इंदर कोटवानी
मेरा पानी उतरता देख,मेरे किनारे पर घर मत बसा लेना,मैं समंदर हूँ, लौट कर वापस आऊंगा”ओ पी चौधरी.ने ये लाइन काग्रेसियों पर तंज कसते हुए कहा था.दरअसल ओपी चौधरी ने महज 36 साल की उम्र में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की नौकरी से वीआरएस लेकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर राजनीति में आ गए पीएम मोदी और केन्द्रीय ग्रह मंत्री अमित शाह के नजदीकी लोगों में शुमार ओ.पी चौधरी को 2019 के विधानसभा चुनाव में खरसिया से भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया लेकिन ओ.पी चौधरी को भाग्य ने साथ नही दिया और वे काग्रेस के उमेश पटेल से चुनाव हार गए,उसके बाद कांग्रेसी नेता चुटकी लेकर कहते रहे कि(IAS) की नौकरी भी गई और विधायक भी नहीं बन सके.लेकिन उन्होंने मन से हार नहीं मानी और नए सिरे से डटकर राजनीति की बिसात पर आगे बढ़े पांच साल संगठन में जमकर काम किया,और आज वही आइएएस अफसर ओ,पी चौधरी अब मंत्री बन चुके हैं,
नौकरशाह से बने राजनेता
2005 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अफसर ओ.पी चौधरी।पहली पोस्टिंग सहायक कलेक्टर के तौर पर 2006 में कोरबा में हुई।इसके बाद 2007 में उन्हें रायपुर में एसडीएम बनाया गया। 2007 में उन्हें जांजगीर जिला पंचायत का सीईओ बनाया गया। वे राजधानी रायपुर के नगर निगम कमिश्नर भी रहे। साल 2011 में उन्हें दंतेवाड़ा में कलेक्टर के तौर पर पदस्थ किया गया।यह से वे बतौर रायपुर कलेक्टर पदस्थ हुए।बाद में रायपुर कलेक्टर रहते हुए उन्हाने राजनीति में आने का फैसला लिया और नौकरी से वीआरएस लेकर भाजपा में आ गए, हलाकि ओपी चौधरी ने यूपीएससी एग्जाम पहले ही प्रयास में क्रैक कर मात्र 23 वर्ष की उम्र में ही आईएएस अफसर बन गए थे।लेकिन राजनीति के पहले चुनावी एग्जाम वे पास नही कर सके,लेकिन दुसरी चुनावी परीक्षा को उसने आसानी से उतीर्ण कर लिया,अमित शाह ने भी सभा में कहा था कि इन्हें जिताइए अर्थात पास कराए,हम वायदा करते है बड़ा आदमी बनाएंगे।अब छत्तीसगढ़ के विष्णुदेव साय मंत्रिमंडल में ओपी चौधरी मंत्री बनाए गए हैं।
सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने से के लोगों में उत्साह
विष्णुदेव साय मंत्रिमंडल में में कैबिनेट मंत्री बने ओपी चौधरी रायगढ़ विधानसभा से पहली बार विधायक बने हैं। वे रायगढ़ जिले की खरसिया ब्लॉक के ग्राम बायंग के रहने वाले हैं।मंत्री बनने के बाद रायगढ़ से लेकर बायंग गाँव के लोग उत्साहित है,

