रायपुर: रायपुर: छत्तीसगढ़ में साय कैबिनेट ने आत्मसमर्पित नक्सलियों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। डिप्टी सीएम अरुण साव ने इस संबंध में जानकारी दी। जानकारी के अनुसार आत्मसमर्पित नक्सलियों के खिलाफ चल रहे केस समाप्त किए जाएंगे। डिप्टी सीएम अरुण साव ने बताया कि इसके लिए जिला स्तर पर समिति गठित की जाएगी जबकि प्रदेश स्तर पर मंत्रिमंडलीय उपसमिति अंतिम फैसला लेगी।

मंत्रिपरिषद ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के विरुद्ध दर्ज प्रकरणों की समीक्षा एवं परीक्षण के लिए, जिन्हें न्यायालय से वापस लिया जाना है, मंत्रिपरिषद उप समिति के गठन को स्वीकृति दी है। यह समिति परीक्षण उपरांत प्रकरणों को मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत करेगी। यह निर्णय छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 के प्रावधानों के अनुरूप है, जिसके अंतर्गत आत्मसमर्पित नक्सलियों के अच्छे आचरण तथा नक्सलवाद उन्मूलन में दिए गए योगदान को ध्यान में रखकर उनके विरुद्ध दर्ज प्रकरणों के निराकरण पर विचार का प्रावधान है।
बैठक की प्रमुख जानकारी प्रदेश के डिप्टी सीएम अरुण साव ने मीडिया को दी। कैबिनेट ने इस बैठक में 14 अधिनियमों में संशोधन हेतु छत्तीसगढ़ जन विश्वास प्रावधानों का संशोधन द्वितीय विधेयक, 2025 के प्रारूप को अनुमोदित किया गया । इस कदम का उद्देश्य राज्य के विभिन्न कानूनों को समयानुकूल और नागरिकों के अनुकूल बनाना बताया गया।बैठक में सबसे प्रमुख नक्सल वाद खत्म किया जाना है,
कई अधिनियमों में उल्लंघन पर जुर्माना या कारावास के प्रावधान होने से न्यायिक प्रक्रिया लंबी हो जाती थी, जिससे आम नागरिक और व्यवसाय दोनों प्रभावित होते थे। ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस और ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देने के लिए इन प्रावधानों का सरलीकरण आवश्यक था। इससे पहले, राज्य सरकार ने 8 अधिनियमों के 163 प्रावधानों में संशोधन करते हुए छत्तीसगढ़ जन विश्वास प्रावधानों में संशोधन अधिनियम, 2025 अधिसूचित किया था। अब कैबिनेट ने 11 विभागों के 14 अधिनियमों के 116 प्रावधानों को और सरल और प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत छोटे उल्लंघनों के लिए प्रशासकीय शास्ति का प्रावधान रखा गया है, जिससे मामलों का त्वरित निपटारा होगा और न्यायालयों का बोझ कम होगा।
इस विधेयक से न केवल नागरिकों को तेजी से राहत मिलेगी, बल्कि कई अधिनियमों में लंबे समय से अपरिवर्तित दंड राशि के कारण होने वाली कार्यवाही की बाधा भी दूर होगी। इसके साथ ही सुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसने जन विश्वास विधेयक का द्वितीय संस्करण लाकर कानूनी प्रक्रिया को और अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने का प्रयास किया है। कैबिनेट के इन निर्णयों से राज्य में कानूनी प्रक्रियाओं में तेजी आएगी और नागरिकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

