Friday, March 13, 2026
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तिल्दा में आवारा कुत्तों का आतंक,:कुत्ता काटने के 25 मरीज रोज पहुंच रहे अस्पताल

तिल्दा नेवरा =शहर सहित आसपास गावो में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। एरिया में अकसर डॉग बाइट के मामले सामने आते रहते है।आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक को लेकर लोग भयभीत है। लोगो का कहना है शहर के कुछ जगहों से रात हो दिन अकेले बाहर निकलना मुश्किल है.आवारा कुत्तों का झुंड राहगीरों खासकर बच्चों और बुजुर्गों को निशाना बनाते  है। कुत्ते आदम खोर जंगली जानवरों की तरह लोगो पर हमलाकर नोचकर घायल कर रहे हैं।तिल्दा में प्रतिदिन 30 से 35 लोग कुत्तो के हमले से घायल होकर डाक्टरों के पास पहुंच रहे हैं .अकेले सरकारी अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 15 लोग इलाज के लिए पहुंच रहे है

आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक को लेकर लोग काफी भयभीत है.ऐसे ज्यादातर कुत्ते जहा मांस बेचा जाता है वह झुंड में देखे जाते है ।दीनदयाल चौक पर कुछ लोग मुर्गा कटकर बेचते है।सिमगा तिल्दा मार्ग स्थित बार के सामने मछली बाजार लगती है. और भी कई ऐसे स्थान और मांसहारी होटले है जहा  टुकड़ों को खाने के लिए कुत्ते यहां आते हैं. और रात दिन  मंडराते नजर आते है। लोगो का कहना है ऐसी जगहों से अकेले निकलना निकलना मुश्किल हो जाता है ।

आवारा कुत्तों के कारण बच्चो के माता-पिता इतने डरे हुए हैं कि उन्हें अपने बच्चों को स्कूल बस तक छोड़ने जाना पड़ता है और उनके बस में चढ़ने तक इंतजार करना पड़ता है। कई बार बच्चे कुत्ते को देखकर डर जाते है और ऐसे में कुत्ता दौड़ाकर बच्चो पर हमला कर देते है। कई ऐसी खाली जगह है जहा फेकी गई गंदगी में भी कुत्ते मंडराते नजर आते हैं.

दो दिन पहले  दोपहर के आसपास, वार्ड 3 में स्थानीय लोगों ने कुत्ते को सड़क किनारे एक बिल्ली पर हमला करते देखा. बाद में, इसने अगली गली में एक और कुत्ते को काट लिया. फिर भागते हुए एक बुजुर्ग पर बेरहमी से हमला कर उसे घायल कर दिया, जिससे उनके चेहरे और शरीर पर गंभीर चोटें आईं।

तिल्दा नेवरा नगर पालिका ने लाखो रुपए खर्च डॉग शेल्टर बनवाया है..वहा एक भी कुता आज तक नही लाया गया है, . कुत्तों को पकड़ने के लिए लोग कई बार गुहार लगा चुके है लेकिन फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। कुत्तो के बढ़ते आंतक को लेकर जब नगर पालिका अधिकारी अनिश ठाकुर से बात की गई उन्होंने बताया की सभी चौक चौराहो परहेल्पलाइन मोबाईल नबर लिखे बोर्ड लगाए गए है .जिसमे साफ लिखा गया है यदि किसी को कुता काटता या हमला करने दौडाता है उसकी सुचना तत्काल बोर्ड पर लिखे नबर पर तत्काल काल करने कहा गया है .उन्होंने बतया की किसी भी व्यक्ति के द्वरा कुत्ते के काटने की सूचना  नही दी गई है।

जबकि निजी अस्पतालों में छोड़ दिया जाए और सिर्फ सरकारी असपताल के आकड़ो पर नजर डाले तो तिल्दा में हर महीने 400 से 500 मरीज कुतो के काटने से घायल होकर इलाज के लिए आते है .यानि की लगभग 15 लोगो को प्रतिदिन आपना शिकार बनाते है.गरीब  और मध्यम परिवार के लोग इलाज  के लिए सरकारी असपताल आते है,यह उनका इलाज मुफ्त में होता है .सपन्न लोग महंगा इलाज कराने प्राइवेट डाक्टरों के पास पहुंचते है 

कुत्ता काटने पर लापरवाही मतलब मौत

BMO डॉ. आशीष सिन्हा ने बताया कि यदि किसी को कुत्ता, बिल्ली या बंदर ने काटा है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं. कुत्ता, बिल्ली या बंदर के काटने से बने घाव के आधार पर ही उपचार तय किया जाता है. घाव के आधार पर इसकी तीन कैटेगिरी हैं.यदि जानवर के हमले में सिर्फ लार लगी है और चमड़ा नहीं कटा है, तो यह पहली कैटेगिरी है. जानवर का नाखून या दांत से शरीर पर रगड़ या खरोंच हो जाए तो यह दूसरी कैटगरी है लेकिन  दांत मांस में गड़ा दिए या खून निकल रहा है, तो यह तीसरी कैटेगरी है.हर केटेगिरी में एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाना अनिवार्य है. मगर, तीसरी केटेगिरी में एआरवी के साथ ही सीरम लगवाना चाहिए. क्योंकि, सीरम में मौजूद एंटीबॉडी से शरीर में पहुंचा रेबीज वायरस तेजी से खत्म होता है. सीरम घाव वाली जगह पर ही लगाया जाता है.

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