महंगाई की मार: गैस से लेकर तेल ,चाय-कॉफी और ड्राई फ्रूट तक, आम जिंदगी हुई महंगी
महंगाई की मार: गैस से लेकर तेल ,चाय-कॉफी और ड्राई फ्रूट तक, आम जिंदगी हुई महंगी

इंदर कोटवानी
रसोई गैस की बढ़ती कीमतों और किल्लत ने रोजमर्रा की जिंदगी पर डाला गहरा असर, दोस्तों की महफिल भी फीकी
तिल्दा नेवरा-लगातार बढ़ती महंगाई ने अब आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। रसोई गैस की कीमतों में भारी इजाफा और कई जगहों पर गैस सिलेंडर की किल्लत ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। इसका सीधा असर अब चाय-कॉफी जैसी छोटी-छोटी खुशियों पर भी पड़ने लगा है।
पहले जहां लोग दोस्तों के साथ बैठकर चाय-कॉफी का आनंद लेते थे, वहीं अब बढ़ती कीमतों के कारण यह आदत भी कम होती जा रही है। चाय बनाने में इस्तेमाल होने वाली चीनी, दूध और गैस—तीनों की कीमतों में इजाफा हुआ है। कॉफी और उससे जुड़े उत्पाद भी महंगे हो चुके हैं।चौतरफा महंगाई की मारअसर बाजार और ठेलो में मिलने वाली खाने पिने वाली चीजो पढ़ी नही पड़ा है बल्कि घर में पकने वाला भोजन भी महंगा हो गया है . कमर्शियल गैस के कीमत बढने के बाद भी आसानी से नही मिलने के कारण होटलों में दो वक्त की रोटी डेढ़ गुनी महंगी हो गई है।

इसके साथ ही खाने के तेल और ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में भी जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सरसों, सोयाबीन और रिफाइंड तेल के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं, खाने के सभी तेल 20 से 25 रुपए प्रति किलो महंगा हुआ है।जिससे आम परिवार का बजट बिगड़ रहा है। त्योहारों और खास मौकों पर इस्तेमाल होने वाले ड्राई फ्रूट्स जैसे बादाम, काजू और किशमिश भी अब आम आदमी की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, सप्लाई चेन में दिक्कतें और घरेलू स्तर पर टैक्स का असर इन बढ़ती कीमतों की बड़ी वजह है। वहीं आम लोगों का कहना है कि उनकी आय में बढ़ोतरी नहीं हुई, लेकिन खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।
शादी के सीजन में प्लास्टिक के समान महंगे..
अभी छत्तीसगढ़ में शादी की सीजन चल रही है लेकिन शादियों में इस्तेमाल होने वाले डिस्पोजल गिलास कटोरी अन्य प्लास्टिक के सामानों के दाम दो से तीन गुना बढ़ गए हैं, जो डिस्पोजल का गिलास ₹30 पैकेट मिलता था अभी ₹70 पैकेट में मिल रहा है।
बढ़ती महंगाई ने लोगों को 70 के दशक के उस मशहूर गाने की याद दिला दी है—“बाकी कुछ बचा तो महंगाई मार गई।” यह गीत आज के हालात पर बिल्कुल सटीक बैठता नजर आ रहा है।
अगर जल्द ही महंगाई पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो इसका असर न केवल आम आदमी की जेब पर पड़ेगा, बल्कि सामाजिक जीवन और आपसी मेलजोल पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है कि वह महंगाई को काबू में लाकर आम जनता को राहत दे।
बॉक्स]कालाबाजारी करने वाले काट रहे चांदी.
एक तरफ घरेलू गैस से लेकर कमर्शियल गैस के दाम बढ़ गए हैं।साथ गैस मिलने की समय सीमा तय कर दी गई है। दूसरी तरफ कमर्शियल गैस की किल्लत होने के कारण कुछ दुकानदारउसका फायदा उठाने खुलकर कालाबाजारी कर रहे हैं,। लोगों का कहना है कि ऐसे दुकानदारों के साथ फूड विभाग की अधिकारियों की मिली भगत होती है। ये दुकानदार घरेलू गैस को रिफिलिंग कर कमर्शियल गैस में भरकर डबल कीमत पर बेच रहे हैं। इन दुकानदारों ने कई लोगों के नाम से कनेक्शन ले रखे हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री योजना से महिलाओं को मिले गैस सिलेंडर ऐसे दुकानदारों के पास लोगों ने गिरवी रख दिया है,या बेच दिया है ।
ऐसे दुकानदार 12 महीने घरेलू गैस का सिलेंडर लेकर कमर्शियल गैस सिलेंडर में रिफिल [पलटी] कर ऊंचे दामों में बेचते ते हैं। ऐसे दुकानदारों को किसी के मजबूरी से कोई लेना-देना नहीं होता इनका ईमान सिर्फ पैसा कमाना होता है।तिल्दा स्टेशन चौक से लेकर नेवरा के बीच लगभग आधा दर्शन दुकानदार खुलेआम गैस सिलेंडर की कालाबाजारी कर रहे हैं। अभी सिलेंडर की कमी के कारण ये लोग परिचित लोगों के माध्यम से ही सिलेंडर बेच रहे हैं। लेकिन आम दिनों में ये दुकान के बाहर गैस से भरे सिलेंडर रखकर बेचते हैं ।बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती है।
रेट ज्यादा वजन कम ..
कुछ कम्पनिया उपभोक्ताओ को दोहरा चुना लगा रही है ।इसमें एम आर पी रेट तो बढ़ा हि रहे है .इसके साथ हि सामान का वजन ही कम करते जा रहे है ।पहले जिस तेल के पैकेट में एक लीटर तेल हुआ करता थाउअसमे मात्र कम कर 750ग्राम कर दी गई है ,
घर बनाना हुआ महंगा
सीमेंट लोहा बजरी सब महंगा
आम आदमी के स्वयं के घर का सपना भी महंगा हुआ है। अचानक एक बोरी सीमेंट के दाम में 20 बढ़ोतरी हो गई जो सीमेंट पहले 285 में मिलता था अब वह 320 रुपए हो गया। इस प्रकार घर निर्माण में उपयोग के लिए लाई जाने वाली सरिया 5700से बढकर 6300 हो गया है रेती बजरी सब महंगे हुए है ।



