छत्तीसगढ़

नेवरा हाई स्कूल दशहरा मैदान में कावड़ शिव महापुराण कथा का दूसरा दिन ..पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा सुनने आस्था का सैलाब उमड़ापंडित प्रदीप मिश्रा की कथा सुनने आस्था का सैलाब उमड़ा

तिल्दा नेवरा नेवरा के युवा उद्योगपति घनश्याम अग्रवाल के द्वारा नेवरा हाई स्कूल दशहरा मैदान में चल रही पंडित प्रदीप मिश्रा की कावड़ शिव महापुराण कथा सुनने इन दिनों शहर में आस्था का सैलाब उमड रहा है..पुरे दिन रुक रुककर तेज बारिश होने के बावजूद भक्त परम पूज्य पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज के मुख से अमृत मय कावड़ शिव महापुराण कथा का रसपान करने भीगते हुए  पंडाल में पहुंचते रहे,,

श्रद्धालुओं को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए पंडित मिश्रा ने कहा कि धन्य है छत्तीसगढ़ के लोग जिनका शिव महापुराण के प्रति अटूट विश्वास है, अधिक मास सावन के महीने के बीच जल वृष्टि के बाद भी पहले दिन की कथा से दुगुने भक्त शिव की भक्ति करने पहुंचे हैं, मैं सभी भक्तों का नमन करता हूं.. और निवेदन भी करता हूं कि जल वृष्टि के चलते वे अपने साथ छाता, पॉलिथीन वाली पन्नी और एक जोड़ा कपड़ा झोले में भरकर साथ लेकर आए .क्यों कि अति जलवृष्टि के कारण जमीन गीली हो गई है. जमीन पर पॉलिथीन रखकर कथा का श्रवण करें. बारिश से बचने छाता लाएं ,और यदि कोई भक्त भीग जाता है तो वे कपड़े बदल लेवे, महाराज जी ने भक्तो से कहा कि हो सके तो वे घर मैं ही टीवी के माध्यम से कथा का श्रवण करें ।

पंडित मिश्रा जी ने कहा कि शंकर भगवान का चरित्र विश्वास का चरित्र है ..जिस दिन अगर शिवजी के प्रति भाव अथवा भरोसा जागृत ना हो सके तो आप शिव महापुराण में जाना .उसके बाद अगर विश्वास और भरोसा जागृत हो गया कि. तारेगा भी महादेव और मारेगा भी महादेव ..तो आपका कल्याण हो जाएगा ,|फिर महादेव आपको कभी डूबने नहीं देगा उस पर सच्चा विश्वास होगा तो वह हाथ पकड़ कर खींच कर बाहर कर देगा

बारिश भी नहीं रोक पाई भक्तों को शिव की भक्ति से

कथावाचक ने कहा कि हर व्यक्ति को किसी न किसी पर भरोसा रहता है एक नौकर कहता है कि  मेरा सेठ है. जब मेरे घर में विवाह या कोई फंक्शन का मौका आएगा तो मेरा सेठ मुझे पैसा दे देगा.. और मेरे बच्चों का विवाह निपट जाएगा| एक व्यक्ति को भरोसा रहता है कि मेरे पास सोने के गहने घर में रखे हुए हैं.. जरूरत पड़ने पर मैं इसे गिरवी रख कर अपने काम को निपटा लूंगा बच्चों का विवाह भी हो जाएगा।
लेकिन शिव महापुराण की कथा कहती है ..शिव जी को आपसे ना बिल पत्र चाहिए न चावल का दाना चाहिए.. शंकर भगवान को आपसे कुछ भी नहीं चाहिए. शिव जी तो कहते हैं मैं भी भगवान के नाम में डूबा रहता हूं,
तुम भी परमात्मा के नाम में डूबे रहो मैं तुम्हारा सब कार्य करकर चले जाऊंगा। तुम आश्रित हो जाओ और  भगवान के भरोसे जीना प्रारंभ कर दो । उन्होंने  कहा कि हम दुनिया के भरोसे पर जीते हैं. पर परमात्मा के भरोसे नहीं जी पाते .हम उसके आश्रित नहीं हो पाते. कभी कभी ऐसा भी होता है कि हमारा पुण्य भी पाप में बदल जाता है..

