वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…
छत्तीसगढ़ मे यदि गहन जांच की जाए तो पता चलेगा कि सरकार के बजट से अधिक काला धन अपने अधिकारियों के पास है। हर काम में अधिकारियों का हिस्सा रहता है ये एक ओपन सीक्रेट है।
बिना कमीशन किसी भी काम का कोई भी बिल पास नहीं होता। सरकार के पास जितना धन होता है उसका एक बड़ा हिस्सा अधिकारियों, ठेकेदारो और सप्लायर्स के पास जाना तय है। पूरा सिस्टम ही ऐसा है।
सरकारी नौकरी की चाहत ही इसलिये होती है क्योंकि प्राईवेट नौकरी में तो केवल तनख्वाह मिलती है लेकिन सरकारी नौकरी में तनख्वाह के साथ कमीशन भी। और ये कमीशन तनख्वाह से कई गुना ज्यादा होती है।
लेकिन खुशी की बात ये है कि पिछले दस सालों में काले धन वालों का चैन खतम हो गया है। केन्द्र सरकार ने ऐसा टाईट किया है कि रातों की नींद खराब हो गयी है। जो अभी खा-पी रहे हैं वे भी और जो पहले खाकर डकार चुके हैं वे भी भयभीत से हैं। तलवार लगातार लटक रही है।
लेकिन खुशी की बात ये है कि पिछले दस सालों में काले धन वालों का चैन खतम हो गया है। केन्द्र सरकार ने ऐसा टाईट किया है कि रातों की नींद खराब हो गयी है। जो अभी खा-पी रहे हैं वे भी और जो पहले खाकर डकार चुके हैं वे भी भयभीत से हैं। तलवार लगातार लटक रही है।
संपत्ति की जानकारी देने में
हिचकिचाते अधिकारी
पिछले दिनों केंद्र सरकार ने सभी आईपीएस अधिकारियों से उनकी संपत्ति की घोषणा करने के निर्देश दिये हैं।
छत्तीसगढ़ में भी बार-बार अधिकारियों से उनकी संपत्ति की जानकारी मांगे जाने की घोषणा की जाती है लेकिन इसमें सफलता नहीं मिलती।
कलेक्टर से सूचना के अधिकार के तहत् किसी अधिकारी की संपत्ति की जानकारी मांगिये तो वो अधिकारी ‘निजी जानकारी देने को सहमत नहीं बोलकर’ आपत्ति करता है। जब तनख्वाह सरकार से मिल रही है जो पब्लिक से टैक्स के रूप् में वसूली गयी है तो फिर निजी कैसे हो सकती है।
तो इस आधार पर जानकारी देने से इन्कार क्यों ? जानकारी देने में आपत्ति क्यों ? इसका मतलब आप अपने माल की जानकारी छिपाना चाहते हो।
साफ जाहिर है कि अधिकारी ने कुछ न कुछ धांधली की है इसलिये जानकारी देने से डरता है।
तो इस आधार पर जानकारी देने से इन्कार क्यों ? जानकारी देने में आपत्ति क्यों ? इसका मतलब आप अपने माल की जानकारी छिपाना चाहते हो।
साफ जाहिर है कि अधिकारी ने कुछ न कुछ धांधली की है इसलिये जानकारी देने से डरता है।
लगभग पांच साल पहले रेन्ट कंट्रोल अथाॅरिटी यानि भाड़ा नियंत्रक अधिकारी से उनकी संपत्ति की जानकारी मांगी गयी, उनके सर्विस रिकाॅर्ड की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत् कलेक्टर से मांगी गयी तो भाड़ा नियंत्रक अधिकारी नें इन्कार कर दिया, जिस आधार पर कलेक्टर ने आवेदन खारिज कर दिया।
गौरतलब है कि कोई अधिकारी अपनी ही संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक क्यों करना चाहेगा ? इस आधार पर अधिकारी को छूट देने का क्या मतलब है ?
गौरतलब है कि कोई अधिकारी अपनी ही संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक क्यों करना चाहेगा ? इस आधार पर अधिकारी को छूट देने का क्या मतलब है ?
क्या शासन बेईमान अधिकारियों को सुरक्षा कवच देना चाहता है ?
बहरहाल दिसंबर के प्रथम सप्ताह में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश के समस्त आईपीएस अधिकारियों यानि इण्डियन पुलिस सर्विस के अधिकारियों से 31 जनवरी 2024 तक संपत्ति की जानकारी अनिवार्य रूप से मांगी है।
बहरहाल दिसंबर के प्रथम सप्ताह में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश के समस्त आईपीएस अधिकारियों यानि इण्डियन पुलिस सर्विस के अधिकारियों से 31 जनवरी 2024 तक संपत्ति की जानकारी अनिवार्य रूप से मांगी है।
निश्चित रूप से अब ये जानकारी सार्वजनिक मंच पर रखी जाएगी। जो जानकारी सार्वजनिक की जाएगी उसके अलावा कोई होगी तो उस पर अधिकारी दावा नही कर पाएगा और सरकार राजसात कर लेगी।
बस ये देखना है कि अधिकारी जानकारी देते हैं या फिर कोई हील-हवाला करके निकल लेते हैं। वैसे सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों के रूख से ये लगता नहीं कि इस बार कोई संपत्ति छिपा पाएगा।
बस ये देखना है कि अधिकारी जानकारी देते हैं या फिर कोई हील-हवाला करके निकल लेते हैं। वैसे सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों के रूख से ये लगता नहीं कि इस बार कोई संपत्ति छिपा पाएगा।

