केवट की अनन्य भक्ति देख छलके श्रद्धालुओं के आँसू,
तिल्दा-नेवरा। सोन चन्द वर्मा स्मृति फाउंडेशन द्वारा आयोजित श्री राम कथा’ के पांचवें दिन सुश्री देवी चंद्रकला ने
भगवान राम के वनगमन और केवट संवाद के प्रसंग भावपूर्ण वर्णन किया। दीदी ने कहा जब केवट ने प्रभु श्री राम की नाव में चढ़ाने से पहले उनके चरण पखारने की जिद की जो उनकी अनन्य भक्त और बुद्धिमत्ता को दर्शाता है। केवट के इस भावपूर्ण प्रेम को देखकर प्रभु श्री राम ने उन्हें भक्ति का वरदान दिया जिसे दीदी ने बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया।दीदी ने कहा कि यह प्रसंग रामायण के सबसे भावुक और शिक्षाप्रद प्रसंग में से एक माना जाता है इस प्रसंग के माध्यम से राम को सत्य प्रेम और करुणा का स्वरूप बताया गया है।

उन्होंने कहा—”जिस प्रभु के एक नाम लेने मात्र से मनुष्य भवसागर पार कर जाता है, उस परमात्मा के चरणों को धोने का सौभाग्य एक साधारण केवट को उसकी भक्ति के कारण मिला।” जब व्यासपीठ से यह प्रसंग सुनाया गया कि केवट ने प्रभु से मजदूरी लेने से इनकार कर दिया और कहा कि ‘प्रभु! हम एक ही जात के हैं, मैं नैया पार कराता हूँ और आप दुनिया को पार कराते हो’, तब पूरा पांडाल ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गूंज उठा । कथा के दौरान देवी चंद्रकला के भजनों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर झूमते नाचते रहे।

सुश्री देवी चंद्रकला ने कथा में बतया की अयोध्या में राजा दशरथ की इच्छानुसार राम के राज्याभिषेक की तैयारी होती है। राज्य की जनता बहुत खुश है लेकिन दासी मंथरा के समझाने पर कैकयी राजा दशरथ से राम के लिए वनवास और भरत के लिए सिंघासन मांगती है। पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए राम, लक्ष्मण और सीता सहित वन को चले जाते हैं। भगवान राम गंगा किनारे पहुंचते है जहां केवट से गंगा पार कराने को कहते हैं।” मांगी नाव न केवट आना, कहेंहु तुम्हार मरमु मैं जाना। केवट भगवान राम, लक्ष्मण और सीता के चरण धोकर उनको गंगा के पार पहुंचाते हैं।
वनवास के दौरान उन्होंने कई राक्षसों का संहार किया। इसी क्रम में शूर्पणखा की नाक काटी गई और रावण ने माता सीता का हरण किया।माता सीता की खोज करते हुए प्रभु राम और लक्ष्मण शबरी के आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने शबरी के बेर खाए। माता शबरी की सलाह पर वे आगे बढ़े और उनकी भेंट पवन पुत्र हनुमान जी से हुई।कथा के दौरान भजनों को सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
कथा में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री टंक राम वर्मा व्यासपीठ का विधि-विधान से पूजन किया और देवी चंद्रकला से आशीर्वाद लिया।इस दौरान मंत्री ने कहा— “आज के भौतिकवादी युग में श्री राम का चरित्र ही हमें सही मार्ग दिखा सकता है।इस भव्य आयोजन ने तिल्दा-नेवरा को अयोध्या जैसा स्वरूप दे दिया है।” उन्होंने इस धार्मिक अनुष्ठान के लिए आयोजकों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।कथा के समापन पर भव्य आरती का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों दीपकों से कथा स्थल जगमगा उठा ।कल की कथा में प्रभु राम के आगे के वनवास, चित्रकूट निवास और भरत मिलाप जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों की व्याख्या की जाएगी.

