Saturday, February 28, 2026
Homeछत्तीसगढ़शराब घोटाले में रिटायर्ट IAS अनिल टुटेजा को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट...

शराब घोटाले में रिटायर्ट IAS अनिल टुटेजा को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत, जानें जेल में रहेंगे या होगी रिहाई

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को जमानत दे दी है..ये जमानत छत्तीसगढ़ के कथित 2000 करोड़ के शराब घोटाला मामले में मिली है..। हालांकि पासपोर्ट जमा कराने समेत कुछ शर्तें भी रखी गई हैं।जमानत आवेदन पर सुनवाई जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की बैंच में हुई। हालांकि, अनिल टुटेजा को ED के केस में राहत मिली है लेकिन शराब घोटाले मामले में EOW की जांच चल  रही है। इस केस में वो जेल में बंद हैं, ऐसे में वे जमानत के बाद भी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 2 अप्रैल 2025 को विशेष अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें टुटेजा के खिलाफ आरोप तय किए गए थे….। हाई कोर्ट ने कहा था कि आरोप तय करने से पहले सरकार से अनुमति (CrPC की धारा 197 के तहत) नहीं ली गई थी…।धारा 197 के अनुसार, यदि कोई सरकारी अफसर अपने कार्य के दौरान किसी अपराध का आरोपी है, तो कोर्ट में मुकदमा चलाने के लिए पहले सरकार से मंजूरी लेना जरूरी होता है। पीठ ने कहा,”इस मामले में अधिकतम 7 साल की कैद की सजा हो सकती है। इसलिए सेंथिल बालाजी फैसले का सिद्धांत इस केस में भी लागू होगा…। इसके अलावा, इसी तरह की स्थिति में, सुप्रीम कोर्ट ने 12 फरवरी, 2025 के आदेश में सह-आरोपी अरुणपति त्रिपाठी को भी जमानत दे दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को आदेश को दिया कि टुटेजा को जमानत की प्रक्रिया के लिए संबंधित कोर्ट में पेश किया जाए कोर्ट ने यह भी कहा कि विशेष न्यायाधीश की अदालत अभी खाली है..। इसके अलावा शर्तों में, पासपोर्ट सरेंडर करना और अदालत में सुनवाई के दौरान पूरा सहयोग करना शामिल है..।ED की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि, अनिल टुटेजा एक वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं। जो बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उन्होंने कोर्ट में टुटेजा पर नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले में भी शामिल होने का आरोप लगाया और कहा कि वे गवाहों को प्रभावित करने और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने के लिए सक्षम हैं।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।  CSMCL यानी शराब की खरीद और बिक्री के लिए राज्य निकाय द्वारा उनसे खरीदी गई शराब के प्रति ‘केस’ के लिए डिस्टिलर्स से रिश्वत ली जाती थी।बेहिसाब ‘कच्ची ऑफ-द-बुक’ देसी शराब की बिक्री हुई। इस मामले में सरकारी खजाने में एक भी रुपया नहीं पहुंचा और बिक्री की सारी रकम सिंडिकेट ने हड़प ली। अवैध शराब सरकारी दुकानों से ही बेची जाती थी।..कमीशन: शराब बनाने वालों से कार्टेल बनाने और बाजार में निश्चित हिस्सेदारी दिलाने के लिए रिश्वत ली जाती थी। FL-10 A लाइसेंस धारकों से कमीशन ली गई, जिन्हें विदेशी शराब के क्षेत्र में कमाई के लिए लाया गया था।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments