Tuesday, March 17, 2026
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वक्त के साथ और गुस्सैल होते जाएंगे कुत्ते, इस मौसम में बढ़ जाएंगी डॉग बाइट की घटनाएं, जानिए क्या कहती है हार्वर्ड की स्टडी

तिल्दा -आए-दिन कुत्तों के काटने की घटनाएं हो रही हैं. अब एक डराने वाली रिसर्च आई है, जिसके मुताबिक कुत्तों का गुस्सा कम नहीं होगा, बल्कि बढ़ता ही जाएगा.हार्वर्ड मेडिकल स्कूल का ये शोध दावा करता है कि जैसे-जैसे गर्मी और अल्ट्रावायलेट (UV) स्तर बढ़ेगा, इंसानों का बेस्ट फ्रेंड कहलाता ये पशु उसके दुश्मनी में बदलता जाएगा. ये बदलाव भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में दिखेगा.

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल ने 70 हजार से ज्यादा डॉग बाइट की घटनाओं पर अध्ययन करने के बाद एक परेशान करने वाला ट्रेंड देखा. ये पैटर्न साफ कहता है कि कुत्तों हिंसक होना वक्त के साथ बढ़ेगा. यहां तक कि गर्म और धूल-धुएं से भरे दिन में ये इंसानों पर ज्यादा हमला करेंगे. खासकर जब प्रदूषण ज्यादा हो, तब कुत्तों को हमला भी आम दिनों की तुलना में  11 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. शोधकर्ताओं ने माना कि इंसानी गलतियों की वजह से ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है, जिसका असर कुत्तों केमूड पर भी होगा.

नेचर जर्नल के सांटिफिक रिपोर्ट्स में इसी 15 जून को ये शोध प्रकाशित हुई. अमेरिका के 8 बड़े शहरों में ये रिसर्च 10 सालों के दौरान कीगई. इसमें साफ दिखा कि जब भी मौसम ज्यादा गर्म रहता है, या जिस दिन धूल ज्यादा रहती है, कुत्तों की आक्रामकता भी ज्यादा दिखती है.

स माहौल में, इतना बढ़ता है हमले का डर

शोध का पैटर्न देखें तो यूवी लेवल बढ़ने पर डॉग बाइट में 11 प्रतिशत बढ़त होती है, गर्म दिनों में ये बढ़कर 4प्रतिशत हो जाता है, जबकि जिस दिन ओजोन लेवल ज्यादा रहता है, डॉग बाइट का डर 3 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. यहां तक कि तेज बारिश के समय भी खतरा टलता नहीं,बल्कि 1 प्रतिशत तक बढ़ा रहता है.

गर्मी का असर इंसानों पर भी कम नहीं

कई अध्ययन जोर देते हैं कि गर्म देशों के मौसम का अपराध से डायरेक्ट नाता है. एम्सटर्डम की व्रिजे यूनिवर्सिटी ने इसपर एक स्टडी की, जिसके नतीजे बिहेवियरल एंड ब्रेन साइंसेज में छपे. इसमें वैज्ञानिकों ने देखा कि आम लोग, जो क्रिमिनल दिमाग के नहीं होते, वो एकदम सेअपराध कैसे कर बैठते हैं. इसके लिए क्लैश (CLASH) यानी क्लाइमेट, एग्रेशन और सेल्फ कंट्रोल इन ह्यूमन्स को वजह माना गया.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लोग जिसक्लाइमेट में रहते हैं, वो गुस्से को उकसाता या उसपर कंट्रोल करता है. गर्म इलाकों में क्राइम ज्यादा होता है, जबकि ठंडे इलाकों में ये घट जाता है. इंसानोंपर दिखने वाली यही बात कुत्तों पर भी लागू होती है.

लगातार बढ़ता जाएगा ये टकराव

कुत्ते जैसा आमतौर पर दोस्ताना पशु इतना हिंसक हो रहा है कि बच्चों को चीरने-फाड़ने लगा है. ये एकाएक नहीं हुआ. कहीं न कहीं हम ही इसके जिम्मेदार हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन की एक रिसर्च भी इसी ओर इशारा करती है. इसके मुताबिक तापमान में बदलाव के कारण खानपान का जो असंतुलन पैदा हो रहा है, वो इंसानों औरऔर पशुओं के बीच 80 फीसदी टकराव की वजह बनेगा. डॉग अटैक का मामला इसलिए ज्यादा दिख रहा है क्योंकि ये पशु इंसानी आबादी के साथ ही रहता है.

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