तिल्दा नेवरा-इस समय चैत्र नवरात्रि चल रहे हैं. नवरात्रि के दौरान 9 दिन मां दुर्गा के अलग-अलग अवतारों की पूजा अर्चना की जाती है. अंतिम दिन माता दुर्गा की पूजा अर्चना करने के बाद, कन्या पूजन कर नवरात्रों का समापन किया जाता है. इस दौरान माता से सुख शांति की प्रार्थना की जाती है. इस बार दुर्गा अष्टमी को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है. ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान पंडित पवन शर्मा ने बताया कि कब है दुर्गा अष्टमी 2026.
आचर्य पवन शास्त्री रीवा वाले ने बताया कि नवरात्रों का समापन दुर्गा अष्टमी के दिन किया जाता है, तो कुछ जगहों पर नवरात्रों का समापन और कन्या पूजन दुर्गा नवमी के दिन किया जाता है. इस बार दुर्गा अष्टमी की शुरुआत हिंदू पंचांग के अनुसार 25 मार्च को दोपहर 1:50 पर होगी, जबकि इसका समापन 26 मार्च को सुबह 11:48 पर होगा. इसलिए दुर्गा अष्टमी को 26 मार्च के दिन मनाई जाएगी. कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 6:12 से लेकर 1 बजे तक उचित है.”
पवन शास्त्री ने बताया कि “कन्या पूजन दुर्गा अष्टमी के दिन किया जाता है. इस दिन पहले श्रद्धालु सुबह जल्दी स्नान करके मां दुर्गा की पूजा अर्चना करते हैं और उनके लिए प्रसाद तैयार करते हैं. जिनको माता की कढ़ाई कहा जाता है. प्रसाद में हलवा, पूरी और काले चने बनाए जाते हैं और उनका माता को भोग लगाया जाता है. उसके बाद कन्या पूजन किया जाता है.
“कन्या पूजन में सबसे पहले घर में प्रवेश होते ही कन्या के पैर धोकर उनको चंदन का तिलक लगाया जाता है. उसके बाद उनको माता की चुनरी पहनाई जाती है. फिर उन्हें प्रसाद में हलवा, पूरी और चने का भोजन दिया जाता है. उनको भोजन देने के बाद उपहार के तौर पर पैसे या कुछ भी गिफ्ट दे सकते हैं. जाते हुए उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया जाता है. क्योंकि वो उस वक्त मां दुर्गा का अवतार मानी जाती हैं.”
शास्त्री ने बताया कि अगर किसी को दुर्गा अष्टमी के दिन कन्या पूजन के दौरान कन्या ना मिल पाए, तो उनके सामने समस्या हो जाती है कि वो कितनी कन्याओं का पूजन करें. पंडित ने बताया कि सबसे अच्छा नौ कन्याओं का पूजन करना होता है. जिसमें आठ कन्या और एक लड़का होता है. उसका पूजन करें. अगर 9 कन्याएं नहीं मिलती, तो 7 या फिर 5 कन्याओं का पूजन भी कर सकते हैं. 9 वर्ष से कम आयु की कन्या का पूजन करना सबसे अच्छा माना जाता है. इस प्रकार से नवरात्रों में कन्या पूजन करके मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करें. जिसे घर में सुख समृद्धि आती है और लक्ष्मी का वास होता है.