छत्तीसगढ़

प्रेशर पॉलिटिक्स शुरू जबकि टिकट घोषित ही नहीं हुई

रायपुर। अजीबोगरीब बात है टिकट अभी घोषित हुई नहीं कि कई क्षेत्रों में भाजपा के नेता विरोध में उतर आए हैं लेकिन खुद खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं, मोहरों को आगे कर रहे हैं। रायपुर व पड़ोस की सीट को लेकर सिंधी व गुजराती समाज खुलकर विरोध में उतर आए हैं और भाजपा  के आला नेताओं को पत्र भेजकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। एक ओर कहते हैं जातिगत राजनीति नहीं होनी चाहिए दूसरी ओर खुद जाति के नाम पर टिकट की मांग रहे हैं। अभी तक तो समाज को प्रतिनिधित्व मिला,अब दिगर समाज का नाम आ गया तो विरोध क्यों,भाजपा के आला नेता भी अड़े हुए हैं टिकट अभी तय नहीं हैं संभावित हैं. जिसका आप विरोध कर रहे हैं लेकिन जीत योग्य चेहरे ही पार्टी मैदान में उतारेगी।

उधर बिरनपुर में जिस युवक की हत्या हुई थी उसके पिता को टिकट दिए जाने की खबर पर साजा में साहू और लोधी समाज के लोग विरोध में आ गए हैं वे कह रहे हैं कि जो व्यक्ति पार्टी का प्राथमिक सदस्य तक नहीं हैं उसे टिकट दे रहे हैं। वहीं धरसींवा में संभावित नाम अनुज शर्मा का पुतला दहन तक उतर आए हैं कुछ लोग। वैसे राजनीति में टिकट वितरण के दौरान इस प्रकार का विरोध व समर्थन तो लाजमी है। शायद यही कुछ भांप कर पार्टी ने एक सप्ताह के लिए नाम घोषणा टाल दिया है ऐसा लग रहा है।

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