Wednesday, February 25, 2026
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बर्थडे के दिन बेटी का अंतिम संस्कार..पिता ने पहले केक-काटा, फिर दी पत्नी और बेटी को मुखाग्नि..गुब्बरों से सजी अर्थी देख भावुक हुए लोग।..

कवर्धा-छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में एक बड़ा ही भावुक दृश्य सामने आया है। यहां एक पिता ने अपनी बेटी का अंतिम संस्कार करने से पहले श्मशान घाट में केक काटा, डेड बॉडी के पास गुब्बारे लगाए और केक काटने के बाद वह एक टुकड़ा अपनी बेटी के शव के पास लेकर पहुंचा और फूट-फूटकर रोने लगा। वहां मौजूद परिजनों ने उसे संभाला। श्मशान घाट का ऐसा भावुक नजारा देख हर किसी की आंखें नम हो गईं। उन्होंने अपनी बेटी का बर्थ डे टोपी भी पहनाई।

दरअसल, 7 अक्टूबर को 10 साल की अदिति भट्टाचार्य का जन्मदिन था। कोलकाता से उसके पिता इंद्रजीत भट्टाचार्य और परिजन कवर्धा पहुंचे थे। उन्होंने फैसला किया कि पहले बेटी का जन्मदिन मनाया जाएगा उसके बाद उसका बेटी अदिति और उसकी मां परम भट्टाचार्य का अंतिम संस्कार किया जाएगा ।

दरअसल, इंद्रजीत भट्टाचार्य कोलकता के रहने वाले थे। मां बेटी की मौत 5 अक्टूबर को हुई थी।शाम करीब 5 बजे तेज रफ्तार ट्रक कवर्धा की ओर से अमरकंटक की ओर जा रहा था, जबकि बालाघाट से कोलकाता के पर्यटक बिलासपुर जा रहे थे। बोलरो सवार कालघरिया गांव के पास पहुंचे थे। इसी दौरान ट्रक ने बोलेरो सवारों को जोरदार टक्कर मार दी।टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बोलेरो चकनाचूर हो गई। उसमें सवार लोगों की चीख-पुकार मच गई। एक्सीडेंट स्पॉट पर खून के धब्बे और बोलेरो की हालत देखकर कोई भी सिहर उठे। 4 लोगों की मौके पर मौत हो गई। इनमें 3 महिला शिक्षिका, बोलेरो का ड्राइवर शामिल हैं। वहीं पांचवीं मौत अस्पताल में एक लड़की की हुई।

अदिति भट्टाचार्य भी अपनी मां के साथ घूमने के लिए आई थी। जिस गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ था उसमें अदिति अपनी मां और रिश्तेदारों के साथ मौजूद थी जबकि उसके पिता कोलकत्ता में ही थे। हादसे की जानकारी लगने के बाद वह कोलकत्ता से कवर्धा पहुंचे थे। लाश से दुर्गंध आने लगी थी जिस कारण से उसे कोलकत्ता ले जाना संभव नहीं था। इसी कारण से परिजनों ने फैसला किया कि उसका अंतिम संस्कार कवर्धा में ही किया जाएगा। मंगलवार शाम कवर्धा जिले के लोहरा रोड स्थित मुक्तिधाम में मां और बेटी का अंतिम संस्कार किया गया।

आदित्री के पिता इंद्रजीत भट्टाचार्य ने बताया कि मैंने बेटी को जन्मदिन का वादा किया था…अब वो नहीं है, लेकिन वादा तो निभाना पड़ेगा। फिर वही वादा, मुक्तिधाम की राख के बीच निभाया गया। मुक्तिधाम के बाहर खड़े लोग बस एक ही बात कह रहे थे कि किसी पिता को ऐसी घड़ी न देखनी पड़े। इंद्रजीत भट्टाचार्य ने बताया कि ​​​​​​बोड़ला अस्पताल में सिर्फ एक फ्रीजर थी, जिससे शव खुले में पड़े रहे। लाशें डिकम्पोज होने लगी थी, जिसे कोलकाता ले जाना संभव नहीं था। इसलिए बेटी और पत्नी का अंतिम संस्कार कवर्धा के लोहरा स्थित मुक्तिधाम में करना पड़ा।

इंद्रजीत भट्टाचार्य ने बताया कि लाशों को लेकर कोलकाता लौटना था, लेकिन श्मशान से राख लेकर लौट रहा हूं। हमने स्थानीय अस्पताल प्रबंधन से लाशों को सुरक्षित रखने की अपील की थी, लेकिन फ्रीजर नहीं मिलने की वजह से शव सड़ने लगे थे।

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