Monday, February 2, 2026
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का लगातार 9 वां बजट, आज क्या मिलेगा खास?

देश में पहली बार रविवार को बजट पेश होगा रविवार होने के बावजूद आज खुलेगा शेयर बाज़ार

 

नई दिल्ली -वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण आज आम बजट पेश करेंगी. इसके साथ ही एक खास रिकॉर्ड बन जाएगा कि देश में पहली बार रविवार को बजट पेश होगा. साथ ही रविवार को शेयर बाज़ार भी खुलेगा. आम बजट से हर वर्ग की उम्मीदें चरम पर हैं. मध्यम वर्ग को टैक्स राहत की आस है, किसान आय बढ़ाने वाले कदमों की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि युवा रोजगार और नए अवसरों पर नजर लगाए बैठे हैं. उद्योग जगत को निवेश और उत्पादन को बढ़ावा देने वाले फैसलों का इंतजार है.

सरकार के सामने विकास और कल्याण के बीच संतुलन साधने की बड़ी चुनौती है, जिससे यह बजट देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला माना जा रहा है. पिछले साल बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ा ऐलान करते हुए नए टैक्‍स रिजीम के तहत 12 लाख सालाना कमाई पर कोई टैक्‍स नहीं लगाने का ऐलान किया था, जबकि सैलरीड एम्प्‍लाई को ऊपर से 75000 रुपये का स्‍टैंडर्ड डिडकक्‍शन का लाभ दिया था और टैक्‍स स्‍लैब को पहले से सरल कर दिया था. लेकिन अभी भी बहुत से टैक्‍सपेयर्स इस कैटेगरी से बाहर हैं और वो अभी भी ओल्‍ड टैक्‍स रिजीम का यूज करते हैं.

ऐसे में वह इस छूट को 12 से 14 लाख रुपये सालाना करने की मांग कर रहे हैं.भले ही नए टैक्‍स व्‍यवस्‍था के तहत 12 लाख टैक्‍स छूट दे दी गई हो, लेकिन अभी भी बहुत से टैक्‍सपेयर्स ओल्‍ड टैक्‍स को ही बेहतर मानते हैं और चाहते हैं कि इसमें भी छूट की लिमिट को ब्‍ढ़ा दिया जाए. अभी बेस टैक्‍स छूट लिमिट 2.5 लाख रुपये है, लेकिन Section 87A के तहत टैक्‍स रिबैट दिया जाता है, जो सालाना कमाई पर टैक्‍स छूट की लिमिट बढ़कर 5 लाख रुपये हो जाती है. अब इसे बढ़ाकर 8 लाख करने की मांग की जा रही है. बजट 2025 में सरकार ने सीनियर सिटीजन को टीडीएस कटौती की लिमिट 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी थी.

वहीं किराये से कमाई पर 2.40 लाख की लिमिट को बढ़ाकर 6 लाख प्रति वर्ष कर दिया था. हालांकि अब इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपये प्रति वर्ष करने की मांग की जा रही है. इसके आलावा, सीनियर सिटीजन के लिए इस कटौती की लिमिट को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये सालाना करने की मांग की जा रही है. वहीं, सरकार ने नेशनल पेंशन सिस्‍टम (NPS) के तहत अब नॉन-गवर्नमेंट सेक्‍टर के कर्मचारियों के लिए 80% फंड रिटायरमेंट के समय ही निकालने की अनुमति दे दी है, जबकि 20% एन्‍युटी के लिए रखा है. ऐसे में उम्‍मीद की जा रही है कि एनपीएस छूट को नए टैक्‍स रिजीम में शामिल करते हुए 80% फंड निकासी पर शून्‍य टैक्‍स का ऐलान किया जाए, ताकि लोगों को एक बड़ा आर्थिक सपोर्ट मिल सके.

इंश्‍योरेंस में छूटः इंश्‍योरेंस को 0 जीएसटी कैटेगरी में रखने और 100 फीसदी एफडीआई मंजूरी मिलने के बाद अब उम्‍मीद की जा रही है कि लाइफ और हेल्‍थ इंश्‍योरेंस को गांव-गांवों तक पहुंचाने के लिए बेहतर फ्रेमवर्क तैयार किया जाए. सरकार से इस सेक्‍टर को प्रोत्‍साहन की भी उम्‍मीद है. पिछले कुछ समय में सोना और चांदी की कीमतें इतनी तेजी से बढ़ी हैं कि आम आदमी की पहुंच से बाहर हो चुकी हैं. चांदी 3 लाख रुपये के ऊपर है और सोना 1.5 लाख रुपये के ऊपर है. ऐसे में ज्‍वेलरी शॉप की कमाई ठप हो चुकी है, ज्‍यादातर लोग सोना-चांदी नहीं खरीदना चाहते हैं. इस कारण ज्वेलर्स की डिमांड है कि सरकार सोने और चांदी पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को कम करे, जीएसटी दर घटाए , इन्वेंटरी टैक्स और टैक्स टाइमिंग राहत का ऐलान हो.

