Saturday, February 28, 2026
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भगवान को ठंड से बचाने का जतन… मंदिरों में प्रतिमाओं को ओढ़ाई जाने लगी शाल, गर्म तासीर के व्यंजनों का भोग

तिल्दा नेवरा .

तिल्दा नेवरा में ठंड बढ़ने पर मंदिरों में भगवान को ऊनी वस्त्र पहनाए जा रहे हैं. खाटू श्याम मंदिर में भगवान को जबकि ऊनी कंबल पहनाकर पुजारी मंदिर का द्वार बंद करता है. नेवरा अगवाल पंचायती राधा-कृष्ण में मंदिर में राधा क्रष्ण को ऊनी वस्त्र और शाल पहनाई जा रही है . पुजारियों का कहना है कि भाव की पूजा के तहत भगवान को ठंड से बचाने के ये उपाय किए जाते हैं.

पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर अब मैदानी इलाकों में भी दिखने लगा है. जिसके चलते पारा लगातार गिरता जा रहा है. इसका असर शहर  के मंदिरों में भी रहा है. यहां भगवान को ठंड से बचाने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं. राधा कृष्ण, राम  लक्ष्मण, सीता, भरत और हनुमान जी के साथ शत्रुघ्न को ऊनी वस्त्र पहनाए गए हैं,…तो कहीं शंकर जी को रजाई ओढ़ाई जा रही  है.

मंदिर केमें दर्शन करने आए लोगों ने बताया कि ठंड और शीतलहर शुरू हो गई है. इससे बचाव के लिए ऊनी वस्त्र पहनाए जा रहे हैं और इसी तरह भगवान को भी वस्त्र पहनाए जा रहे है हैं. उन्होंने बताया कि जब मनुष्य को ठंड लगती है, तो भाव  की पूजा के कारण भगवान को भी ठंड लगती होगी. इससे बचाव के लिए भगवान को शॉल, स्वेटर और गर्म कपड़े पहनाए जाते हैं और मौसम के हिसाब से भगवान को प्रसाद भी चढ़ाया जाता है.

स्टेशन चौक मा दुर्गा मंदिर के पुजारी ने बताया कि कार्तिक मास की बैकुंठ चतुर्दशी से बसंत पंचमी तक भगवान को ऊनी वस्त्र पहनाए जाते हैं, शहर में जितने भी मंदिर हैं वहां भगवान को गर्म वस्त्र पहनाए जाते हैं, क्योंकि भाव की पूजा होती है. जैसे हम गर्म कपड़े पहनाते हैं वैसे ही भगवान को भी ठंड लगती होगी यह मानकर हम उन्हें गर्म कपड़े पहनाते हैं. उन्होंने बताया कि जो संसार का पालनहार है उसे क्या परेशानी होगी, लेकिन भक्त होने के नाते और भाव की पूजा के कारण हम उन्हें गर्म कपड़े पहनाते हैं.

वहीं,नेवरा शाम मंदिर के पुजारी पुखराज शर्मा ने बताया गर्मी में भगवान को सूती वस्त्र पहनाए जाते हैं. इसी तरह सर्दी में भी उन्हें ऊनी वस्त्र पहनाए जाते हैं. चूंकि ठंड बढ़ रही है, इसलिए भगवान को ठंड से बचाने के लिए ऊनी वस्त्र पहनाए गए हैं. उन्होंने यह भी बताया कि हम भक्तों की भावना है कि भगवान को भी भूख-प्यास लगती है और उन्हें भी वस्त्र की आवश्यकता होती है. उन्होंने बताया कि भगवान को भी गर्मी में  और सर्दी में ठंड लगती है और जब ज्यादा ठंड लगती है तो कंबल से लेकर ब्लोअर तक की व्यवस्था की जाती है.उन्होंने आगे बताया कि बसंत पंचमी गर्म वस्त्र पहनाए जाते हैं.

पंडित पुखराज शर्मा ने बताया कि गर्म कपड़ों के साथ मेथी के लड्डू के साथ गर्म तासीर के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है .उन्होंने बताया कि श्याम मंदिर में खाटू श्याम जी को प्रतिदिन फूलों से सजाया जाता है इसीलिए भगवान को  हम कंबल तब ओढ़ते हैं जब मंदिर के द्वारा बंद किए जाते हैं, बाकी समय में उनके शरीर पर शॉल को रखा जाता है ताकि भगवान को ठंड न लगे। दुर्गा मंदिर स्टेशन चौक, झूलेलाल भगवान मंदिर में राम सीता. राधा कृष्ण मंदिर नेवरा  बनियापारा राधा कृष्ण मंदिर में भी भगवान को ठंड से बचने का जतन किए जा रहे  है.

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