इंदर कोटवानी
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट जारी करके जहां प्रदेश भाजपा में खलबली मचा दी है।अब छत्तीसगढ़ में भी इसी फार्मूले के तहत टिकट दिए जाने की कयास लगाई जा रही है। राजनीतिक दल इसके अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं. बीजेपी द्वारा दूसरी लिस्ट में जिन नामो की घोषणा की गई है, उससे लगभग यह साफ हो गया है कि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के चेहरे पर चुनाव नहीं लड़ा जाएगा.और यही फॉर्मूला बीजेपी के द्वारा छत्तीसगढ़ में भी आजमाया जाने वाला है..यदि ऐसा हुआ तो छत्तीसगढ़ में भी भाजपा मुख्यमंत्री के चेहरे पर चुनाव लड़ने के बजाय सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी .बीजेपी के वरिष्ठ सूत्र बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में भाजपा की जो स्थिति है, उसके चलते विधान सभा चुनाव में फतह हासिल करने में काफी मशक्कत करनी होगी.. ऐसे में किसी के नाम पर चुनाव लड़ना भाजपा को मुश्किल में डाल सकता है. ऐसी स्थिति में माना जा रहा है कि सामूहिक नेतृत्व वाला फॉर्मूला पार्टी को बड़ी जीत दिला सकता है..?
पांच राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनाव में छत्तीसगढ़ भी उन राज्यों में प्रमुख है.छत्तीसगढ़ में कांग्रेस काफी मजबूत स्थिति में है,यहाँ कांग्रेस के खिलाफ बीजेपी चुनावी मैदान में है. ऐसा पहली बार है जब बीजेपी की तरफ से चुनाव के पहले मुख्यमंत्री के चेहरे का ऐलान नहीं किया गया है,सूत्रों कि माने तो भाजपा ने किसी चेहरे को आगे कर चुनाव नही लड़ने का प्लान कर लिया है .छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहली बार हुए विधानसभा के चुनाव में भाजपा ने डॉ रमन सिंह के नेतृत्व में सरकार बनाई थी.उसके बाद भाजपा ने लगातार दो बार और सरकार बनाई.और सरकार को चलाने की जिम्मेदारी भी डॉ रमन सिंह को ही दी गई .इतना ही नही 2018 में जब चौथी बार छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव हुआ तब भी डॉ रमन सिंह के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा गया..लेकिन बीजेपी रमन सिंह को आगे कर 2018 के चुनाव में चौका लगाने में नाकामयाब रही और सरकार को बड़ी हार का सामना करना पड़ा.
आगामी होने वाले विधान सभा चुनाव में भाजपा सरकार में लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रहे डा.रमन सिह, पूर्व गृह मंत्री राम विचार नेताम और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण साव की प्रमुख चेहरे की दावेदारी यहां सबसे मजबूत मानी जा रही थी, बावजूद बीजेपी फिलहाल मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में किसी को प्रोजेक्ट करने नहीं जा रही.पार्टी ने सामूहिक नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया है.
बीजेपी के वरिष्ठ सूत्र बताते हैं कि सामूहिक नेतृत्व पार्टी को बड़ी जीत दिला सकती है.शायद यही वजह है कि पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव कर हिंदी पट्टी के तीन प्रमुख राज्यों में एक छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के चेहरे पर चुनाव लड़ने के बजाय सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने की तैयारी में है.यहां पर ये बताना ज़रूरी है कि मुख्यमंत्री का चेहरा विधानसभा चुनावों के बाद विधायक ही तय करेंगे.
मध्य प्रदेश में भाजपा ने दूसरी लिस्ट जारी कर दी है,उसके बाद से छत्तीसगढ़ में भी दूसरी लिस्ट की घोषणा को लेकर हलचल तेज हो गई है.. सूत्रों की माने तो मध्य प्रदेश की तरह छत्तीसगढ़ में भी कुछ सांसदों के साथ राज्य के कोटे से केंद्र में बनाई गई एकमात्र मंत्री रेणुका सिंह को भी भाजपा विधानसभा चुनाव लड़ाने के लिए मन स्थिति बना चुकी है..2019 के आम चुनाव में बीजेपी ने प्रदेश की सभी 11 लोकसभा सीटों पर नए प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था, डॉ रमन सिंह की पहली और दूसरी बार बनी सरकार में 2003 और 2008 में प्रेमनगर विधानसभा से विधायक चुनी गईं। रेणुका सिंह को 2013 में विधान सभा में टिकिट से वंचित कर दिया गया था | लेकिन 2019 में हुए लोकसभा का चुनाव रेणुका सिंह को लड़ाया गया और वह सांसद बन गई, और वर्तमान में मोदी सरकार में मंत्री है..
बताया तो यह भी जा रहा है कि भाजपा ज्यादातर नए और युवा चेहरे को टिकट देने का पूरी तरह से मन बना चुकी है और लगभग उनके नाम भी तय कर लिए गए हैं..ऐसा हुआ तो भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओ को भी टिकट से वंचित होना पड़ सकता है. इसमें भाजपा के हैवीवेट नेता लगातार विधानसभा का चुनाव जीतने वाले बृजमोहन अग्रवाल, राजेश मूणत के साथ मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के अलावा कई बड़े नेता केंद्रीय नेतृत्व की हिट लिस्ट में है,
हालांकि इन नेताओं को चुनाव से दूर रखकर किनारे करना भाजपा के लिए महंगा होने के साथ काफी जोखिम भरा कदम साबित हो सकता है..लेकिन यह भी कहा जा रहा है कि इन हैवीवेट नेताओं को लोकसभा का चुनाव लडाया जाएगा और केंद्र में भाजपा की सरकार बनने पर इनको मंत्री बनाकर सभी का सम्मान बरकरार रखा जाएगा. भाजपा चुनावो में नए -नए फार्मूले अजमाने के लिए इस तरह के जोखिम उठाते रही है.भाजपा इसके पहले भी इस तरह का नुस्खा गुजरात और हिमाचल प्रदेश में आजमा चुकी है ,चुनाव से पहले विजय रुपाणी और नितिन पटेल के साथ हुआ था, जैसे हिमाचल प्रदेश चुनाव से पहले प्रेम कुमार धूमल के साथ हुआ ..
कहा तो यह जा रहा है कि प्रदेश के कुछ बड़े नेताओं को भाजपा साइड लाइन कर रही है.भाजपा ने इसकी शुरुआत मध्यप्रदेश से की है..मंत्रियों और सांसदों को मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव की टिकट देकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं..I अब देखना यह है कि शिवराज सिंह की तरह क्या छत्तीसगढ़ में डॉ.रमन सिंह सहित और नेताओ को घेरने की तैयारी हो चुकी है.. इस बड़ी तैयारी से अभी पर्दा उठना बाकी है |

