रायपुर-छत्तीसगढ़ शराब घोटाले मामले में जेल में बंद पूर्व मंत्री और छत्तीसगढ़ के छह बार के विधायक कवासी लखमा को इलाज के लिए अंबेडकर अस्पताल में भर्ती किया गया है, यहां उनकी आंखों का इलाज किया जाएगा। लखमा का इलाज सुरक्षित तरीके से हो, इसके लिए शासन ने उनके साथ पुलिस बल की व्यवस्था की है।
कांग्रेस ने जेल में बंद पूर्व मंत्री कवासी लखमा के इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। पूर्व विधायक विकास उपाध्याय और कुलदीप जुनेजा ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम से मुलाकात की थी और कवासी लखमा को तुरंत इलाज मुहैया कराने की मांग भी की थी। विकास उपाध्याय ने बताया कि वरिष्ठ विधायक कवासी लखमा को इलाज के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सुरक्षा का पूरा इंतजाम किया गया है।
कांग्रेस का कहना है कि उनकी आंखों की समस्या का इलाज जेल में संभव नहीं है। रायपुर सेंट्रल जेल के अस्पताल ने उन्हें बाहर रेफर किया है, लेकिन उन्हें अभी तक बाहर इलाज की अनुमति नहीं मिली है।
कांग्रेस का कहना है कि वे लगातार जेल प्रशासन से यह मांग कर रहे हैं, लेकिन जेल या जिला प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। वे कहते हैं कि कवासी लखमा वरिष्ठ मंत्री और 6 बार के विधायक रहे हैं, फिर भी उनके इलाज में लापरवाही की जा रही है और सरकार पक्षपातपूर्ण व्यवहार कर रही है।बता दें कि पूर्व मंत्री कवासी लखमा को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। फिलहाल वो रायपुर के सेंट्रल जेल में बंद हैं।
ED का आरोप है कि पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक कवासी लखमा सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे। लखमा के निर्देश पर ही सिंडिकेट काम करता था। इनसे शराब सिंडिकेट को मदद मिलती थी। वहीं, शराब नीति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।कवासी लखमा के इशारे पर छत्तीसगढ़ में FL-10 लाइसेंस की शुरुआत हुई। ED का दावा है कि लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया।
ED के वकील सौरभ पांडेय ने कोर्ट में बताया था कि 3 साल शराब घोटाला चला। लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे। इस दौरान 36 महीने में लखमा को 72 करोड़ रुपए मिले। ये राशि उनके बेटे हरीश कवासी के घर के निर्माण और कांग्रेस भवन सुकमा के निर्माण में लगे।ED ने कहा था कि छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। शराब सिंडिकेट के लोगों की जेबों में 2,100 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई भरी गई। नेता, कारोबारी और अधिकारियों ने जमकर अवैध कमाई की।

