छत्तीसगढ़

नेवरा बी.एन.बी स्कूल  मैदान में  राम कथा का तीसरा दिन:श्रीराम जन्म प्रसंग का वर्णन, पंडाल जयकारों से गूंजा..

धूमधाम से मनाया गया ‘प्रभु श्री राम जन्मोत्सव’

​तिल्दा-नेवरा स्वर्गीय सोमचंद वर्मा स्मृति फाउंडेशन के तत्वाधान में बीएनबी स्कूल मैदान में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद श्री राम कथा के तीसरे दिन मंगलवार को भगवान श्री राम के दिव्य जन्मोत्सव का प्रसंग कथा व्यास अयोध्या की प्रख्यात मानस विदुषी  दीदी देवी चंद्रकला ने रोचक शैली में सुनाई। इस दौरान पूरा कथा पंडाल ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से गूंज उठा। जैसे ही व्यास पीठ से “भय प्रगट कृपाला, दीनदयाला” का स्वर गूँजा, हजारों श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे और पूरा पंडाल पुष्प वर्षा एवं शंखनाद से सराबोर हो गया।इस मौके पर मंत्री टंक राम वर्मा जी ने कहा कि श्री राम का जीवन ही मर्यादा का सबसे बड़ा पाठ है।

देवी ने कहा जब धरती पर अनैतिकता, अधर्म और अहंकार बढ़ता है, तब प्रभु अलग -अलग मानव रूप में इस धरती पर अवतार लेते हैं।हलाकि आज धर्म की हानि  का समय बड़ा आधुनिक हो गया है। पढ़ना लिखना बुरी बात नहीं है, पढ़ाई लिखाई ज्ञान की महता सदैव से चली आ रही है । पर ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपनी संस्कृति को भुला देना यह ज्ञान की पराकाष्ठा ज्ञान की श्रेणी में नहीं ले सकती है। ज्ञान प्राप्त करने का तात्पर्य यह है अपने धर्म संस्कृति के प्रति और मजबूत होना चाहिए और लेकिन पढ़ लिखने के बाद  हमें ऐसा लगता है, जैसे हम बड़े वैज्ञानिक बन गए और फिर कहने लगते हैं विज्ञान में जो नहीं दिखता है वह नहीं होता है।

दीदी चंद्रकला ने प्रसंग का तात्पर्य बताते हुए कहा कि हम यहां बैठे हैं बिजली चालू है। सभी को पता है तारों में करंट है लेकिन करंट दिखती नहीं है, अगर हम कहें की करंट नहीं दिख रही और उसे छुएंगे तो करंट तो हमें  लगेगी। यदि आज की लिखी बातों को पढ़कर उसे मानकर हम कहे कि भगवान दिख नहीं रहा है भगवान नहीं हो सकता । यानी कि हम आज की लिखी बातों पर पूरा भरोसा कर रहे हैं। ऐसे में हजारों साल पुरानी लिखी वेद पुराण की बातों को कैसे नहीं मानेंगे।उन्होंने श्रीराम को जगत का पालक और सृष्टि के नियम का महत्वपूर्ण तत्व बताया, जिन्होंने अयोध्या में राजा दशरथ के घर जन्म लिया। महाराज ने यह भी कहा कि रामकथा मनुष्य को आध्यात्मिक ज्ञान और आदर्श गुणों का संचार करती है।

दीदी ने कहा भगवान नाम का जाप करने से दुखों को सहने की शक्ति प्राप्त हो जाती है यदि मनुष्य को संसार में रहना है तो सहने की आदत भी उसे डालनी पड़ेगी जो सहनशीलता होती है वह कभी अपने दुखों की किसी से कहता नहीं है आज लोगों में सहनशीलता कम होती जा रही है विज्ञान जहां खत्म होता है वहां भारत का धर्म विज्ञान शुरू होता है और उसे ऋषि मुनियों ने कई बार सिद्ध किया है

भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव प्रसंग के समय कथा पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। अवतार प्रसंग के साथ ही पूरा क्षेत्र ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से भक्तिमय हो गया।कथा में मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री माननीय  टंक राम वर्मा एवं आयोजन के मुख्य संयोजक पुष्पराज वर्मा .पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष महेश अग्रवाल,उधोग पति ,घनश्याम अग्रवाल, सौरभ जैन ,जनपद अध्यक्ष मनहरे सहित अनेक गणमान्यउपस्थित रहे। इस मौके पर मंत्री वर्मा ने व्यास पीठ का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।

आयोजन समिति के प्रमुख संयोजक पुष्पराज वर्मा ने बताया कि सात दिवसीय श्री राम कथा के माध्यम से क्षेत्र में धर्म, संस्कार और भक्ति का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है। कथा का समापन प्रतिदिन भजन-कीर्तन एवं आरती के साथ किया जा रहा है।

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