छत्तीसगढ़

रामभक्त जवाहर नागदेव की राम… राम… जय हनुमान..न उगल पा रहे. न निगल पा रहे. न मोदी का कोई हल पा रहे .कुछ और लिखने की इच्छा ही नहीं….

कुछ और लिखने की इच्छा ही नहीं हो रही है राम के नाम के बिना।
चारों ओर बस राम… राम… राम… राम… बेहद प्रफुल्लित है मन। मेरे प्रभु, मेरे पिता, मेरे जगत के पिता… मेरे राम… । मन करता है बस राममय हो जाएं। बाकी सब भूल जाएं। असीम आनंद हिलोरें मार रहा है।
दुर्भाग्यशाली हैं वे जो इस आनंद उत्सव में भी राजनीति कर कुर्सी ढूंढ रहे हैं। बदनसीब। न भगवान के रहे न जनता के। कहावत हैं ‘माया मिली न राम’, इनके लिये यहां यही लागू होता है। राम के भी न हो सके (दिखावे के लिये ही सही) न कुर्सी पा सके।  दिखावा तो खूब किया। परन्तु सत्ता से दूरी बढ़ती दिख रही है।

जनेउधारी शिवभक्त
शिवभक्त राम के विरोध में…

हमारे देश में शर्ट के उपर जनेउ धारण करने वाले शिवभक्त जो पत्रकारों को शिव को समझने और शिव को पढ़ने का मशवरा देते दिखे हैं, खुद को परम ज्ञानी और परम शिवभक्त जतलाने वाले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और अघोषित मालिक राहुल गांधी इस वक्त मौन क्यों हैं ? राममंदिर के महान उत्सव में आगे बढ़कर जाने की पहल क्यों नहीं करते ?
भगवान से तो भावुकता का रिश्ता होता है फिर इस महान समय में उनकी भावनाएं हिलोरें क्यों नहीं मार रही हैं ? बातचीत में तो ऐसा व्यक्त करते थे कि उन्होंने भगवान शिव की निकटता प्राप्त कर ली है और उनसे बड़ा कोई शिवभक्त नहीं।
इतना ही नहीं वे शिव को समझ चुके हैं ऐसा व्यक्त करते थे।
यदि मै गलत नहीं हूं तो राम शिव के भक्त हैं और शिव राम के भक्त। दोनों एक-दूसरे के लिये सम्मानीय हैं। ऐसे में राम विमुख होना इनकी पोल नहीं खोलता क्या ?
मै भी क्या अजीब प्रश्न कर रहा हूं। पोल तो उनकी प्रारम्भ से ही खुली हुई है। बेनकाब तो ये पहले से हो चुके हैं, जब कोर्ट में राम के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। जब राम के पूजन करने वालों और शोभायात्रा पर पत्थर मारने वालों के पक्ष में खड़े दिखते हैं।


कांग्रेस ने 22 जनवरी राम के दरबार अयोध्या में जाने से इन्कार कर अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार दी है। जो थोड़े-बहुत हिंदु कांग्रेस से जुड़े थे वे भी छिटकते नजर आ रहे हैं। पता नहीं कौन इनका सलाहकार है। लगता है कोई इन्हें ऐसी सलाहें देकर इनकी बैण्ड बजाने पर तुला है।

बचे-खुचे कांग्र्रेसी क्षुब्ध

जरा सोचिये। कोई मेरे पिता के अस्तित्व से इन्कार करे, मेरे पिता के बारे में असम्मानजनक भावना व्यक्त करे, मेरे पिता की जन्मस्थली को निकृष्ट कार्य के लिये उपयोग करने का घृणित मशवरा दे तो क्या मै उसे कभी माफ कर सकूंगा ? ये सब विपक्ष के गठबंधन के साथी कर रहे हैं। क्या आप उन्हें माफ कर सकेंगे ?

इन्होंने यही किया है। सिर्फ इसलिये की हिंदु अराध्य को पूजने से गैरहिंदु वोटबैंक नाराज न हो जाए।
हालांकि देश में जो माहौल है उससे ये साफ दिखता है कि कांग्रेस की कमजोर होती स्थिति देखकर गैरहिंदु कुछ तो ‘कोई और विकल्प न होने के कारण’ और कुछ मोदीजी की मंशा से सहमत होकर भाजपा के प्रति सहानुभूति रखने लगे हंै।
साफ तौर पर ये समझा जा सकता है कि मोदीजी के कार्यों से सारे देशवासियों को एक समान लाभ मिल रहा है। इसमें गैरहिंदु भी बराबर के भागीदार हैं।
ऐसे गैर भाजपाई शासक भी रहे हैं और हैं देश में जो कहते हैं कि ये लोन या ये सुविधा केवल  मुस्लिम वर्ग के लिये है। हिंदुओं के लिये नहीं।
लेकिन इस सरकार के पास पक्षपात् का ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं है। इसके लिये सारे नागरिक एक समान हैं। और ये बात मुस्लिम या अन्य गैर हिंदू अच्छी तरह समझने लगे हैं।

कांग्रेस मे विद्रोह के डर से
राम समर्थकों पर रोक नहीं

मुस्लिम नेता जो वास्तव में देश और कौम का भला चाहते हैं, केंद्र सरकार की सबके लिये समान शिक्षा, समान अधिकार और समान विकास की भावना से सहमत हैं। इसलिये मुस्लिम और ऐसे हिंदु जो भगवान के राम के प्रति कांग्रेस के अपमान भाव से दुखी हैं, कांग्रेस से विमुख होते दिख रहे हैं। कांग्रेस के नेता कांग्रेस से छिटक सकते हैं और इसका सीधा विपरीत असर वोटबैंक पड़ेगा।

हालांकि इस मामले में दोहरी नीति अपना रही है कांग्रेस। किसी भी कांग्रेसी पर राम का नाम लेने पर कोई कार्यवाही या नोटिस नहीं दे रही है। याने कांग्रेस शीर्ष ने राम से अपनी दूरी बना के रखी है लेकिन जुनियर्स को पूरी स्वतंत्रता है कि वे अपने आराध्य को पूज सकते हैं।
इस दोहरे रवैये से सत्ता से कांग्रेस की बढ़ती दूरी को कितना कम कर पाएगी कांग्रेस ये देखने लायक होगा।
वस्तुतः बड़ी अजीब स्थिति में फंस गयी है कांग्रेस… मोदी के किसी कदम का कोई हल नहीं है इसके पास…
जय रामजी की….

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