छत्तीसगढ़

54 नगर पालिका में अध्यक्षों का आरक्षण:तिल्दा नेवरा में ओबीसी से बनेगा अध्यक्ष..

तिल्दा नेवरा-छत्तीसगढ़ में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव को लेकर बुधवार कोअध्यक्ष का आरक्षण रायपुर के साइंस कॉलेज परिसर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में लॉटरी से किया गया।पहले नगर निगम बाद में नगर पालिकाओं के लिए आरक्षण की प्रक्रिया पुरी की गई। 54 नगर पालिका मेंअध्यक्ष के लिए हुई आरक्षण प्रक्रिया में 3-SC, 2-ST, 4, OBC  और 9 सीट सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित की गई है।  इसके अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 13 सीट आरक्षित की गई है ,इनमें 4 कुम्हारी सूरजपुर. गोबरा नवापारा.और मनेंद्रगढ़ की नगर पालिकाओ में अगली अध्यक्ष महिला होगी.
बाकी की 9 सीटों में तिल्दा नेवरा, दल्ली राजहरा. बड़े बचेली. लोरमी. कटघोरा. बेमेतरा. कोंडागांव कवर्धा. अहिवारा मैं ओबीसी से अध्यक्ष होगा..

54 नगर पालिका में अध्यक्षों का आरक्षण

अनुसूचित जाति

1. अभनपुर 2. मंदिरहसौद 3. बागबाहरा 4. सारंगढ 5. डोंगरगढ़6. जांजगीर-नैला (महिला)7. अकलतरा (महिला)8. पंडरिया (महिला)

अनुसूचित जनजाति1. नारायणपुर2. जशपुरनगर3. बलरामपुर4. सुकमा5. दंतेवाड़ा (महिला)6. बीजापुर (महिला)

अन्य पिछडा वर्ग1. दल्लीराजहरा2. तिल्दा-नेवरा3. बड़े-बचेली4. लोरमी5. कटघोरा6. बेमेतरा7. कोण्डागांव8. कवर्धा9. अहिवारा10. मनेन्द्रगढ़ (महिला)11. गोबरा-नवापारा (महिला)12. सूरजपुर (महिला)

13. कुम्हारी (महिला) अनारक्षित/ सामान्य1. शिवपुरचरचा (महिला)2. तखतपुर (महिला)3.किरंदुल (महिला)4. जामुल (महिला)5. खैरागढ़ (महिला)6. बोदरी (महिला)7. बालोद (महिला)8. सरायपाली (महिला)9. बांकी मोंगरा (महिला)10. सक्ती11. खरसिया12. कांकेर13. चांपा14. रतनपुर15. भाटापारा16. बालौदाबाजार17. मुंगेली 18. गरियाबंद19. आरंग20. महासमुंद21. गौरेला22. पेण्ड्रा23. दीपका24. सिमगा25. अमलेश्वर26. बैकुण्ठपुर 27. रामानुजगंज..

आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद तिल्दा नेवरा नगर पालिका में कई नेताओं के चेहरे मुरझा गए हैं.. इनमें से ज्यादातर नेता ऐसे हैं जो मानकर चल रहे थे नगर पालिका के चुनाव में अगले अध्यक्ष वे ही होंगे. तिल्दा नगर पालिका में पिछले दो चुनाव में सामान्य  सीट रही है .लेकिन पिछले चुनाव में सामान्य होने के बाद और भाजपा की संख्या अधिक होने के बावजूद अध्यक्ष के पद पर कांग्रेस की लेमीक्षा गुरु डहरिया चुनी गई थी हालांकि लेमिक्षा ने पिछले साल भाजपा विधानसभा चुनाव के दौरान अपने भाई के साथ भाजपा प्रवेश किया था.लेकिन पिछले चुनाव में एक दो भाजपा  पार्षदों को छोड़  जिस प्रकार भाजपा पार्षदो ने अपने आप को बेचकरअ पने पार्टी केअध्यक्ष को हराया था,उस चुनाव में कांग्रेस पार्षदों की भी बोली लाखों में लगी थी.और नोटों की गडडी को देखकर वे भी बिक गए और अपने ही पार्टी के उपाध्यक्ष प्रत्याशी को हराकर ऐसे व्यक्ति को उपाध्यक्ष बनवा दिया जिनका पेशा क्या है. यह लिखने की जरूरत नहीं है. उसे उपाध्यक्ष बना दिया। उसे शहर के मतदाता भूल नहीं पाए हैं.

मजेदार बात तो यह है कि भाजपा के जिन नेताओं ने पार्षदों को कांग्रेस के हाथ बेचा था. उसके बाद से वे नेता  चुनाव के  अपने आप को अध्यक्ष मान कर  बैठे थेउन्हें  चुनाव का इतंजार था लेकिन  उनके मंसूबो पर आरक्षण ने पानी फिर दिया.. आने वाले समय में भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी के लिए किस नाम पर मुहर लगाएगी  यह तो वक्त बताएगा लेकिन यदि बिकाऊ पार्षदों और बेचने वाले या उनके किसी समर्थक को प्रत्याशी बनाया गया तो जनता अध्यक्ष की कुर्सी तक उसे पहुंचने नहीं देगी…[अगली खबर में पढ़े चुनाव में सटोरिए सक्रिय]

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