Thursday, January 15, 2026
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छतौद में भागवत कथा: शिव-पार्वती विवाह प्रसंग सुनाया:कथा वाचक गौरव जोशी ने श्रद्धालुओं को किया भाव विभोर

श्री भगवत कथा में गूंजे ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे: शिव-पार्वती विवाह की झांकी में झूमा पूरा गाव

​तिल्दा-नेवरा- समीपस्थ ग्राम छतौद में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।बिलासपुर से पधारे कथा व्यास महाराज गौरव जोशी ने  शिव-पार्वती विवाह की पावन कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।कथा में महाराज श्री ने माता सती के चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार अपने पिता दक्ष के यज्ञ में पति महादेव का अपमान सहन न कर पाने पर माता सती ने योगाग्नि में स्वयं को भस्म कर लिया। इसके पश्चात भगवान शिव के क्रोध और रौद्र रूप का वर्णन सुन श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। शोक के वातावरण के बाद कथा ने मंगलमय मोड़ लिया और शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग शुरू हुआ।

महाराज गौरव जोशी ने बताया कि भगवान शिव का विवाह केवल एक दिव्य उत्सव नहीं,बल्कि त्याग, तपस्या और प्रेम का अद्वितीय उदाहरण है।कथा के दौरान जब विवाह प्रसंग आया,तो पंडाल “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।व्यास जी ने कथा को विस्तार देते हुए कहा कि माता पार्वती ने महादेव को अपने पति के रूप में मान लिया था और उन्हीं से विवाह करना चाहती थीं। हालांकि,शिव को पति के रूप में पाना आसान नहीं था।पार्वती जी ने हार नहीं मानी और वर्षों तक कठोर तपस्या की।

उनकी तपस्या इतनी तीव्र थी कि तीनों लोकों में हाहाकार मच गया और विशाल पर्वत भी डगमगाने लगे।तब देवतागण महादेव के पास पहुंचे और इस समस्या का हल निकालने की विनती की।शिवजी ने पार्वती को दर्शन देकर उनसे किसी राजकुमार से विवाह करने को कहा।पार्वती जी ने इससे इनकार कर दिया और बताया कि वह मन ही मन महादेव को अपना पति मान चुकी हैं।इस पर शिवजी भी विवाह के लिए मान गए।पार्वती जी से विवाह रचाने के लिए शिवजी बारातियों के साथ पहुंचे।

उनकी बारात ऐसी थी कि सभी देखकर चौंक गए,क्योंकि इसमें भूत-प्रेत भी शामिल थे।दूल्हा बने शिवजी ने भस्म से श्रृंगार किया था और हड्डियों की माला पहनी थी। भूत-प्रेतों की बारात और शिव का यह रूप देखकर सभी दंग रह गए।

माता पार्वती की मां मैनावती ने इस विवाह से साफ इनकार कर दिया।तब पार्वती जी ने शिवजी से प्रार्थना की कि वे विवाह के रीति-रिवाजों को ध्यान में रखते हुए तैयार हो जाएं। इसके बाद देवताओं ने शिवजी का श्रृंगार किया।शिवजी का सुंदर दिव्य रूप देखकर सभी प्रसन्न हुए। अंततः माता पार्वती और शिवजी का विवाह संपन्न हुआ।

शिव बारात में झूमा वर्मा परिवार:
कथा स्थल पर शिव-पार्वती विवाह की सजीव और मनमोहक झांकी सजाई गई थी। जैसे ही शिव जी की बारात का प्रसंग आया, पूरा पंडाल उत्सव में डूब गया। इस दौरान निधि और उनके सभी भाई-बहनों सहित पूरे वर्मा परिवार ने बाराती बनकर भगवान के भजनों पर जमकर नृत्य किया। परिवार के सदस्यों और ग्रामवासियों का उत्साह देखते ही बनता था। महिलाओं ने मंगल गीत गाए और एक-दूसरे को विवाह की बधाई दी। कथा मे मुख्य यजमान चंद्रशेखर वर्मा  एवं भारती वर्मा एवं कविता अरविंद वर्मा (पूर्व सरपंच ग्राम छतौद) है कथा 19 जनवरी तक आयोजित है

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