छत्तीसगढ़

tilda,सुनो सुनो सुनो..तोरन वर्मा कि पौनी पसारी बंद कर दी गई है..गांव का कोई भी व्यक्ति इस परिवार से किसी प्रकार की लेनदेन नहीं करेगा

तिल्दा के सिनोधा गांव में एक परिवार के बहिष्कृत करने की कहानी’..गांव में रहकर भी अकेला पड़ा परिवार

तिल्दा नेवरा – सुनो सुनो सुनो.. सभी ग्राम वासियों को सूचित किया जाता है कि.पूजा किराना के संचालक तोरन वर्मा कि पौनी पसारी बंद कर दी गई है.. इसीलिए गांव का कोई भी व्यक्ति तोरण लाल के परिवार से किसी प्रकार की लेनदेन नहीं करेगा ना ही उनसे कोई बात करेगा.. उनके दुकान से भी कोई व्यक्ति खरीदारी नहीं करेगा और ना ही उनकी खेत में गांव का कोई मजदूर काम करने जाएगा..|यह मुनादी तिल्दा शहर से लगे सिनोधा गांव के कोतवाल के द्वार सरपंच के आदेश पर की गई,

इस मुनादी के बाद गांव का कोई भी व्यक्ति तोरनलाल से ना तो बात कर रहा है ,और ना ही कोई लेन-देन कर रहा है,, तोरन लाल के परिवार को यह सजा इसीलिए दी गई है कि उसने दंड की बकाया राशि सरपंच के पास जमा नहीं कराई है.।सरपंच और ग्रामीणों के लिए गए निर्णय के बाद जारीकिए गाए  इस फरमान से पीड़ित परिवार सकते में आ गया है, परिवार के सदस्यों ने तिल्दा पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है। 2 दिन गुजर जाने के बाद भी मामले की जांच करने पुलिस गांव में नहीं पहुंची है..।पूरनलाल के बताए मुताबिक 2021 में कोरोना का काल के दौरान उनकी बहू गर्भवती हुई थी, डिलीवरी के दौरान पता चला कि वह पॉजिटिव है, इस जानकारी के बाद सरपंच ने तोरनलाल को बुलाकर तत्काल दुकान बंद कर घर के अंदर क्वारंटाइन होने की बात कही थी..इसी बात को लेकर सरपंच से उसका विवाद विवाद हो गया, जिसके बाद सरपंच ने पुलिस थाने में उनके दो बेटो के खिलाफ अभद्र व्यवहार करने की शिकायत दर्ज कराई थी.. |

सरपंच कि शिकायत पर तत्कालीन थाना प्रभारी शरद चंद्रा ने तोरन लाल  के दोनों बेटों को थाने बुलाकर पूरा दिन बिठाए रखा.. तोरनलाल  ने बताया कि जब टीआई को 20000 दिए तब मेरे बेटो को छोड़ा गया…।कुछ दिनों के बाद तोरन को बैठक में बुलाकर कोरोना पॉजिटिव होने के बाद भी दुकान खोलने का आरोप लगाते हुए दंडित करार देते हुए 25 हजार रुपए दंड देने के लिए आदेश दिया गया. जिसके बाद तोरन ने 5 हजार रुपए तत्काल जमा करा दिए ,लेकिन बचे 20 हजार रुपए उन्होंने जमा नहीं कराए थे..। इस संदर्भ में तोरनलाल को दंड की बकाया  राशि तत्काल जमा कराने की बात कही गई थी बावजूद उन्होंने राशि जमा नहीं की इसके बाद 3 जून को शीतला मंदिर में एक बैठक आयोजित कर तोरन लाल और उसके परिवार को बहिष्कृत करने के साथ पौनी पसारी बंद करने का निर्णय लिया गया और उसी दिन शाम को गांव के कोतवाल से पौनी पसारी बंद कर दिए जाने की मुनादी करा दी गई।

पंचायत के निर्णय के बाद से पूरन लाल का परिवार पूरी तरह से अलग पड़ गया है गांव का कोई भी व्यक्ति न तो उनसे कोई बात कर रहा है ना ही किसी प्रकार की कोई लेनदेन कर रहा है ..। उधर तोरण लाल ने इस मामले की शिकायत तिल्दा थाना में दर्ज करा कर उचित कार्यवाही की मांग करते हुए न्याय दिलाने की बात कही है…। पुलिस मामले की जांच कर रही है

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