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छत्तीसगढ़

नदी का पेट चीरकर निकाली जा रही है रेत,,कानून का डर नहीं,,

मस्तूरी -छत्तीसगढ़ में बिलासपुर जिले के मस्तूरी में रेत माफिया बेखौफ है ..उनमें बिल्कुल भी कानून का डर नहीं है। रेत माफिया प्रतिबंधित क्षेत्र से भी रेत का उत्खनन कर प्रशासन को ठेंगा दिखा रहे हैं…..। ग्रामीणों का कहना है इस अवैध धंधे में पंचायत के प्रतिनिधियों के साथ संबधित विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं.. मस्तूरी अनु विभाग क्षेत्र के पचपेड़ी तहसील क्षेत्र के जोधरा में बहने वाली शिवनाथ नदी से प्रतिदिन सैकड़ो ट्रैक्टर ट्राली अवैध रूप से रेत निकाल कर नदी का पेट चीरा जा रहा है….। इस एवज में रेत खनन माफिया पंचायत प्रतिनिधि और संबंधित विभाग के अधिकारियो  को बंधी बंधाई रकम दी जाती है ,,

मस्तूरी से 25 किलोमीटर दूर प्राकृतिक संपदा से भरपूर पचपेड़ी तहसील क्षेत्र के जोधरा गांव से बहने वाली जीवनदायनी शिवनाथ नदी से धड़ल्ले से अवैध रेत खनन कर नदी का पेट चीरकर रेत निकली  जा रही है…अवैध रेत उत्खनन दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक नियमों को तक में रखकर लगातार किया जा रहा है……। जबकि यह इलाका डूबान क्षेत्र घोषित होने के कारण  रेत निकालने के लिए प्रतिबंधित है.. बावजूद प्रतिदिन सैकड़ो ट्रैक्टर ट्राली रेत निकली जा रही है। लेकिन इस अवैध कार्य को रोकने वाला कोई नहीं है….। यहां से निकली  जा रही रेत के एवज में गोपालपुर ग्राम पंचायत के उपसरपंच के नेतृत्व में पंचायत प्रतिनिधियो के द्वारा प्रत्येक ट्रैक्टर ट्राली से 300 रूपए लिअए जाते है,,  गांव के व्यक्ति को रेत निकालने पर 100 की छूट दी जाती है यानी की उससे प्रत्येक ट्राली के पीछे 200 रूपए लिया जाता है। मजेदार बात यह है कि पंचायत की ओर से ना किसी प्रकार की कोई रसीद दी जाती है .और ना ही इन पैसों को पंचायत फंड में जमा किया जाता है…। यह सब कुछ माइनिंग विभाग के अधिकारियों की मिली भगत से होता है,,,।
ऐसा नहीं है की माइनिंग विभाग के अधिकारियो को  इस अवैध रेत खनन के धंधेकी जानकारी नही है ..?अधिकारियों को इस बात की सारी जानकारी है …उन्हें यह भी पता है कि रेत माफिया कौन है… किसके इशारे पर रेत निकली  जा रही है, सब कुछ जानने के बाद भी वे अनभिज्ञ बने हुए हैं…? क्यों कि रेत माफिया इन अधिकारियों को निर्धारित की गई राशि  एक मुस्त पहुंचाते हैं….? ऐसा भी नहीं है कि विभाग के सभी अधिकारी रेत माफियाओं से मिले हुए हैं,.. कुछ ऐसे भी अधिकारी है जो  इस कार्य को रोकना चाहते हैं लेकिन रेत माफियाओं के पहुंच के चलते वे  कार्यवाही करने से पीछे हट जाते हैं।

हालांकि कोई भी ग्रामीण सामने आकर माइक पर इस बात को कहने पर तैयार नहीं होते हैं कि गोपालपुर गांव के घाट से रेत निकालकर पंचायत प्रतिनिधियों के द्वारा बेची जा रही  है। लेकिन सामान्य तौर पर वे इस बात को  कहने  से नहीं चूकते हैं कि प्रतिबंधित क्षेत्र होने के बावजूद नदी को खोद कर रेत निकली जारही  है। कुछ ग्रामीनो ने  बताया कि गांव की बसावट नदी से काफी ऊपर है, रेत निकालने के लिए ट्रैक्टर चालक को 100 से 150 फीट नीचे जाना पड़ता है। उसके अलावा 50 से 60 फीट उसे स्थान पर जाना होता है जहां रेट का खनन किया जाता है। ट्रैक्टर में मजदूर रेट तो आसानी से भर लेते हैं लेकिन। जब ट्रैक्टर रेत भरकर ऊपर चढ़ता है तो हमेशा पलटने का भय बना रहता है ऐसे में ट्रैक्टर चालक कुछ लोगों को पैसे देकर उनकी जान को जोखिम में डालकर इंजन के सामने खड़ा कर देते हैं ताकि ट्रैक्टर पलटने से बच सके।

इस संदर्भ में गोपालपुर ग्राम पंचायत के सरपंच का कहना है कि पंचायत के द्वारा कोई राशि नहीं वसूली जाती है यदि कोई जनप्रतिनिधि पंच  अथवा उपसरपंच रेत निकालने का पैसा लेते हैं तो इसके लिए वह खुद जवाबदार होंगे।
मस्तूरी संवाददाता ने जब इस संदर्भ में पचपेड़ी तहसीलदार साहू से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि वे रेत के हो रहे अवैध उत्खनन के बारे में कुछ नहीं कहेंगे ना ही वे कार्रवाई के लिए अधिकृत हैं। बताया जाता है कि बारिश थमने के बाद से नदी को दो फीट से भी अधिक खोखला कर दिया गया है करोड़ों रुपए की रेट पिछले 3 महीने में निकाली जा चुकी है। गोपालपुर के पास से जिस तेजी के साथ शिवनाथ नदी का सीना छीला जा रहा है, उसे आने वाले दिनों में इस जीवन दयानी नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा, मस्तूरी से रघुनंदन यादव की रिपोर्ट

 

 

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