Saturday, March 14, 2026
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रायपुर में फर्जी कंपनी खोल 429 करोड़ से ज्यादा भेजे विदेश, आरोपियों का जानें चाइना और थाइलैंड कनेक्शन

रायपुरः छत्तीसगढ़ के रायपुर रेंज के साइबर क्राइम पुलिस को करोड़ों के साइबर ठगी में बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने दो शातिर ठगों को संदीप रात्रा (41 साल) और राजवीर सिंह (22 साल) गिरफ्तार किया है। आरोपी संदीप रात्रा उत्तम नगर दिल्ली का रहने वाला है। वहीं, राजवीर रायपुर के हीरापुर में रहने वाला है।

दरअसल, रायपुर में साइबर ठगी का मामला सामने आने पर अमानका थाना में शिकायत की गई थी। इस केस में रायपुर की साइबर क्राइम थाना जांच कर रही है। इस केस में पहले दो आरोपी पवन कुमार निवासी उत्तम नगर दिल्ली और गगनदीप विकासपूरी एक्सटेंशन दिल्ली को पूर्व में गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही आईजी अमरेश मिश्रा से मिले निर्देशानुसार कार्यवाही करते हुए प्रोगेसिव प्वाइंट लालपुर रायपुर मे रेड कार्रवाई की गई। यहां से संदीप और राजवीर के बारे में सुराग मिले।

दो साथी पहले हुए गिरफ्तार

साइबर ठगी की जांच करते हुए रायपुर साइबर पुलिस ने दो आरोपियों पवन कुमार और गगनदीप को पहले पकड़ा था। इन दोनों ने अपनी आईडी में पता बदलकर अलग-अलग फर्म खोली। उसके आधार पर कई बैंकों में खाते खुलवाए। बुधवार के दिन पकड़ में आए दो आरोपी राजवीर और संदीप के पास से जब्त डॉक्यूमेंट से जांच करने पर ठगी की रकम 400 करोड़ के ऊपर पहुंच गई है।

चाइना और थाइलैंड भेजे करोड़ों रुपए

बुधवार के दिन पकड़ाए दो आरोपियों के पास से मामले से जुड़े डॉक्यूमेंट के अलावा और भी दूसरी फर्जी कंपनी के कागजात, फॉरेक्स ट्रेडिंग बैंक अकाउंट और मोबाइल जब्त किए हैं। इतना ही नहीं आरोपियों ने ठगी के रुपयों को डॉलर में बदलकर थाइलैंड और चाइना भेजे थे।

ऐसे आए पकड़ में

आरोपियों ने छत्तीसगढ़ के डॉ पीके गुप्ता निवासी टाटीबंध से शेयर मार्केट में इन्वेस्ट का झांसा देकर 10 लाख की ठगी की गई इसके बाद उनका पैसा दिल्ली, यूपी और राजस्थान भेजा गया। वहां से कई कंपनियों से घुमाते हुए ठगी की रकम रायपुर पहुंची। पीड़ित की शिकायत पर जांच करते हुए पुलिस ने जांच शुरू की।

50-50 हजार में काम करते थे दोनों

इस गैंग का मुख्य सरगना राजीव सिंघानिया निवासी दिल्ली अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है। वहीं, बुधवार को पकड़ में आए दोनों आरोपियों के बारे कुछ जानकारी मिली है। ये दोनों 12वीं तक पढ़े हैं। साथ ही खुद को सॉफ्टवेयर इंजीनियर बताते हैं। ये दोनों जिस गैंग के लिए काम करते थे वह उनको हर महीने 50-50 हजार रुपए देता था। इसके साथ ही कमीशन अलग से मिलता था।

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