नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में प्रदेश के किसानों से जुड़ा एक अहम कॉन्ट्रैक्ट साइन किया गया है। ये MOU प्रदेश सरकार और युनाटेड नेशंस के बीच हुआ है। मामला प्रदेश के किसानों की फसल पैदावार को बढ़ाने से जुड़ा है।
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर और दंतेवाड़ा जिले में गेहूं और चावल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए ये कवायद की जा रही है। एक स्पेशल प्रोग्राम के तहत संयुक्त राष्ट्र संघ प्रदेश को 31.404 करोड़ रूपए की सहायता देगा। इस कार्यक्रम में चावल और गेहूं के उत्पादन के साथ-साथ डिजिटल एग्रीकल्चर को भी प्रमोट किया जाएगा। ये प्रोजेक्ट प्रदेश में 5 सालों तक चलेगा।
मंत्रालय महानदी भवन में संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन के साथ MOU हुआ। कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह की अध्यक्षता में खास बैठक रखी गई। राज्य शासन की ओर से कृषि विभाग की संचालक चंदन संजय त्रिपाठी और युनाइटेड नेशंस के प्रतिनिधि ताकायूकी हाजीवारा ने MOU पर साइन किए।
टेक्नोलॉजी करेंगे शेयर
UN के साथ हुए इस MOU के बाद अब प्रदेश दो जिलों के किसानों को खेती से जुड़ी नई तकनीक के बारे में बताया जाएगा। इसके लिए UN से सर्टिफाइड एक्सपर्ट छत्तीसगढ़ आ सकते हैं। इस प्रोजेक्ट में आने वाले खर्च को UN ही वहन करेगा। इन इलाकों में कैसे डिजिटल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से किसान, मौसम, मिट्टी, फसल की बीमारियों पर काम कर पाएंगे ये भी बताया जाएगा।
अफसरों से हुई बात-चीत
कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने प्रदेश से नॉन बासमती धान के निर्यात, कॉफी एवं चाय उत्पादन की अपार संभावनाओं, प्रदेश के कृषकों को कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मछलीपालन हेतु शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध कराने तथा सामान्य धान के स्थान पर सुगंधित धान एवं अन्य फसल लेनेे वाले किसानों को अतिरिक्त आदान सहायता राशि उपलब्ध कराने की जानकारी संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रतिनिधि को दी।
कृषि उत्पादन आयुक्त सिंह ने प्रदेश में मिलेट फसलों जैसे कोदो-कुटकी, रागी के उत्पादन एवं रकबे में बढ़ोत्तरी के लिए संचालित मिलेट मिशन और गोधन न्याय योजना के माध्यम से तैयार वर्मी कम्पोस्ट किसानों को वितरित कर जैविक खेती को बढ़ावा देने के राज्य शासन प्रयासों के बारे में भी बताया। महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क (रीपा) के माध्यम से लघु उद्योगों को बढ़ावा देने की जानकारी भी UN के प्रतिनिधियों को दी गई।

