दुर्ग: छत्तीसगढ़ से मानव तस्करी की समस्या का अंत होता नहीं दिख रहा है. इस बार दुर्ग से दो लड़कियों को रोहतास ले जाया गया. रोहतास में लड़कियों से कार्य कराया जा रहा था. जिन दो लड़कियों को रोहतास में रेस्कूय किया गया है. उनके पिता का पहले निधन हो चुका है और परिवार में सिर्फ मां है. घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. इस वजह से लड़कियां परिवार के भरन पोषण के लिए नौकरी की तलाश कर रही थी. इस दौरान रोजगार की तलाश में वे मानव तस्करी की शिकार हो गई और रोहतास चली गई. यहां उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. लड़कियों पर मां और दो भाइयों की जिम्मेदारी थी. इसलिए वह मानव तस्करों कें चंगुल में आ गई.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रोहतास पुलिस और बाल कल्याण समिति ने तीन दिन पहले करीब 40 से ज्यादा लड़कियों को रोहतास में बचाया. इनमें राजनांदगांव और दुर्ग की लड़कियां भी शामिल हैं. दुर्ग के थनौद गांव की दो लड़कियों का रेस्क्यू किया गया. छत्तीसगढ़ से राजनांदगांव और दुर्ग की टीम गई है. दुर्ग की दोनों लड़कियों को पुलिस की टीम दुर्ग लेकर आएगी.
इस घटना के बाद दुर्ग पुलिस तुरंत हरकत में आई. एडिशनल एसपी सुखनंदन राठौर ने बताया कि बिहार के रोहतास जिले में कई बच्चियों को रिकवर किया गया है. जैसे ही हमें इसकी सूचना मिली. उसके बाद राज्य की पुलिस के साथ दुर्ग पुलिस की टीम भी रोहतास गई है. दुर्ग पुलिस की टीम वहां पहुंच चुकी है और वैधानिक कार्रवाई की जा रही है.
सभी लड़के और लड़कियों का मेडिकल परीक्षण किया गया. उसके बाद उनका बयान दर्ज कर उन्हें छत्तीसगढ़ लाया जाएगा. दुर्ग से तीन अधिकारियों की टीम इस मिशन के लिए भेजी गई है. दुर्ग के चार बच्चों का पता चला था. उनके परिवार से संपर्क किया गया है-सुखनंदन राठौर, एडिशनल एसपी, दुर्ग
हमें पीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया है. हमारे घर की स्थितित अच्छी नहीं है. रोजगार की तलाश में बच्चियां दुर्ग से रोहतास गई थी. हमें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है-
दुर्ग पुलिस का कहना है कि लड़कियों का मेडिकल परीक्षण करवाया जाएगा. उसके बाद उनके बयान दर्ज किए जाएंगे. इसके बाद उनके परिवारों को सुपुर्द किया जाएगा. लड़कियों की काउंसलिंग कराने की भी व्यवस्था की जा रही है.

