आखिरी सांस तक निभाई साथ जीने-मरने की कसम
इंदर कोटवानी .
तिल्दा नेवरा- पति-पत्नी का साथ,जीने मरने का वादा, भले ही काल्पनिक लगता है। लेकिन तिल्दा नेवरा में शर्मा दंपति ने अपने जीवन से इसे सच साबित कर दिया। जिंदगी भर साथ निभाने वाले पति-पत्नी ने मरते समय भी एक दुसरे का साथ नहीं छोड़ा।और अंतिम पलों तक साथ रहकर उस वादे को भी बखूबी निभाया जिसे दोनों ने मंडप में विवाह के दौरान अग्नि कुंड के सात फेरे लेते हुए एक दुसरे से किया था। मरने के बाद दोनों की अर्थी एक साथ उठी और एक चीता पर एक साथ विधि विधान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। यह पल देख परिवार के साथ-साथ स्थानीय क्षेत्र वासियों की आंखों से भी आसु छलक पड़े।
आखिरी सांस तक निभाई साथ जीने-मरने की कसम
ये दिल को छू देने वाली साथ जीने-साथ मरने’ की सच्ची कहानी नेवरा निवासी राजकुमार शर्मा और उसकी पत्नी पदमादेवी शर्मा की है। जो अब इस दुनिया में नही है। लेकिन इस घटना ने न केवल परिवार को, बल्कि पूरे इलाके को भावुक कर दिया है.।
रविवार को शर्मा दंपति की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई थी, नेवरा निवासी राजकुमार शर्मा को हार्ट में तकलीफ हुई तो इलाज के लिए उसे एमएमआई नारायणा अस्पताल में इलाज के लिए भरती कराया गया था.।जहा 10 फरवरी को उसकी सफल बायपास सर्जरी हुई थी.।,अस्पताल में राजकुमार शर्मा की पत्नी पदमा देवी ,बड़ा बेटा और बहु जो पुणे में जाप करते है,वे भी अस्पताल में साथ थे .बीते सोमवार को डाक्टरों ने छुट्टी देने की बात कही थी.। लेकिन न जाने क्यू, राजकुमार सोमवार के पहले ही रविवार को घर जाने के लिए डाक्टरों से डिस्चार्ज करने की जिद्द कर कहता रहा वह पूरी तरह से ठीक हो चूका है।
बाद में उसे रविवार को डिस्चार्ज कर दिया गया। शाम को बेटे बहु ने किराए की कार में मा बाप को बिठाकर रवाना करने से पहले .बेटे ने कहा पापा हमारी चिंता बिलकुल ना करना और ,अपनी सेह्द का ख्याल रखना दावा टाइम से जरुर लेना,मै जल्द ही मिलने आउगा,फिर मा से कहा पापा का ख्याल रखना. इतना कहकर बेटा-बहु दोनों एयर पोर्ट के लिए रवाना हो गए.।
उधर जसे ही उनकी कार रायपुर की पुरानी विधान सभा पारकर नहरदा DPS के पास पहुंची धान से भरी ट्रक पलट उनकी कार के ऊपर पलट गई और नियति के क्रूर प्रहार ने राजकुमार और पद्मा को एक साथ हमेशा के लिए सुला दिया। जैसे ही हादसे की खबर मिली तो नेवरा में मातम पसर गया ,.दुसरे दिन पोस्ट मार्टम के बाद राजकुमार और पद्मादेवी के शव एक साथ नेवरा उनके निज निवास पर लाए गए, कुछ देर बाद नेग का कार्यक्रम हुआ। उसके बाद साथ निभाने पति-पत्नी की एक साथ अर्थी उठी तो परिजनों के साथ शवयात्रा में शामिल लोग फफक -फफक कर रोने लगे श्मशान घाट में दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर हुआ,।.यह दृश्य हर आंख को नम और हर दिल को भारी कर गया.
प्रेम की अनोखी मिसाल: आज के दौर में जहां रिश्ते कमजोर पड़ते दिखते हैं, वहां तिल्दा नेवरा के इस दंपति ने प्रेम की ऐसी मिसाल पेश की है जो लंबे समय तक याद रहेगी.लोग साथ जीने-साथ मरने’ की सच्ची कहानी बता रहे हैं. इस घटना ने न केवल परिवार को, बल्कि पूरे इलाके को भावुक कर दिया है.


