रायपुर। मध्यप्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र की पुलिस कमिश्नर प्रणाली का अध्ययन करने के बाद डीजीपी अरूण देव गौतम ने एडीजी प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता में सात अफसरों की टीम बनाई है जिसमें आईजी अजय यादव, अमरेश मिश्रा, ध्रुव गुप्ता, के अलावा डीआईजी अभिषेक मीणा, संतोष सिंह, और एसपी प्रभात कुमार सदस्य हैं। यह टीम प्रणाली की प्रक्रियाओं का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगी। इसके अतिरिक्त वैधानिक पहलुओं के संबंध में आवश्यकता पडऩे पर श्रीमती मुकुला शर्मा, संयुक्त संचालक, लोक अभियोजन, संचालनालय लोक अभियोजन, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर को टीम में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में सम्मिलित किया गया है जिससे कमेटी सलाह ले सकती है।
रायपुर छत्तीसगढ़ का पहला जिला होगा, जहां पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होगी। साय सरकार कमिश्नर प्रणाली सबसे पहले रायपुर में शुरू कर रही है। पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा, तो इसका दायरा बढ़ाया जाएगा। रायपुर के बाद बिलासपुर, दुर्ग, समेत अन्य जिलों में इसे शुरू किया जा सकता है।

कमिश्नर प्रणाली लागू होने पर पुलिस के अधिकार बढ़ेंगे। कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकांश मामलों में पुलिस कमिश्नर खुद निर्णय ले सकेंगे। इससे वे फाइलें, जो अब तक कलेक्टर के पास लंबित रहती थीं, सीधे पुलिस स्तर पर निपटाई जा सकेगी।
इस व्यवस्था के तहत एसडीएम और एडीएम के पास मौजूद कार्यकारी मजिस्ट्रेट शक्तियां भी पुलिस को मिल जाएगी। इससे पुलिस बिना कलेक्टर की अनुमति के शांति भंग की आशंका में हिरासत, गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और रासुका जैसी धाराएं लागू कर सकेगी।

