सजी हुई नजर आई.उन्हें बाबुल के घर आने की खुशी तो थी .साथ ही पुरानी यादों को सहेलियों के साथ शेयर करने का मौका भी मिला था ..

