वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…
एक तगड़ी टीम के मुकाबले में खड़े बिखरे-बिखरे से खिलाड़ी चुनौती देने के लिये तिलमिला रहे हैं।
इन खिलाड़ियों ने साथ मिलकर एक बढ़िया किट खरीद ली और फिर प्रैक्टिस चालू करने के लिये तत्पर दिखे।
लेकिन बात छिड़ी कि पहले बैटिंग कौन करेगा और कप्तान कौन होगा। बस यही सब लड़ना-भिड़ना चलता रहा। सारे के सारे दिग्गज खिलाड़ी। कोई भी कप्तान बनने से कम पर तैयार नहीं हो रहे।
बस यही मनमुटाव मिटने से पहले ही मैच की डेट आ गयी और विपक्षी टीम टांय-टांय फिस्स…
बस यही मनमुटाव मिटने से पहले ही मैच की डेट आ गयी और विपक्षी टीम टांय-टांय फिस्स…
यही हो रहा है देश मे। तगड़ी टीम है भाजपा जिसके कप्तान हैं मोदीजी और सामने खड़े हैं बिखरे-बिखरे से विपक्ष के सियासी खिलाड़ी। कभी प्रधानमंत्री का चेहरा कौन हो पर लड़ते हैं तो कभी किस सीट से कौन लड़ेगा पर एक-दूसरे से भिड़ते रहे।
मजे की बात ये है कि गलबहियां करते दिखते हैं। स्नेह छलकाते दिखते हैं और समर्पण भाव से फोटो खिंचाते हैं पर जब राज्यों में चुनावों की बात आती है तो बिफर जाते हैं सारा स्नेह और समर्पण गायब हो जाता है।
राहुल का पत्ता साफ
ममता की मुहिम
राहुल का पत्ता साफ
ममता की मुहिम
ईधर आग में घी डाला ममता और केजरीवाल ने। इन्होंने कांगे्रस के ठहरे पानी में पत्थर उछाल दिया ये कहकर कि खड़गे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं यानि वे साफ तौर पर राहुल गंाधी का पत्ता काटने के मूड मे दिखते हेैं।
अब कांग्रेस में भला ये कैसे संभव है कि गांधी परिवार को छोड़कर कोई और नाम प्रधानमंत्री के लिये आगे आए ?
लेकिन गांधी के अलावा किसी और नाम को आगे करने की सहूलियत ममता बैनर्जी को मिल गयी पांच राज्यों के चुनावों में कांग्रेस की हुई किरकिरी से।
लेकिन गांधी के अलावा किसी और नाम को आगे करने की सहूलियत ममता बैनर्जी को मिल गयी पांच राज्यों के चुनावों में कांग्रेस की हुई किरकिरी से।
हालांकि इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे से पूछे जाने पर उन्होंने जो जवाब दिया उससे उनका आत्मविश्वास डिगा हुआ दिखा।
उनके अंदर आत्मविश्वास होता तो वे इनमें से कोई बात कहते कि हमारे नेता राहुलजी और सोनिया जी हैं वे ही तय करेंगे कि कौन होगा प्रधानमंत्री या फिर सारे लोग एक साथ बैठकर तय करेंगे, सभी सांसद मिलकर प्रधानमंत्री चुनेंगे।
लेकिन उन्होंने जवाब दिया कि पहले जीत तो जाएं, फिर ये बात करेंगे। साफ जाहिर है कि विपक्ष में आत्मविश्वास की कमी है। सभी इस बात से वाकिफ हैं कि मोदी को हराना टेढ़ी खीर है।

