महासमुंद:छत्तीसगढ़ में धान खरीदी खत्म हो चुका है। सरकार ने 31 जनवरी 2026 तक धान खरीदी की तारीख तय की थी, जिसके बाद धान खरीदी बंद कर दी गई है। लेकिन दूसरी ओर कई किसान अभी भी अपना धान नहीं बेच पाए हैं, जो सरकार से लगातार धान खरीदी की तारीख बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। धान खरीदी जारी रखने की मांग को लेकर महासमुंद जिले के किसान पिथौरा तहसील कार्यालय पहुंचे हैं। इतना नहीं किसानों को ये भी कहना है कि अगर हमारा समाधान नहीं मिला तो हम धरने पर बैठ जाएंगे।
दरअसल मामला राजाडे़रा इलाके के 7 गांव का है, जहां के 90 से अधिक किसानों ने अब तक अपना धान नहीं बेचा है। किसानों की मानें तो उन्होंने ऑनलाइन टोकन कटवाने की कोशिश की, लेकिन लिमिट कम होने के चलते 31 जनवरी तक टोकन नहीं कटवा पाए। ऐसे में धान खरीदी की आखिरी तारीख तक किसान अपना धान नहीं बेच पाए हैं। वहीं, अब इन किसानों ने आंदोलन का रास्ता अपना लिया है। अब देखने वाली बात ये होगी कि क्या सरकार इन किसानों का धान खरीदन के लिए कुछ व्यवस्था करेगी? क्या इन किसानों को अपना धान अब बिचौलियों को बेचना होगा?
दूसरी ओर धान खरीदी बंद किए जाने के बाद पीसीसी चीफ दीपक बैज ने सरकारको आड़े हाथों लिया है। पीसीसी चीफ दीपक बैज का कहना है कि ‘सरकार ने धान खरीदी बंद कर दी है, लाखों किसान धान बेचने के वंचित रहे हैं। यह सरकार 53 दिन ही धान खरीद पाई है, 149 लाख मीट्रिक धान खरीदा है, सरकार ने अपने लक्ष्य से 25 लाख मिट्रिक टन धान कम खरीदा है। पिछले साल 9 लाख मीट्रिक टन धान कम खरीदा था।
उन्होंने आगे कहा कि 5 लाख से अधिक किसान एग्री स्टैक पोटल से पंजीयन नहीं करवा पाए, सरकार शुरू से ही इस कोशिश में लगी रही कि किसानों का कम से कम धान खरीदे। सरकार ने दुर्भावनापूर्वक किसानों का ध्यान नहीं खरीदा, पिछले साल की तुलना में 29 जिलों में धान की खरीदी कम की गई और सरकार जश्न मना रही है। यह किसानों के साथ भद्दा मजाक है सरकार को इस पर माफी मांगना चाहिए। दीपक बैज ने पूछा कि पूछा कि सरकार बताएं कि किसानों का धान कम क्यों खरीदा गया? कौन है इसका जिम्मेदार?

