छत्तीसगढ़ के मस्जिदों में जुम्मे के दिन होने वाली तकरीर पर अब वक्फ बोर्ड की नजर रहेगी तकरीर के विषय को वक्त बोर्ड से अप्रूव कराए जाने के बाद ही मौलाना कर सकेंगे तकरीर,
रायपुर-वक्फ संशोधन बिल गुरुवार देर रात राज्यसभा में भी पास हो गया। इससे पहले बिल लोकसभा में पास हुआ था। छत्तीसगढ़ में वक्फ बिल को लेकर किसी भी तरह के टिप्पणी से मुतवल्लियों को रोका गया है।छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने मुतवल्लियों को हिदायत दी है कि नमाज के बाद होने वाली तकरीर में वक्फ संशोधन पर बातचीत नजाए वहीं CM साय ने विधेयक को मुस्लिमों के लिए फायदेमंद बताया है।

छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉक्टर सलीम राज ने मुतवल्लियों को निर्देश जारी कर कहा है कि वे बिल में बदलाव को लेकर नमाज के बाद तकरीर में उसके पक्ष या उसके विपक्ष में किसी भी तरह की चर्चा जमात में नहीं करेंगे।मस्जिद में नमाज के बाद सिर्फ धार्मिक विषय पर तकरीर हो सकती है। नवंबर 2023 में ही बोर्ड के अध्यक्ष डॉ सलीम राज ने मस्जिदों में किसी भी तरह के बाहरी मसले पर चर्चा पर रोक लगा दी थी, मुतवल्लियों को सिर्फ धार्मिक तकरीर करने की ही इजाजत है।
वक्फ बिल संसद में पास किया हुआ विधेयक बन चुका है। आसान शब्दों में समझिए कि एक तरह से यह कानून है, कानून का पालन सभी को करना है। इस वजह से मस्जिदों में यह निर्देश दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड की तरफ से मस्जिदों के इमाम साहब को यह स्वतंत्रता है कि वह धार्मिक विषयों पर तकरीर करें।धार्मिक विषय से अतिरिक्त कोई अन्य विषय पर बयान या तकरीर करने से पहले छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड की ओर से मुतवल्लियों के लिए बनाए गए वॉट्सएप ग्रुप या फिर चिट्ठी भेजकर अनुमति लेनी होगी। मूल रूप से इस निर्देश का मकसद समाज में वक्फ बिल को लेकर एक तरह की सोच कायम करना है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने क्या कहा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि देर रात तक टीवी पर बैठकर मैं भी सदन की कार्रवाई देखता रहा। अब विधेयक पास हो गया है यह देश और छत्तीसगढ़ के गरीब जरूरतमंद मुसलमान के लिए फायदेमंद साबित होगा। यह बिल भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का प्रमाण है। जिस प्रकार से इस बिल पर व्यापक चर्चा हुई है, वह हमारे संसदीय विमर्श की परिपक्वता को दर्शाता है।