।कथा के बीच में कथा वाचक प्रदीप मिश्रा ने कुछ पत्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि कुछ माताओं ने उन्हें पत्र भेजा है उनमें से कुछ पत्रों को  मिश्रा जी ने भक्तों को पढ़कर सुनाया.. उनमे से एक भरोसे का बड़ा मार्मिक पत्र काटाभांजी उड़ीसा की रहने वाली मीना यादव के द्वारा भेजा गया था .| बुधवार की कथा में  मीना यादव स्वयं मौजूद भी थी ,पत्र में मीना ने महाराज जी को लिखा था कि मेरी बेटी को कैंसर हो गया था.. पूरा घर चिंतित था उनका इलाज रायपुर में कराया संजीवनी अस्पताल में.. कई दिनों तक इलाज हुआ लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा ,तब मुझे कुछ लोगों ने कहा कि दोपहर को टीवी में सीहोर वाले बाबा जी की कथा आती है, उसे सुने\ मैंने कथा सुनी जिसमें बाबा जी ने कथा में बताया गया कि  शिव पर भरोसा रखे,,  सभी समस्याओं का हल एक लोटा जलबताया .. दूसरे दिन से मैंने शिवजी पर एक लोटा जल चढ़ाना शुरू, किया मेरी बेटी के गले में कैंसर था वह न खा सकती थी न पी सकती थी, मैं जल चढ़ा कर जब उसे जल पिलाती तो वह उस जल को पी  जाती थी और कुछ दिन बाद ठीक हो गई, पत्र में उन्होंने महाराज जी को धन्यवाद देने के तिल्दा आने का भी उल्लेख किया था .. और मीणा वह स्वयं चलकर कथा में पहुंच गई . महाराज ने आवाज लगाकर जब मीना का नाम लिया तो मीना कथा स्थल पर भक्तों के बीच खड़ी हो गई और महाराज जी का हाथ जोड़कर अभिवादन करने लगी..

उन्होंने कहा यह शरीर किसका है,कई रोगों से ग्रसित होने के बाद भी हम समझते कि अपना है ,बड़ा रोग होने पर समझ लेना कि नदी जब उफान पर आती है तो तो खतरे के निशान तक पहुंच जाती है |खतरे के निशान तक अगर नदी पहुंचती है तो गांव के डूबने की आशा हो जाती है .इसीलिए नदी खतरे के निशान पर आए तो मकान को जल्दी खाली कर  गांव को खाली करवा दिया जाता है |उसी प्रकार चलते-चलते जब जीवन में रोग बढ़ते चले जाएं; बीमारियां और तकलीफ  बढ़ती चली जाएं तो समझ ले कि नदी अब खतरे के निशान तक पहुंच गई है. ऐसे समय में सबसे चतुरता का काम करना. मकान खाली कर देना, मकान खाली करने का मतलब अपने दिल से लोभ मोह त्रष्णा सबका त्याग कर देना, खाली मकान में शंकर जी को विराजमान कर देना, अपने हृदय में शिव को विराजमान कर देना ..।महाराज जी ने यहां बहुत ही सुंदर भजन…बड़ी दूर किनारा है; अस्ति भी पुरानी है; भोले बाबा सुन भी लो ये मेरी कहानी है। सुनकर भाव विभोर हो गाए ,उन्होंने कहा कौन समझेगा, कौन साथ देगा. खतरे के निशान के करीब नदी आ गई, गांव खाली करवाया जाता है. मुनादी करा दी जाती है ,गांव खाली कराओ गांव के घरों में पानी भर जाएगा, खतरे के निशान पहुंच गई ,इसी तरह हमारे शरीर भी रोगों से भर जाए  तो डॉक्टर भी कह देते है  कि अब हमारे हाथ में कुछ भी नहीं है…। इसीलिए जपते रहो श्री राम. जपते रहो ओम नमः सच्चे दिल से शिव को याद करो ॐ नमह शिवाय.का जप  कर  एक लोटा जल चढाए सभी समस्याओं का हल अपने आप हो जाएगा .. ..

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