बात किसानों की करें तो किसान इस बार पीएम किसान सम्मान निधि को लेकर आस लगाए बैठे हैं. योजना के तहत सालाना 6000 रुपये की लिमिट को बढ़ाकर 12000 रुपये कर दिया जाए, ताकि उन्‍हें अपनी खेती के लिए ज्‍यादा सपोर्ट मिल सके. साथ ही फसलों के लिए एमएसपी आदि में बढ़ोतरी भी हो. वहीं, शेयर बाजार को भी बजट से काफी उम्मीदें हैं, क्योंकि ग्‍लोबल तनाव के कारण अभी शेयर बाजार दबाव में दिखाई दे रहा है. ऐसे में मांग उठ रही है कि LTCG, STCG और STT में रियायत दी जाए, ताकि निवेशकों की उम्‍मीद बढ़े. साथ विदेशी निवेशकों को भी मार्केट में वापस लाया जा सके. इसके अलावा, शेयर बाजार से कमाई पर दोहरा टैक्‍स कल्‍चर खत्‍म हो. उधर, कोविड -19 से पहले सीनियर सिटीजन को रेलवे ट्रेन टिकट बुकिंग के समय रियायत दी जाती थी, लेकिन अब ये सुविधा बंद है. ऐसे में इसे फिर से शुरू करने की मांग की जा रही है.

पान-मसाला महंगाहर महीने की तरह ये महीना भी कई बदलावों के साथ शुरू होने जा रहा है. LPG सिलेंडर की कीमतों से लेकर टोलटैक्स पर फास्टैग से जुड़े नियम तक शामिल हैं. आज से पान मसाला और सिगरेट समेत अन्य तंबाकू प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ सकती हैं.

क्योंकि सरकार इन पर लागू टैक्स में इजाफा करने वाली है. इस साल की शुरुआत में ही सरकार की ओर से GST क्षतिपूर्ति उपकर के स्थान पर एक नया उत्पाद शुल्क और उपकर अधिसूचित किया गया था. पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसके तहत देश में 1 फरवरी 2026 से तंबाकू उत्पादों और पान मसाला पर अधिक टैक्स का प्रावधान किया गया है. अधिसूचना को देखें, तो तंबाकू और पान मसाला पर नए शुल्क लागू जीएसटी दरों के अतिरिक्त लगाए जाएंगे. जनवरी की शुरुआत में वित्त मंत्रालय ने चबाने वाले तंबाकू, जर्दा और गुटखा पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण और शुल्क संग्रह) नियम, 2026 को भी अधिसूचित किया. ये नियम चबाने वाले तंबाकू प्रोडक्ट्स के निर्माताओं से उत्पादन क्षमता का आकलन करने और शुल्क वसूलने की प्रक्रिया निर्धारित करते हैं. रिपोर्ट की मानें, तो केंद्र सरकार का यह कदम दिसंबर 2025 में संसद द्वारा दो विधेयकों को मंजूरी दिए जाने के बाद आया, जो पान मसाला निर्माण पर नए स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर और तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने की अनुमति देते हैं.

सरकार द्वारा संशोधित टैक्स स्ट्रक्चर के तहत 1 फरवरी से सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने से लंबी, प्रीमियम सिगरेट पर सबसे अधिक वृद्धि देखने को मिलेगी. बदलाव के तहत सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक पर 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक का उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा, जो फरवरी  पहली तारीख से प्रभावी होगा. ध्यान रहे कि यह शुल्क 40% जीएसटी से अलग होगा. टैक्स की मार के चलते इन तंबाकू प्रोडक्ट्स को बनाने वाली कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन प्रभावित होगा और ऐसे में कंपनियां इसकी भरपाई के लिए ग्राहकों पर बोझ बढ़ा सकती हैं. सीधे शब्दों में कहें तो सिगरेट, पान-मसाला, गुटखा महंगे हो जाएंगे और इनके शौकीनों को अब ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी.  क्रिसिल की एक रिपोर्ट को देखें, तो सिगरेट उद्योग को शुल्क में बढ़ोतरी से बिक्री में गिरावट का सामना भी करना पड़ सकता है. वर्तमान में, सिगरेट पर 28 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के क्षतिपूर्ति उपकर भी लगते हैं, लेकिन 1 फरवरी से ये क्षतिपूर्ति उपकर हटा दिया जाएगा और सिगरेट की लंबाई के आधार पर एक अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू होगा. क्रिसिल ने Tax Hike से घरेलू सिगरेट उद्योग में अगले वित्तीय वर्ष में 6-8 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया है.

