कई गावों में आज किया गया होलिका दहन
तिल्दा नेवरा-होली का त्योहार जितना रंगों के लिए खास होता है, उतना ही महत्वपूर्ण होलिका दहन भी माना जाता है.सोमवार की रात होलिका दहन उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया ।शहर में लगभग तीन दर्जन स्थानों पर होलिका दहन किया गया। बुराई पर अच्छाई के प्रतीक के रूप में लोगों ने पारंपरिक पूजा अर्चना के बाद होलिका जालाई।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा की शाम को होलिका दहन किया जाता है. यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, जहां लकड़ियों के ढेर को जलाकर लोग अपनी सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. आमतौर पर, इसके अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है. लेकिन खगोलीय घटनाओं के कारण, इस साल उत्सव की तारीखों में बदलाव देखने को मिल रहा है। जिससे लोगों में असमंजस की स्थिति बन गई है। यही कारण है कई जगह होली का दहन मंगलवार को किया जा रहा है। हलाकि तिल्दा शहर सहित आसपास में पुरे इलाके में सोमवार 2 मार्च को होलिका दहन मुहूर्त अनुसार शाम 6 बजकर 22 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 53 मिनट तक किया गया ।
बनियापारा में दोपहर को होली का पूजन किया गया,खासकर महिलाओं ने होलिका की पूजा अर्चना की। हेमू कॉलोनी चौक के पीछे सिंधी कैम्प में रात साढ़े 8बजे विधि विधान के साथ होलिका दहन किया गया ।इस मौके पर लोगो ने खासकर महिलाओ ने होलिका जलने के बाद होलिका की 7 बार परिक्रमा की ।होली जलने के बाद गिहर का प्रसाद वितरण किया गया । इसी तरह छोटी होली समितियों के द्वरा रात 8 बजे के आसपास होलिका जलाई .
राधा कृष्ण मंदिर परिसर बनियापारा में रात को लगभग 1 बजे होलिका दहन किया गया। सब्जी मंडी, तिल्दा बस्ती, में होलिका विधि विधान के साथ जलाई गई। इसके आलावा सासाहोली, मुहभटठा पारा, नेवरा बस्ती, सिनोधा, जोता ,टंडवा, बिलाडी में भी शुभ मुहूर्त पर रात को उत्साह के साथ होलिका दहन किया गया। इस मौके पर लोगों ने एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली पर्व की शुभकामनाएं दी।
इस बार लकड़ी की जगह लोगों ने ज्यादातर गोबर के कंडो की होली जलाई । कई जगहों पर नगाडो के साथ फाग गीतों पर लोग नाचते झूमते नजर आए। हालांकि इस बार नगाड़ों की आवाज नहीं के बराबर सुनाई दी। लेकिन होलिका दहन की रात नगाड़ों ने एक प्रकार से एहसास कराया की कल होली है। होलिका दहन को लेकर पुलिस प्रशासन भी सक्रिय दिखा। पुलिस की गाड़ियां सायरन बजाते हुए शहर व आसपास के गांव में घूमते नजर आई। ऐसे तो होली के जलने के बाद रग पर्व शुरू हो जाता है।
सुबह होते ही लोग सड़को पर आ जाते है,खासकर बच्चे टोलियों में उत्साह के साथ एक दुसरे को रंग लगाकर होली खेलते है।और आमतौर पर, इसके अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है.बार होलिका दहन को लेकर लेकर लोगों में थोड़ी भ्रम की स्थिति है, खगोलीय घटनाओं के कारण, इस साल उत्सव की तारीखों में बदलाव देखने को मिलरहा है, इसलिए आजनही 4 मार्च को रंगों की होली मनाईजाएगी … ।
कल बुधवार को होली का रंग पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इस बार कई लोग फूलों की होली खेलने परिवार के साथ वृंदावन निकल गए हैं।इसी तरह शहर के लगभग 500 युवा विशाखापट्टनम, गोवा, थाईलैंड मैं होली मनाएंगे।एक समय था जब लोगो होली का इंतजार रहता था . लोग दोस्त यारो के साथ रंग खेलने सुबह से सडको पर पहुंच जाते थे ,लेकिन अब होली में लोग घरो से बाहर भी निकलना पंसंद नही करते मोबाईल पर मेसेज भेजकर एक दुसरे को होली की बधाई देकर परिवार के साथ घरो में ही होली मनाते है.

