कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने भगवान शिव के प्रति इतने प्रेम के लिए सभी को धन्यवाद दिया..।
तिल्दा नेवरा-उद्योगपति घनश्याम अग्रवाल के द्वारा अपने माता पिता की स्मृति में आयोजित कांवड़ शिव महापुराण कथा के समापन पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिव के प्रति इतने प्रेम के लिए धन्यवाद दिया
नेवरा हाई स्कूल दशहरा मैदान में चल रही कावड़ शिवा महापुराण कथा के समापन दिवस पर कथा का श्रवण करने शिव भक्तों की ऐसी भीड़ उमड़ी की कथा शुरू होने के 5 घंटे पहले से ही 3 लाख फिट में बना पंडाल शिव भक्तों की भीड़ से भरकर समुद्र बन चुका था, जहां भक्ति और आस्था की लहरें हिलोरे लेने लगी थी..l कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने भगवान शिव के प्रति इतने प्रेम के लिए सभी को धन्यवाद दिया..।

कथा का शुभारंभ करते हुए कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने सबसे पहले श्रवण के अधिक मास के सोमवार की सभी भक्तों को बधाई देते हुए सभी भक्तों पर शिव की कृपा बने रहने कि कामना की। उन्होंने कहा रविवार हो या सोमवार हो, अथवा मंगलवार. बुधवार. गुरुवार शनिवार हो या हमारा परिवार हो ,किसी भी वार में हम भगवान शिव की आराधना करसकते है ,जरूरी नहीं कि हम सोमवार का इंतजार करें और शिवजी की आराधना करें, 7 दिन में 1 दिन गवर्नमेंट का छुट्टी का दिन होता है जिसको रविवार कहते हैं, उस दिन सरकार छुट्टी देती है ताकि आप भगवान की पूजा सुमिरन करो..। मंगलवार ,बुधवार, गुरुवार ,शुक्रवार, शनिवार, रविवार, के सभी दिनों में सबसे अच्छा वार है हमारा परिवार..| सभी परिवार के अंदर बैठकर भगवान की जितनी भक्ति करेगे ,उतना फल हमे मिलेगा ..उन्होंने कहा कोई किसी को मुठही में बढ़कर नही रख सकता है ,

उन्होंने मिसाल देते बताया कि एक दोस्त अपने साथी से कहते हैं कि, मेरी पत्नी मेरी मुट्ठी में है. एक युवक कहता है मेरी दोस्त मेरी मुट्ठी में है ,प्रेम कर अगर आप किसी को मुट्ठी में रखो, इसको प्रेम नहीं कहा जाता, प्रेम वह होता है जिसको मुट्ठी में बंद करने की जरूरत नहीं पड़ती, दिल से किया जाता है..|कई लोग खाते है मेरा परिवार मेरी मुट्ठी में है तो यह उनकी गलत सोच है,, इसका मतलब यह हुआ कि आपने प्रेम दिया ही नहीं,, जहां प्रेम होता है व्यक्ति मुट्ठी में नहीं होता। मेरे महादेव भगवान शिव मृत्युलोक की रचना करते हैं, मृत्युलोक का संचार करते हैं, फिर मृत्यु लोग को अपने में समाहित करते हैं, जलवायु पृथ्वी शिव के तत्व हैं।लेकिन शिव कभी नहीं कहते कि यह सब मेरी मुट्ठी में है..|

कई लोग पूछते हैं कि बताएं हम कौन सा व्यापार करें, किराने की दुकान खोले या कपड़े अथवा लोहे की, ताकि हमारे किस्मत चमक जाए .कई स्टूडेंट आते हैं पूछते हैं बताएं मैं साइंस लूं.या मैथ्स. बायो. कॉमर्स लू ताकि में अच्छे नंबरों से पास हो सकूं. लेकिन हम कहते हैं कि किसी से पूछने की जरूरत नहीं है.. कि मैं कौन सा व्यापार करूं कौन सा सब्जेक्ट लूं क्यों कि पढ़ाई अथवा व्यापार तुमको करना है.. तुम जो भी करो उस काम को दिल से करो, और अपने पूरे काम को विश्वास के साथ करेंगे तो निश्चित रूप से आप सफल हो जाएंगे. महाराज जी ने कहा तुम कपड़े की दुकान खोलो, और पूछने वालों को कपड़े की दुकान खोलने का मन था ही नहीं, स्टूडेंट को कॉमर्स लेने की इच्छा थी लेकिन महाराज ने कहा कि आप बायो में सफल होगे तो ये कैसे हो सकता है. कथा का श्रवण करने विधायक द्वय प्रमोद शर्मा अनिता शर्मा बी पहुचे थे |
कथा समापन के पश्चात पंडित मिश्रा के दर्शन के लिए पंडाल से लेकर उनके निवास स्थल तक इतनी भीड़ जमा हो गई कि पुलिस को व्यवस्था संभालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी…दर्शन पाने के लिए सड़क के दोनों किनारे लगी भीड़ की जानकारी जब प्रदीप मिश्रा को हुई तो वे खुली कार में खड़े हो गए और भीड़ का अभिवादन स्वीकार करते हुए अपने निवास तक पहुंचे.जहां श्री शिवाय नमःके साथ एक लोटा जल सभी समस्याओं का हल के जयघोष से पूरा शहर गूंज उठा..
नेवरा में आयोजक घनश्याम अग्रवाल के द्वारा अपने माता-पिता की स्मृति में साथ दिवसीय कांवड़ शिव महापुराण कथा का आयोजन1से 7अगस्त तक किया गया था,सोमवार को विधि विधान के साथ पूजा अर्चना कर कथा का समापन किया गया.