चांदी 1 लाख तक फिसलीसोना-चांदी की कीमतों में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली है. एक ही दिन में चांदी का भाव 1 लाख रुपये से ज्यादा टूट गया है, सोना भी 33000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा सस्ता हो गया है. घरेलू मार्केट में भी कीमती धातुओं के दाम गिरे हैं.

एक्सपर्ट पहले से ही ऐतिहासिक लेवल पर पहुंचे कीमती धातुओं के दाम में बड़ी गिरावट का अनुमान जता रहे थे. और हुआ भी कुछ ऐसा है. आइए जानते हैं गोल्ड-सिल्वर प्राइस क्रैश के पीछे के बड़े कारणों के बारे में. एक्सपर्ट्स के अनुमान सच साबित हुए हैं और आखिर चांदी का बुलबुला फूट गया है. जी हां, सिर्फ एक ही दिन में 1 Kg Silver Price एक लाख रुपये से ज्यादा कम हो गया है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर बीते गुरुवार को तूफानी तेजी के साथ उछाल भरते हुए अपना नया हाई लेवल छूने के बाद अंत में 3,99,893 रुपये प्रति किलो पर क्लोज हुई थी,

वहीं शुक्रवार को वायदा कारोबार बंद होने पर 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी का रेट क्रैश (Silver Price Crash) हो गया और ये तेजी से गिरते हुए 2,91,922 रुपये पर आ गई. यानी एक झटके में ये 1,07,971 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई. इससे ठीक एक दिन पहले यानी गुरुवार को ही चांदी की कीमतों ने रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो का ऐतिहासिक स्तर पार किया था और ये 4,20,048 रुपये प्रति किलो के हाई लेवल पर पहुंच गई थी.

लेकिन झटके में बुलंदियों पर पहुंची चांदी ने अचानक ही निवेशकों को तगड़ा झटका दिया और इस हाई लेवल से 1,28,126 रुपये महज एक दिन में ही सस्ती हो गई. न सिर्फ चांदी, बल्कि सोने का बुलबुला भी फूटा है. 10 Gram 24 Karat Gold Rate में सिर्फ एक कारोबारी दिन में ही 33,113 रुपये की बड़ी गिरावट आई है. सिल्वर प्राइस बुरी तरह फिसलने के साथ-साथ गोल्ड रेट भी क्रैश हो गया.

एमसीएक्स पर 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाले सोने का वायदा भाव गुरुवार को 1,83,962 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था और शुक्रवार को क्लोजिंग तक ये फिसलकर 1,50,849 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. अगर सोने के हाई लेवल से इसकी कीमत में आई गिरावट पर गौर करें, तो गुरुवार को ही Gold Rate भी चांदी की तरह ताबड़तोड़ तेजी लेकर 1,93,096 रुपये के अपने लाइफ टाइम हाई पर पहुंचे थे और फिर अचानक इसमें ऐसी गिरावट आई कि सोना इस हाई से 42,247 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया. सोना-चांदी की कीमतों में तेज उछाल के बीच एक्सपर्ट्स पहले सी ही अनुमान जता रहे थे

कि ये इस ऊंचाई पर पहुंचने के बाद तेजी से फिसल भी सकता है और उनके अनुमान शुक्रवार को सच भी साबित हो गए. अगर इन कीमती धातुओं के भाव में आई गिरावट के पीछे के कारणों के बारे में बात करें, तो एक नहीं बल्कि कई वजह नजर आती हैं. Gold-Silver Crash का एक बड़ा कारण मुनाफासूली रही, ऐतिहासिक लेवल पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने सोना-चांदी में प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी और बिकवाली के दबाव में झटके में दोनों के दाम बिखर गए. न सिर्फ सोना-चांदी,

बल्कि इनके ईटीएफ भी बिखरे हुए नजर आए. इसमें अमेरिकी डॉलर में आई तेजी का भी बड़ा रोल रहा. आमतौर पर जब US  Dollar मजबूत होता है, तो दूसरे देशों के निवेशकों के लिए गोल्ड- सिल्वर खरीदना महंगा पड़ता है और इनकी डिमांड घट जाती है, जिससे कीमतें भी कम होती है. डॉलर के साथ ही US Treasury की यील्ड भी बढ़ी है और निवेशकों को सुरक्षित बॉन्ड में ज्यादा रिटर्न नजर आने लगा है, जिससे ये बिकवाली देखने को मिली. वहीं डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से ग्लोबल टेंशन में कमी और US Fed में जेरोम पॉवेल की जगह उनके पसंदीदा व्यक्ति केविन वार्श की एंट्री से जुड़ी खबरों ने भी सोना-चांदी पर दबाव बढ़ाया है.

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